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  .गौग्राम केंद्र दतिया के पंचगव्य उत्पाद -
1. उबटन
2. फेशियल
3. काजल
4. भ्रंगराज केश तेल
5. केशनिखार शेम्पू
6. पंचगव्य साबुन
7. हर्बल फिनायल
8. नीमार्क (डिटोल का विकल्प)
9. दन्तमंजन
10. गब्यत्रिफला चुर्ण
11. दर्द निबारक तेल 
12. धूपबत्ती
13. हवन समिधा
14. हवन सामग्री सुगंधित प्राक्रतिक औषधियों से निर्मित
15. गौमूत्र नीम मलहम
16. गेंदा मलहम
17. नेत्रोशधि
18. कर्णऔसधि
19. नसिकौशधि(पंचगव्य घ्रत)
20. पंचगव्य घृत खाने वाला
21. गोमयादि नस्य तेल
22. गौअर्क सादा
23. तुलसीआदि, पुनर्नवादि, अर्जुन, पाशाणभेद, हारसिंगार,मुलेठी, चन्द्रमा, रक्तशुद्धि, सप्तरंगी, गुडमारादी, गोखरू, ब्राम्ही, ज्वरनाशक, गौअर्क
24. गिलोय, पुनर्नवा, त्रिफला, पाशाणभेद, अर्जुन, हल्दी, ब्राम्ही, मुलेठी, गोखरू,  सप्तरंगी, गुडमार, मंजिष्ठा, पंचगव्य, पुनर्नवा युक्त घनवटी
25. तक्रासव
26. अम्रत धारा
27. रोल बाम
28. गव्यबाम
29. कैल्शियम अर्क
30. कैल्शियम वटी
31. जर्मोक्लीन ( सुगन्धित एंटीसेप्टिक लिक्विड)
32. गोमय साबुन
33. पंचगव्य नीम सोप
34. बर्तन पाउडर
35. केशयोग तेल गौदुग्ध आधारित
36. गुलाब नीर
37. हील केयर (फटी एड़ियो हेतु)
38. हर्बल फ्लोर क्लीनर (गौनाइल)
39. गोमय माला
40. शतधौत घृत
41. गौमय भष्म
42. पित्तशामक चूर्ण
43. गेंदा स्प्रे
44. बालपाल रस
45. गौमुत्रासव
46. नारीसंजीवनी
47. सुखद विरेचन चूर्ण जल
48. प्रेमहारी अर्क
49. प्रेमहारी वटी
50. पित्त्वहिर्गमन चूर्ण
51. गौमय बर्तन साबुन
52. पंचगव्य ग्लिसरीन सोप
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आग्रह - गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने हेतु, गौ माँ के पवित्र गव्यों से बने इन चमत्कारिक व प्राक्रतिक उत्पादों को एक बार अवश्य प्रयोग करे।
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*साइप्रस_का_इतिहास_और_काश्मीर_का_भविष्य!*
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*इतिहास_वर्तमान_और_भविष्य_सब_कुछ_मिलता_जुलता*
"साइप्रस" नाम के इस छोटे से देश की कहानी को ध्यान से पढ़ें....
आप को कुछ जानी पहचानी लगेगी। कश्मीर जैसी ।।
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"साइप्रस"- भू मध्य सागर - में स्थित - एक छोटा सा द्वीप है जो टर्की {तुर्की} से 40 मील दक्षिण और ग्रीस से 480 मील दक्षिणपूर्व पर स्थित है।
इसी के नजदीक है - मुसलमानों की आपसी मारकाट में बर्बाद "सीरिया" - और - इस्लाम के नाम हर खुनी हमले करने वालो की - "गाजा पट्टी" - और यही पर है -- चारो तरफ से "मुस्लिम देशों" से घिरा हुआ - और - इस्लामिक आतंकी गुट - "हमास" - के आतंकी हमले झेलने वाला देश "इजरायल"  और इसी  के पास मुस्लिम देश - "इजिप्ट" है...
तो  ये है "साइप्रस" की भोगोलिक स्थिति.
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तो बन्धुओं - एक समय इस द्वीप पर 720,000 ग्रीक रहते थे। पर 1571 में टर्की ने इस पर आक्रमण कर दिया और इसके उत्तरी भाग पर इस्ताम्बुल का कब्ज़ा हो गया।

1878 में ब्रिटिश ने इसे लीज पर लिया।
लीज प्रथम विश्व युद्ध के बाद समाप्त हो गया और 1925 में यह द्वीप ब्रिटिश राज की colony बन गई।

1960 में ब्रिटिश ने इसे आज़ाद कर दिया और साइप्रस गणतंत्र बना जहाँ 80% ग्रीक थे और 20% तुर्क थे।

जल्द ही तुर्क मुस्लिम को ग्रीक ईसाई के साथ रहने में परेशानी महसूस होने लगी. 1878 में ओटोमन तुर्क साम्राज्य का शासन समाप्त होने से साइप्रस 'दार-उल -इस्लाम ' नहीं रह गया,
बल्कि यह साइप्रस के तुर्क मुस्लिमों के लिए 'दार-उल -हब्र' (land of conflict) बन गया।

शक्तिशाली ब्रिटिश साम्राज्य के सामने वे कुछ कर नहीं सकते थे ,पर ब्रिटिश के जाते ही स्थिति बदल गई...
साइप्रस के तुर्क मुस्लिम अब भी कुछ करने की स्थिति में नहीं थे क्यूंकि उनकी संख्या कुल जनसँख्या का 20% थी।

इसलिए 1974 में तुर्क मुस्लिम ने टर्की को साइप्रस पर आक्रमण करने को बुलाया। साइप्रस की सरकार इस आक्रमण को रोक नहीं पाई।

1975 में तुर्क मुस्लिमों ने विभाजन की मांग की।
अलग हुए भाग ने अपने आप को 1983 में आज़ाद घोषित कर दिया,
और नाम रखा 'Turkish Republic of northern cyprus '
और टर्की ने उसे एक नए देश का दर्जा दे दिया।

गौर करने वाली बात यह है कि पहले 16 वीं सदी तक इस देश में सिर्फ ग्रीक ईसाई रहते थे..
1571 में तुर्क आयें एवं उत्तरी साइप्रस में ग्रीक ईसाई के साथ रहने लगे।

सबसे दुखद बात यह है कि 1974 में जुलाई अगस्त की घुसपैठ में तुर्की आक्रमणकारियों ने बर्बरता पूर्वक ग्रीक ईसाईयों को वहां से भगा दिया।

200 ,000 ग्रीक ईसाई को बलपूर्वक निकाल दिया। वे लोग अपना घर बार छोड़कर दक्षिण भाग में आ गए जहाँ ग्रीक ईसाई रहते थे।

वे लोग अपने ही घर में शरणार्थी बन गए और ये सब किया गया ठीक विभाजन कि मांग से पहले और उसके बाद 1983 में साइप्रस का एकतरफ़ा विभाजन हो गया।

Ethnic cleansing के बाद भी उत्तरी भाग में 12 ,000 ग्रीक रह गए।

20 वर्षों के बाद वहां सिर्फ 715 ग्रीक रह गए और अब शून्य -- {एक भी नही}--
कहाँ गए ये लोग --??--

"तथाकथित आजादी" और "बंटवारे" के समय खतरे से अनजान हिन्दू" भी पाकिस्तान में रह गये थे।

जो कि -- वहां हिन्दू 27% थे और आज 27%से 3% हो गए।

बाकी को या तो मार दिया गया  या धर्मान्तरित कर दिए गये।

ये एक विदेशी चैनल का लिंक है इसे खोल कर साइप्रस की कहानी आप यहाँ भी जान सकते है। 
https://www.youtube.com/watch?v=4ehCCjeUIQ0
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अगर आप ये लिंक खोल कर पढ़ सके तो -- आप एक पाकिस्तानी हिन्दू की दुखद कहानी जान पायेंगे।
http://khabarindiatv.com/india/national-sad-story-of-hindu-in-pakistan-1386.html?page=5

मैंने -- यह सब क्यूँ लिखा ? ...

क्यूंकि कश्मीर,पाकिस्तान और बंगलादेश में आज भी हो रहा है।

क्या हम लोग "साइप्रस देश" या "कश्मीर" से कुछ सीखेगे ???
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अब "साइप्रस" जैसा ही -- हाल "फ्रांस" और "नाईजीरिया" का हो रहा है।

सिर्फ तीन दशक पहले "अल्जीरिया और सेनेगल" से कई मुस्लिम वहां मचे गृहयुद्ध, भुखमरी से त्रस्त होकर फ्रांस में "शरणार्थी" बनकर आये थे..उस समय फ़्रांस में वामपंथी दल की सरकार थी और उन्होंने इन्हें शरण दे दी थी।

नतीजा  --??--
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भारत की तरह  नाइजीरिया का मुस्लिम आतंकवादी संघठन "बोको हराम" कभी स्कूलों से एक साथ "तीन तीन सौ लडकियाँ" अगवा कर लेता है और अभी हाल ही में एक साथ कई गाँव और कस्बे जला दिये और हजारों लोगो को मार दिया। 

केवल एक बार आँखे बंद कर जलते हुए "नाइज़ीरिया" की पीड़ा को अपनी पीड़ा समझ कल्पना कर के "देखो -- जलने" से बच कर भाग रहे उनके बच्चों में अपने बच्चों की तस्वीर बसा कर देखो -- और -- केवल सोचो ही नही -- निर्णय करो कि -- अभी भी हम इस आतंकवाद के खिलाफ क्या कर सकते हैं --??--
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आंतकी "याकूब मैनन" के -"जनाजे की भीड़"- भी मेरी इस पोस्ट को "सही" साबित कर रही थी।
उस भीड़ की -"नियत"- बिलकुल साफ़ झलक रही थी।

इस से कुछ दिन पहले - जम्मू में - हिन्दुओं द्वारा - इराक के - एक आंतकी संगठन "इस्लामिक स्टेट"  का "झंडा" जलाने पर --"जम्मू कश्मीर" में मुसल्लों ने दंगा किया था और शासन को  "कर्फ्यू" लगाना पड़ा था।

*शायद इसको पढ़कर किसी सिरफिरे "सेखुलर" की आंखे खुल जाये ------*
  पर ये भी सत्य है आज हालात कुछ अलग हैं कश्मीर के--😊🙏

*काली कमाई के रास्ते खत्म कर दिए जाएँ , नोट बंदी की जरूरत ही क्यों होगी ?*
मैं एक डॉक्टर हूं, और इस लिए
*" सभी ईमानदार डॉक्टर्स से क्षमा सहित प्रार्थना ...! "*
• ........हार्ट अटैक " हो गया ...
डॉक्टर कहता है -  Streptokinase इंजेक्शन ले के आओ ... 9,000/= रु का ... *इंजेक्शन की असली कीमत 700/= - 900/= रु के बीच है .., पर उसपे MRP 9,000/= का है !* आप क्या करेंगे ?
•..............टाइफाइड हो गया ...
डॉक्टर ने लिख दिया - *कुल 14 Monocef लगेंगे ! होल - सेल दाम 25/= रु है ... अस्पताल का केमिस्ट आपको 53/= रु में देता है ...* आप क्या करेंगे ??
•............,,,,किडनी फेल हो गयी है .., *हर तीसरे दिन Dialysis होता है .., Dialysis के बाद एक इंजेक्शन लगता है - MRP शायद 1800 रु है !*
*आप सोचते हैं की बाज़ार से होलसेल मार्किट से ले लेता हूँ ! पूरा हिन्दुस्तान आप खोज मारते हैं , कही नहीं मिलता ... क्यों ?*
*कम्पनी सिर्फ और सिर्फ डॉक्टर को सप्लाई देती है !!*
*इंजेक्शन की असली कीमत 500/= है , पर डॉक्टर अपने अस्पताल में MRP पे यानि 1,800/= में देता है ...* आप क्या करेंगे ??
*..........इन्फेक्शन हो गया है .., डॉक्टर ने जो Antibiotic लिखी , वो 540/= रु का एक पत्ता है .., वही Salt किसी दूसरी कम्पनी का 150/= का है और जेनेरिक 45/= रु का ... पर केमिस्ट आपको मना कर देता है .., नहीं जेनेरिक हम रखते ही नहीं , दूसरी कम्पनी की देंगे नहीं .., वही देंगे , जो डॉक्टर साहब ने लिखी है ... यानी 540/= वाली ?* आप क्या करेंगे ??
• बाज़ार में *Ultrasound Test 750/= रु में होता है .., चैरिटेबल डिस्पेंसरी 240/= रु में करती है ! 750/= में डॉक्टर का कमीशन 300/= रु है !*
MRI में डॉक्टर का कमीशन Rs. 2,000/= से 3,000/= के बीच है !
*डॉक्टर और अस्पतालों की ये लूट , ये नंगा नाच , बेधड़क , बेखौफ्फ़ देश में चल रहा है !*
Pharmaceutical कम्पनियों की Lobby इतनी मज़बूत है , की उसने देश को सीधे - सीधे बंधक बना रखा है !
डॉक्टर्स और दवा कम्पनियां मिली हुई हैं ! दोनों मिल के सरकार को ब्लैकमेल करते हैं ...!!
सबसे बडा यक्ष प्रश्न ...
*मीडिया दिन रात क्या दिखाता है ?*
*गड्ढे में गिरा प्रिंस .., बिना ड्राईवर की कार , राखी सावंत , Bigboss , सास बहू और साज़िश , सावधान , क्राइम रिपोर्ट , Cricketer की Girl Friend , ये सब दिखाता है , किंतु ... Doctor's , Hospital's और Pharmaceutical company कम्पनियों की , ये खुली लूट क्यों नहीं दिखाता ?*
मीडिया नहीं दिखाएगा , तो कौन दिखाएगा ?
मेडिकल Lobby की दादागिरी कैसे रुकेगी ?
इस Lobby ने सरकार को लाचार कर रखा है ?
Media क्यों चुप है ?
*20/= रु मांगने पर ऑटोरिक्सा वाले को , तो आप कालर पकड़ के मारेंगे , ..!*
डॉक्टर साहब का क्या करेंगे ???
*यदि आपको ये सत्य लगता है , तो कर दो फ़ॉरवर्ड , सब को ! जागरूकता लाइए और दूसरों को भी जागरूक बनाने में अपना सहयोग दीजिये !!!*
The Makers of Ideal Society
        *एक सोच बदलाव की* . . . . .
आप तीन लोगो भेज दो और ओ तीन लोग , अगले तीन लोगो को जरूर भेज देगे !
https://www.facebook.com/DrPardeep-Aggarwal-381141815344043/

नेपाल के प्रधानमंत्री
के.पी ओली जी ने भारत के
सभी बिकाऊ अन्धविश्वासी पाखण्डी चैनलों पर बैन लगा दिया है.

जिसका
प्रमुख कारण है
इन चैनलों से रात-दिन अन्धविश्वास को बढ़ावा देना.
कुबेरलक्ष्मी धनवर्षा यन्त्र,
हनुमान रक्षा कवच आदि आदि.

नेपाल के प्रधानमंत्री यह बात भलीभाँति जानते हैं कि यदि धन वर्षा यन्त्र इतना कारगर होता तो भारत के 20 करोड़ लोग भूखे न मरते,
हनुमान रक्षाकवच इतना कारगर होता तो भारत के सभी राजनेताओं को Z+, Y श्रेणी की सुरक्षा पर लाखों खर्च न करके सबके गले में हनुमान यन्त्र लटका देते.

नेपाल के प्रधानमंत्री
ओली जी के इस फैसले का मैं स्वागत करती हूँ.

भारत के बारे में
12 ऐसे तथ्य जो मजाकिया होने के साथ सच भी हैं...

1.
भारत एक ऐसा देश है
जो कई स्थानीय भाषाओं द्वारा विभाजित है
और
एक विदेशी भाषा द्वारा  एकजुट है.

2.
भारत में लोग
ट्रैफिक सिग्नल की रेड लाइट पर भले ही ना रुकें,
लेकिन अगर
एक काली बिल्ली रास्ता काट जाए तो हजारों लोग लाइन में खड़े हो जाते हैं.
अब तो लगता है
ट्रैफिक पुलिस में भी काली बिल्लियों की भर्ती करनी पड़ेगी.

3.
चीन
अपनी सरकार की वजह से तरक्की कर रहा है
और
भारत में तरक्की ना होने का सबसे बड़ा कारण उसकी अपनी सरकारें ही रही हैं.

4.
भारत का मतदाता
वोट देने से पहले उम्मीदवार की जाति देखता है,
न कि उसकी योग्यता.
अब इन लोगों को कौन समझाये कि भाई तुम देश के लिए नेता ढूंढ रहे हो,
न कि अपने लिए जीजा.

5. भारत में आप
जुगाड़ से करीब-करीब सब कुछ पा सकते हैं.

6.
हम
एक ऐसे देश में रहते हैं,
जहाँ
नोबेल शान्ति पुरस्कार मिलने से पहले लगभग कोई भारतीय नहीं जानता था कि कैलाश सत्यार्थी कौन है.
लेकिन अगर एक
रशियन टेनिस खिलाड़ी
हमारे देश के एक क्रिकेटर को नहीं जानती
तो ये हमारे लिए अपमान की बात है.

7.
भारत
गरीब लोगों का
एक अमीर देश है,
भारत की जनता ने दो फिल्मों,
बाहुबली और बजरंगी भाईजान,
पर 700 करोड़ खर्च कर दिए.

8.
भारत में
किसी अनजान से
बात करना खतरनाक है,
लेकिन किसी अनजान से शादी करना बिलकुल ठीक.

9.
हम भारतीय
अपनी बेटी की पढ़ाई से ज्यादा खर्च बेटी की शादी पे कर देते हैं.

10.
हम एक ऐसे देश में
रहते है, जहाँ एक पुलिसवाले को देखकर लोग सुरक्षित महसूस करने के बजाए घबरा जाते हैं.

11.
हम भारतीय
हेलमेट सुरक्षा के लिहाज से कम,
चालान के डर से ज्यादा पहनते है

हँसी तो तब आती है...

जब
विजय माल्या को
भारत में नहीं पकड़ पाते,
और बातें
दाऊद इब्राहीम को
पाकिस्तान से लाने की करते हैं.
https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=218270192131343&id=100018450913469

गौमूत्र पीने के क्या फायदे हो सकते हैं ....!!.....?
आयूर्वेद के अनुसार देसी गाय का "गौ मूत्र" एक संजीवनी है| गौ-मूत्र एक अमृत के सामान है जो दीर्घ जीवन प्रदान करता है, पुनर्जीवन देता है, रोगों को भगा देता है, रोग प्रतिकारक शक्ति एवं शरीर की मांस-पेशियों को मज़बूत करता है|

यह शरीर में तीनों दोषों का संतुलन भी बनाता है और कीटनाशक की तरह भी काम करता है|

संसाधित किया हुआ गौ मूत्र अधिक प्रभावकारी प्रतिजैविक, रोगाणु रोधक (antiseptic), ज्वरनाशी (antipyretic), कवकरोधी (antifungal) और प्रतिजीवाणु (antibacterial) बन जाता है|
ये एक जैविक टोनिक के सामान है| यह शरीर-प्रणाली में औषधि के सामान काम करता है और अन्य औषधि की क्षमताओं को भी बढ़ाता है|
ये अन्य औषधियों के साथ, उनके प्रभाव को बढ़ाने के लिए भी ग्रहण किया जा सकता है|
गौ-मूत्र कैंसर के उपचार के लिए भी एक बहुत अच्छी औषधि है | यह शरीर में सेल डिवीज़न इन्हिबिटोरी एक्टिविटी को बढ़ाता है और कैंसर के मरीज़ों के लिए बहुत लाभदायक है|
आयुर्वेद ग्रंथों के अनुसार गौ-मूत्र विभिन्न जड़ी-बूटियों से परिपूर्ण है| यह आयुर्वेदिक औषधि गुर्दे, श्वसन और ह्रदय सम्बन्धी रोग, संक्रामक रोग (infections) और संधिशोथ (Arthritis), इत्यादि कई व्याधियों से मुक्ति दिलाता है|
गाय गौ मूत्र में जो मुख्य तत्व हैउनमें से कुछ का विवरण जानिए।

1. यूरिया (Urea) : यूरिया मूत्र में पाया जाने वाला प्रधान तत्व है और प्रोटीन रस-प्रक्रिया का अंतिम उत्पाद है| ये शक्तिशाली प्रति जीवाणु कर्मक है|

2. यूरिक एसिड (Uric acid): ये यूरिया जैसा ही है और इस में शक्तिशाली प्रति जीवाणु गुण हैं| इस के अतिरिक्त ये केंसर कर्ता तत्वों का नियंत्रण करने में मदद करते हैं|

3. खनिज (Minerals): खाद्य पदार्थों से व्युत्पद धातु की तुलना मूत्र से धातु बड़ी सरलता से पुनः अवशोषित किये जा सकते हैं| संभवतः मूत्र में खाद्य पदार्थों से व्युत्पद अधिक विभिन्न प्रकार की धातुएं उपस्थित हैं| यदि उसे ऐसे ही छोड़ दिया जाए तो मूत्र पंकिल हो जाता है| यह इसलिये है क्योंकि जो एंजाइम मूत्र में होता है वह घुल कर अमोनिया में परिवर्तित हो जाता है, फिर मूत्र का स्वरुप काफी क्षार में होने के कारण उसमे बड़े खनिज घुलते नहीं है | इसलिये बासा मूत्र पंकिल जैसा दिखाई देता है | इसका यह अर्थ नहीं है कि मूत्र नष्ट हो गया | मूत्र जिसमे अमोनिकल विकार अधिक हो जब त्वचा पर लगाया जाये तो उसे सुन्दर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है |

4. उरोकिनेज (Urokinase):यह जमे हुये रक्त को घोल देता है,ह्रदय विकार में सहायक है और रक्त संचालन में सुधार करता है |

5. एपिथिल्यम विकास तत्व (Epithelium growth factor)क्षतिग्रस्त कोशिकाओं और ऊतक में यह सुधर लाता है और उन्हें पुनर्जीवित करता है|

6. समूह प्रेरित तत्व(Colony stimulating factor): यह कोशिकाओं के विभाजन और उनके गुणन में प्रभावकारी होता है |

7. हार्मोन विकास (Growth Hormone): यह विप्रभाव भिन्न जैवकृत्य जैसे प्रोटीन उत्पादन में बढ़ावा, उपास्थि विकास,वसा का घटक होना|

8. एरीथ्रोपोटिन (Erythropotein): रक्ताणु कोशिकाओं के उत्पादन में बढ़ावा |

9. गोनाडोट्रोपिन (Gonadotropins): मासिक धर्म के चक्र को सामान्य करने में बढ़ावा और शुक्राणु उत्पादन |

10. काल्लीकरीन (Kallikrin): काल्लीडीन को निकलना, बाह्य नसों में फैलाव रक्तचाप में कमी |

11. ट्रिप्सिन निरोधक (Tripsin inhibitor):मांसपेशियों के अर्बुद की रोकथाम और उसे स्वस्थ करना |

12. अलानटोइन (Allantoin): घाव और अर्बुद को स्वस्थ करना |

13. कर्क रोग विरोधी तत्व (Anti cancer substance):निओप्लासटन विरोधी, एच -११ आयोडोल - एसेटिक अम्ल, डीरेकटिन, ३ मेथोक्सी इत्यादि किमोथेरेपीक औषधियों से अलग होते हैं जो सभी प्रकार के कोशिकाओं को हानि और नष्ट करते हैं | यह कर्क रोग के कोशिकाओं के गुणन को प्रभावकारी रूप से रोकता है और उन्हें सामान्य बना देता है |

14. नाइट्रोजन (Nitrogen) : यह मूत्रवर्धक होता है और गुर्दे को स्वाभाविक रूप से उत्तेजित करता है |

15. सल्फर (Sulphur) : यह आंत कि गति को बढाता है और रक्त को शुद्ध करता है |

16. अमोनिया (Ammonia) : यह शरीर की कोशिकाओं और रक्त को सुस्वस्थ रखता है |

17. तांबा (Copper) : यह अत्यधिक वसा को जमने में रोकधाम करता है |

18. लोहा (Iron) : यह आरबीसी संख्या को बरकरार रखता है और ताकत को स्थिर करता है |

19. फोस्फेट (Phosphate) : इसका लिथोट्रिपटिक कृत्य होता है |

20. सोडियम (Sodium) : यह रक्त को शुद्ध करता है और अत्यधिक अम्ल के बनने में रोकथाम करता है |

21. पोटाशियम (Potassium) : यह भूख बढाता है और मांसपेशियों में खिझाव को दूर करता है |

22. मैंगनीज (Manganese) : यह जीवाणु विरोधी होता है और गैस और गैंगरीन में रहत देता है |

23. कार्बोलिक अम्ल (Carbolic acid) : यह जीवाणु विरोधी होता है |

24. कैल्सियम (Calcium) : यह रक्त को शुद्ध करता है और हड्डियों को पोषण देता है , रक्त के जमाव में सहायक|

25. नमक (Salts) : यह जीवाणु विरोधी है और कोमा केटोएसीडोसिस की रोकथाम |

26. विटामिन ए बी सी डी और ई (Vitamin A, B, C, D & E): अत्यधिक प्यास की रोकथाम और शक्ति और ताकत प्रदान करता है |

27. लेक्टोस शुगर (Lactose Sugar): ह्रदय को मजबूत करना, अत्यधिक प्यास और चक्कर की रोकथाम |

28. एंजाइम्स (Enzymes): प्रतिरक्षा में सुधार, पाचक रसों के स्रावन में बढ़ावा |

29. पानी (Water) : शरीर के तापमान को नियंत्रित करना| और रक्त के द्रव को बरक़रार रखना |

30. हिप्पुरिक अम्ल (Hippuric acid) : यह मूत्र के द्वारा दूषित पदार्थो का निष्कासन करता है |

31. क्रीयटीनीन (Creatinine) : जीवाणु विरोधी|

32.स्वमाक्षर (Swama Kshar): जीवाणु विरोधी, प्रतिरक्षा में सुधार, विषहर के जैसा कृत्य |

अपने विवेक का इस्तेमाल करें एवं अपने स्वास्थय के लिए गौमूत्र का उपयोग करे .....
धन्यवाद.....
"स्वदेशी भारत भंडार"
सम्पर्क:-9717298110


वियतनाम विश्व का एक छोटा सा देश है जिसने अमेरिका जैसे बड़े बलशाली देश को झुका दिया। लगभग बीस वर्षों तक चले युद्ध में अमेरिका पराजित हुआ। अमेरिका पर विजय के बाद वियतनाम के राष्ट्राध्यक्ष से एक पत्रकार ने एक सवाल पूछा...

जाहिर सी बात है कि सवाल यही होगा कि आप युद्ध कैसे जीते या अमेरिका को कैसे झुका दिया... ??

पर उस प्रश्न का दिए गए उत्तर को सुनकर आप हैरान रह जायेंगे और आपका सीना भी गर्व से भर जायेगा।
दिया गया उत्तर पढ़िये...!!

सभी देशों में सबसे शक्ति शाली देश अमेरिका को हराने के लिए मैंने एक महान व् श्रेष्ठ भारतीय राजा का चरित्र पढ़ा।
और उस जीवनी से मिली प्रेरणा व युद्धनीति का प्रयोग कर हमने सरलता से विजय प्राप्त की..!!

आगे पत्रकार ने पूछा...
"कौन थे वो महान राजा ?"

मित्रों जब मैंने पढ़ा तब से जैसे मेरा सीना गर्व से चौड़ा हो गया आपका भी सीना गर्व से भर जायेगा...!!

वियतनाम के राष्ट्राध्यक्ष ने
खड़े होकर जवाब दिया...
"वो थे भारत के राजस्थान में मेवाड़ के महाराजा महाराणा प्रताप सिंह !!"

⚔महाराणा प्रताप का नाम
लेते समय उनकी आँखों में एक वीरता भरी चमक थी..आगे उन्होंने कहा...!!

"अगर ऐसे राजा ने हमारे देश में जन्म लिया होता तो हमने सारे विश्व पर राज किया होता"

कुछ वर्षों के बाद उस राष्ट्राध्यक्ष की मृत्यु हुई तो जानिए उसने अपनी समाधि पर क्या लिखवाया......!!

⚔"यह महाराणा प्रताप के एक शिष्य की समाधि है !!"

कालांतर में वियतनाम के विदेशमंत्री भारत के दौरे पर आए थे। पूर्व नियोजित कार्य क्रमानुसार उन्हें पहले लाल किला व बाद में गांधीजी की समाधि दिखलाई गई....!!

ये सब दिखलाते हुए उन्होंने पूछा " मेवाड़ के महाराजा महाराणा प्रताप की समाधि कहाँ है ...?"

तब भारत सरकार के अधिकारी चकित रह गए, और उनहोंने वहाँ उदयपुर
का उल्लेख किया.. वियतनाम के विदेशमंत्री उदयपुर गये, वहाँ उनहोंने महाराणा प्रताप की समाधि के दर्शन किये...!!

समाधी के दर्शन करने के बाद उन्होंने समाधि के पास की मिट्टी उठाई और उसे अपने बैग में भर लिया इस पर पत्रकार ने मिट्टी रखने का कारण पूछा ...!!

उन विदेशमंत्री महोदय ने कहा "ये मिट्टी शूरवीरों की है
इस मिट्टी में एक महान् राजा ने जन्म लिया ये मिट्टी मैं अपने देश की मिट्टी में मिला दूंगा ..!!

"ताकि मेरे देश में भी ऐसे ही वीर पैदा हो। मेरा यह राजा केवल भारत का गर्व न होकर सम्पूर्ण विश्व का गर्व होना चाहिए"


जैसे दालचीनी में
दाल नहीं होती
आमलेट में आम नही होता
वैसे ही
न्यू पेंशन स्कीम में पेंशन नहीं है| 😔😔😭🤔🤔


*क्या धर्म बढ़ रहा है ??*

1.) पहले 10 गाँवों में एक मन्दिर हुआ करता था आज एक गाँव में 10 मन्दिर हैं । और तो और घर घर में लोगों ने पर्सनल मन्दिर बनवा रक्खे हैं ।

2.) पहले सिर्फ हजारो लोग ही केदारनाथ , अमरनाथ , वैष्णो देवी इत्यादि जाते थे परन्तु आज करोड़ों लोग इन तीर्थ स्थानों पर जाते हैं ।

3.) पहले हजारों लाखों रूपये का चढ़ावा चढ़ता था आज करोड़ों अरबों रूपये का चढ़ावा चढ़ता है।

4.) पहले कभी कभी भंडारे हुआ करते थे आज हजारो भंडारे हर रोज होते हैं ।

5.) पहले कुछ ही तरह के व्रत हुआ करते थे आज बीसों तरह के व्रत है ।

6.) पहले कुछ ही साधू , गुरु , संत फकीर हुआ करते थे आज लाखों साधू हैं ।

इतना सब कुछ बढ़ गया है परन्तु सवाल खड़ा होता है कि क्या इस सब से धर्म बढ़ा है ? क्या इस सब के बढ़ने से अच्छाई और सच्चाई बढ़ी है ? क्या इस सब के बढ़ने से ईमानदारी और इंसानियत में वृद्धि हुई है ?  तो सब का जवाब होगा नहीं । क्योंकि आज हर तरह की बुराई ,फिर वो चाहे भ्रष्टाचार , बलात्कार , चोरी , डकैती , शोषण , मांसाहार , गरीबी हो या फिर आतंकवाद हो सब तरह बुराई बढ़ती जा रही है ।

क्या इसका कारण ये तो नहीं कि जिन कार्यो को धर्म मानकर हम कर रहे है या करते आ रहे हो वो सब धर्म हो ही नहीं ! बल्कि धर्म के नाम चलती आ रही सिर्फ जर्जर हो चुकी प्रथाएं ही हो जिन्हें हम सिर्फ बोझ की तरफ ढोते आ रहे हों ।

आज अधिकतर हिन्दुओं को लगता है कि वे धार्मिक है क्योकि वे सुबह शाम मन्दिर का घंटा बजा के आते हैं , वे सुबह शाम मन्दिर में रखी मूर्ति के आगे अगरबत्ती दिखा के आते हैं, वे सुबह शाम मन्दिर या मन्दिर की मूर्ति को प्रणाम करके आते हैं । लेकिन ऐसा सोचना उनका भ्रम है इसका वास्तविकता से कोई लेना देना नहीं है । घंटे , अगरबत्ती , व्रत , भोग , इत्यादि का न तो धर्म से कोई लेना देना है और न ही ईश्वर से। क्योंकि वेदोक्त धर्म के जो दस लक्षण लिखे हैं, ये उनसे बिल्कुल मेल नहीं खाते और न ही ईश्वर के स्वरूप या स्वभाव इत्यादि से मेल खाते हैं क्योकि इन घंटो अगरबत्तियों का ईश्वर पर कोई असर नहीं पड़ता । धर्म अधर्म, बन्ध मोक्ष व आत्मा परमात्मा के सच्चे स्वरूप को जानना है तो वेदों पर आधारित महर्षि दयानंद कृत सत्यार्थप्रकाश अवश्य पढ़ें ।


जरूर पढ़ें--

सोनाली बेंद्रे - कैंसर
अजय देवगन - लिट्राल अपिकोंडिलितिस
(कंधे की गंभीर बीमारी)
इरफान खान - कैंसर
मनीषा कोइराला - कैंसर
युवराज सिंह - कैंसर
सैफ अली खान - हृदय घात
रितिक रोशन - ब्रेन क्लोट
अनुराग बासु - खून का कैंसर
मुमताज - ब्रेस्ट कैंसर
शाहरुख खान - 8 सर्जरी
(घुटना, कोहनी, कंधा आदि)
ताहिरा कश्यप (आयुष्मान खुराना की पत्नी) - कैंसर
राकेश रोशन - गले का कैंसर
लीसा राय - कैंसर
राजेश खन्ना - कैंसर,
विनोद खन्ना - कैंसर
नरगिस - कैंसर
फिरोज खान - कैंसर
टोम अल्टर - कैंसर...

ये वो लोग हैं  या थे-
जिनके पास पैसे की कोई कमी नहीं है/थी!
खाना हमेशा डाइटीशियन की सलाह से खाते है।
दूध भी ऐसी गाय या भैंस का पीते हैं
जो AC में रहती है और बिसलेरी का पानी पीती है।
जिम भी जाते है।
रेगुलर शरीर के सारे टेस्ट करवाते है।
सबके पास अपने हाई क्वालिफाइड डॉक्टर है।
अब सवाल उठता है कि आखिर
अपने शरीर की इतनी देखभाल के बावजूद भी इन्हें इतनी गंभीर बीमारी अचानक कैसे हो गई।

क्योंकि ये प्राक्रतिक चीजों का इस्तेमाल
बहुत कम करते है।
या मान लो बिल्कुल भी नहीं करते।
जैसा हमें प्रकृति ने दिया है ,
उसे उसी रूप में ग्रहण करो वो कभी नुकसान नहीं देगा।
कितनी भी फ्रूटी पी लो ,
वो शरीर को आम के गुण नहीं दे सकती।
अगर हम इस धरती को प्रदूषित ना करते
तो धरती से निकला पानी बोतल बन्द पानी से
लाख गुण अच्छा था।

आप एक बच्चे को जन्म से ऐसे स्थान पर रखिए
जहां एक भी कीटाणु ना हो।
बड़ा होने से बाद उसे सामान्य जगह पर रहने के लिए छोड़ दो,
वो बच्चा एक सामान्य सा बुखार भी नहीं झेल पाएगा!
क्योंकि उसके शरीर का तंत्रिका तंत्र कीटाणुओ से लड़ने के लिए विकसित ही नही हो पाया।
कंपनियों ने लोगो को इतना डरा रखा है,
मानो एक दिन साबुन से नहीं नहाओगे तो तुम्हे कीटाणु घेर लेंगे और शाम तक पक्का मर जाओगे।
समझ नहीं आता हम कहां जी रहे है।
एक दूसरे से हाथ मिलाने के बाद लोग
सेनिटाइजर लगाते हुए देखते हैं हम।

इंसान सोच रहा है- पैसों के दम पर हम जिंदगी जियेंगे।
आपने कभी गौर किया है--
पिज़्ज़ा बर्गर वाले शहर के लोगों की
एक बुखार में धरती घूमने लगती है।
और वहीं दूध दही छाछ के शौकीन
गांव के बुजुर्ग लोगों का वही बुखार बिना दवाई के ठीक हो जाता है।
क्योंकि उनकी डॉक्टर प्रकृति है।
क्योंकि वे पहले से ही सादा खाना खाते आए..

महान क्रांतिकारी वीर सावरकर का अपमान करने वाले देशद्रोही ...

दिल्ली यूनिवर्सिटी में हाल में स्थापित किये गए वीर सावरकर की मूर्ति पर कुछ असामाजिक तत्वों ने जूतों की माला पहनाकर काला रंग पोत दिया। जिन्होंने भी यह कार्य किया उन्होंने न केवल अपरिपक्वता का परिचय दिया अपितु सामान्य शिष्टाचार का भी पालन नहीं किया। कमाल देखिये ये लोग भगत सिंह जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे। इन मूर्खों को यह भी नहीं मालूम कि भगत सिंह ने वीर सावरकर रचित प्रतिबंधित पुस्तक "1857 का स्वातंत्रय समर "को छपवाकर वितरित किया था। भगत सिंह के मन में सावरकर के लिए श्रद्धाभाव था।  हमारे देश में एक विशेष जमात यह राग अलाप रही है कि वीर सावरकर गद्दार थे क्यूंकि उन्होंने अंग्रेजों से माफ़ी मांगी थी। सावरकर की आलोचना करने से पहले वीर सावरकर को जान तो लीजिये।

1. वीर सावरकर पहले क्रांतिकारी देशभक्त थे जिन्होंने 1901 में ब्रिटेन की रानी विक्टोरिया की मृत्यु पर नासिक में शोक सभा का विरोध किया और कहा कि वो हमारे शत्रु देश की रानी थी, हम शोक क्यूँ करें? क्या किसी भारतीय महापुरुष के निधन पर ब्रिटेन में शोक सभा हुई है.?

2. वीर सावरकर पहले देशभक्त थे जिन्होंने एडवर्ड सप्तम के राज्याभिषेक समारोह का उत्सव मनाने वालों को त्र्यम्बकेश्वर में बड़े बड़े पोस्टर लगाकर कहा था कि गुलामी का उत्सव मत मनाओ...

3. विदेशी वस्त्रों की पहली होली पूना में 7 अक्तूबर 1905 को वीर सावरकर ने जलाई थी...

4. वीर सावरकर पहले ऐसे क्रांतिकारी थे जिन्होंने विदेशी वस्त्रों का दहन किया, तब बाल गंगाधर तिलक ने अपने पत्र केसरी में उनको शिवाजी के समान बताकर उनकी प्रशंसा की थी जबकि इस घटना की दक्षिण अफ्रीका के अपने पत्र 'इन्डियन ओपीनियन' में गाँधी ने निंदा की थी...

5. सावरकर द्वारा विदेशी वस्त्र दहन की इस प्रथम घटना के 16 वर्ष बाद गाँधी उनके मार्ग पर चले और 11 जुलाई 1921 को मुंबई के परेल में विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार किया...

6. सावरकर पहले भारतीय थे जिनको 1905 में विदेशी वस्त्र दहन के कारण पुणे के फर्म्युसन कॉलेज से निकाल दिया गया और दस रूपये जुर्माना लगाया ... इसके विरोध में हड़ताल हुई... स्वयं तिलक जी ने 'केसरी' पत्र में सावरकर के पक्ष में सम्पादकीय लिखा...

7. वीर सावरकर ऐसे पहले बैरिस्टर थे जिन्होंने 1909 में ब्रिटेन में ग्रेज-इन परीक्षा पास करने के बाद ब्रिटेन के राजा के प्रति वफादार होने की शपथ नही ली... इस कारण उन्हें बैरिस्टर होने की उपाधि का पत्र कभी नही दिया गया...

8. वीर सावरकर पहले ऐसे लेखक थे जिन्होंने अंग्रेजों द्वारा ग़दर कहे जाने वाले संघर्ष को '1857 का स्वातंत्र्य समर' नामक ग्रन्थ लिखकर सिद्ध कर दिया...

9. सावरकर पहले ऐसे क्रांतिकारी लेखक थे जिनके लिखे '1857 का स्वातंत्र्य समर' पुस्तक पर ब्रिटिश संसद ने प्रकाशित होने से पहले प्रतिबन्ध लगाया था...

10. '1857 का स्वातंत्र्य समर' विदेशों में छापा गया और भारत में भगत सिंहने इसे छपवाया था जिसकी एक एक प्रति तीन-तीन सौ रूपये में बिकी थी... भारतीय क्रांतिकारियों के लिए यह पवित्र गीता थी... पुलिस छापों में देशभक्तों के घरों में यही पुस्तक मिलती थी...

11. वीर सावरकर पहले क्रान्तिकारी थे जो समुद्री जहाज में बंदी बनाकर ब्रिटेन से भारत लाते समय आठ जुलाई 1910 को समुद्र में कूद पड़े थे और तैरकर फ्रांस पहुँच गए थे...

12. सावरकर पहले क्रान्तिकारी थे जिनका मुकद्दमा अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय हेग में चला, मगर ब्रिटेन और फ्रांस की मिलीभगत के कारण उनको न्याय नही मिला और बंदीबनाकर भारत लाया गया...

13. वीर सावरकर विश्व के पहले क्रांतिकारी और भारत के पहले राष्ट्रभक्त थे जिन्हें अंग्रेजी सरकार ने दो आजन्म कारावास की सजा सुनाई थी...

14. सावरकर पहले ऐसे देशभक्त थे जो दो जन्म कारावास की सजा सुनते ही हंसकर बोले- "चलो, ईसाई सत्ता ने हिन्दू धर्म के पुनर्जन्म सिद्धांत को मान लिया."

15. वीर सावरकर पहले राजनैतिक बंदी थे जिन्होंने काला पानी की सजा के समय 10 साल से भी अधिक समय तक आजादी के लिए कोल्हू चलाकर 30 पौंड तेल प्रतिदिन निकाला...

16. वीर सावरकर काला पानी में पहले ऐसे कैदी थे जिन्होंने काल कोठरी की दीवारों पर कंकड़ और कोयले से कवितायें लिखी और 6000 पंक्तियाँ याद रखी...

17. वीर सावरकर पहले देशभक्त लेखक थे, जिनकी लिखी हुई पुस्तकों पर आजादी के बाद कई वर्षों तक प्रतिबन्ध लगा रहा...

18. आधुनिक इतिहास के वीर सावरकर पहले विद्वान लेखक थे जिन्होंने हिन्दू को परिभाषित करते हुए लिखा कि-'आसिन्धु सिन्धुपर्यन्ता यस्य भारत
भूमिका.पितृभू: पुण्यभूश्चैव स वै हिन्दुरितीस्मृतः.'अर्थात समुद्र से हिमालय तक भारत भूमि जिसकी पितृभू है जिसके पूर्वज यहीं पैदा हुए हैं व यही पुण्य भू है, जिसके तीर्थ भारत भूमि में ही हैं, वही हिन्दू है...

19. वीर सावरकर प्रथम राष्ट्रभक्त थे जिन्हें अंग्रेजी सत्ता ने 30 वर्षों तक जेलों में रखा तथा आजादी के बाद 1948 में नेहरु सरकार ने गाँधी हत्या की आड़ में लाल किले में बंद रखा पर न्यायालय द्वारा आरोप झूठे पाए जाने के बाद ससम्मान रिहा कर दिया... देशी-विदेशी दोनों सरकारों को उनके राष्ट्रवादी विचारोंसे डर लगता था...

20. वीर सावरकर पहले क्रांतिकारी थे जब उनका 26 फरवरी 1966 को उनका स्वर्गारोहण हुआ तब भारतीय संसद में कुछ सांसदों ने शोक प्रस्ताव रखा तो यह कहकर रोक दिया गया कि वे संसद सदस्य नही थे जबकि चर्चिल की मौत पर शोक मनाया गया था...

21.वीर सावरकर पहले क्रांतिकारी राष्ट्रभक्त स्वातंत्र्य वीर थे जिनके मरणोपरांत 26 फरवरी 2003 को उसी संसद में मूर्ति लगी जिसमे कभी उनके निधनपर शोक प्रस्ताव भी रोका गया था....

22. वीर सावरकर ऐसे पहले राष्ट्रवादी विचारक थे जिनके चित्र को संसद भवन में लगाने से रोकने के लिए कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गाँधी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखा लेकिन राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम ने सुझाव पत्र नकार दिया और वीर सावरकर के चित्र अनावरण राष्ट्रपति ने अपने कर-कमलों से किया...

23. वीर सावरकर पहले ऐसे राष्ट्रभक्त हुए जिनके शिलालेख को अंडमान द्वीप की सेल्युलर जेल के कीर्ति स्तम्भ से UPA सरकार के मंत्री मणिशंकर अय्यर ने हटवा दिया था और उसकी जगह गांधी का शिलालेख लगवा दिया...वीर सावरकर ने दस साल आजादी के लिए काला पानी में कोल्हू चलाया था जबकि गाँधी ने कालापानी की उस जेल में कभी दस मिनट चरखा नही चलाया....

24. महान स्वतंत्रता सेनानी, क्रांतिकारी-देशभक्त, उच्च कोटि के साहित्य के रचनाकार, हिंदी-हिन्दू-हिन्दुस्थान के मंत्रदाता, हिंदुत्व के सूत्रधार वीर विनायक दामोदर सावरकर पहले ऐसे भव्य-दिव्य पुरुष, भारत माता के सच्चे सपूत थे, जिनसे अन्ग्रेजी सत्ता भयभीत थी, आजादी के बाद नेहरु की कांग्रेस सरकार भयभीत थी...

25. वीर सावरकर माँ भारती के पहले सपूत थे जिन्हें जीते जी और मरने के बाद भी आगे बढ़ने से रोका गया... पर आश्चर्य की बात यह है कि इन सभी विरोधियों के घोर अँधेरे को चीरकर आज वीर सावरकर के राष्ट्रवादी विचारों का सूर्य उदय हो रहा है..

वीर सावरकर के जैसे कर्म नहीं कर सकते तो कम से कम उनका सम्मान तो कर ही सकते हो।

।।वन्देमातरम।।
 साभार - डॉ विवेक आर्य


**नेत्र रोग नाशक नुस्खे*

*नेत्र रोग के कारण :खुले स्थान में अधिक देर तक स्नान करना, सूक्ष्म और दूर की वस्तु को बहुत देर तक देखना, रात में जागना और दिन में सोना, आँखों में धूल, धुआँ और मिट्टी पड़ जाना, धूप में गरम हुए पानी से मुँह धोना, पौष्टिक खाद्य का अभाव, चाय और वनस्पति-घी का उपयोग अधिक करना आदि कारणों से नेत्रों के रोग उत्पन्न होते हैं।*

*नेत्र-रोगों से बचने के सामान्य उपाय :*

💐💐💐 *जो मनुष्य नियमित जीवंत सुबह उठते ही बासी थूक(लार) नयन में काजल की तरह लगाते हैं उन्हें जीवंत नयन रोग नहीं होता है व नयन रोग से ग्रसित है तो पूर्णतः ठीक हो जाता है* 💐💐💐

*(1) धूल या मिट्टी आँख में पड़ जाए तो आँखों को मसलना नहीं चाहिए। धीरे-धीरे आँखें खोलने और बन्द करने से या ठण्डे पानी के छींटे देने से धूल के कण आसानी से निकल जाते हैं।*

*(2) पढ़ते-लिखते समय प्रकाश हमेशा उचित मात्रा में, पीछे या बायीं तरफ से आना चाहिए, सामने से प्रकाश आने से आँखें बहुत जल्दी थक जाती हैं।*

*(3) कापी या किताब 12 से 15 इञ्च की दूरी पर रखना चाहिएं।*

*(4) सुबह उठते ही प्रतिदिन ठण्डे पानी से आँखें धोनी चाहिएं।*

*(5) सरसों के तेल से बना काजल या गुलाबजल आँखों में प्रतिदिन डालना चाहिए।*

*(6) अधिक देर तक पढ़ते-लिखते समय आँखों की थकान दूर करने के लिए-बीच-बीच में अपनी हथेलियों को हल्के से आँखों पर रखें, जिससे बाहरी-प्रकाश आँखों पर न पड़े।*

*(7) हरे शाक-सब्जी, दूध आदि के प्रयोग से आँखों की शक्ति बढ़ती है।*
*(8) आँखों को बार-बार ऊपर-नीचे, दाँए-बाँए, तिरछा और गोल-गोल घुमाकर आँखों का व्यायाम करें। फिर थोड़ी देर के लिए आँखें बन्द कर लें ।*

*(9) प्रतिदिन घी का अधिक से अधिक उपयोग करने से आँखों की शक्ति बढ़ती है।*

*(10) अन्य व्यक्ति का रूमाल, तौलिया या अँगोछे का उपयोग नहीं करना चाहिए।*

*नेत्र-रोगों से रक्षा के उपाय :*

*(1) तिल के ताजे 5 फूल प्रातःकाल (अप्रेल में ही) निगलें, तो पूरे वर्ष आँखें नहीं दुखेंगी।*

*(2) चैत्र के महीने में प्रतिवर्ष ‘गोरखमुण्डी’ के 5 या 7 ताजे फूल चबाकर पानी के साथ खाने से आँखों की ज्योति बढ़ती है ।*

*(3) एक सप्ताह के बच्चे को बेलगिरी के बीच की मिंगी शहद में मिलाकर चटाने से जीवनभर आँखें नहीं दुखतीं ।*

*(4) नींबू का एक बूंद रस महीने में एक बार आँखों में डालने से कभी आँखें नहीं दुखतीं।*

*नेत्र रोग नाशक घरेलु इलाज :*

*(1) पुनर्नवा के अर्क की 2-3 बूंदें आँखों में टपकाने से आँखों के सभी रोग दूर होते हैं।*

*(2) तिल के फूलों पर, जो ओस इकट्ठी होती है, उसे इंजेक्शन के द्वारा एकत्रित करके साफ शीशी में रख लें, इसे आँखों में डालने से नेत्रों के सभी विकार दूर होते हैं।*

*(3) नीम के हरे पत्तों को साफ करके एक सम्पुट में रख दें, ऊपर से एक कपड़ा ढंककर मिट्टी लगा दें तथा आग पर रख दें। जब पत्तियाँ बिल्कुल राख हो जायें, तब उन्हें निकालकर, नीबू के रस में मिलाकर आँखों में लगाने से खुजली, जलन आदि दूर होती है।*

*(4) एक भाग पीपल और दो भाग बड़ी हरड़ को पानी में घिसकर बत्ती बनाकर, आँखों में लगाने से सभी रोग दूर होते हैं।*

*(5) गोरखमुण्डी की जड़ को छाया में सुखाकर पीस लें, उसी मात्रा में शक्कर मिलाकर 7 माशा गाय के दूध के साथ पीने से आँखों के अनेक विकार दूर होते हैं।*

*(6) त्रिफला को 4 घण्टे पानी में भिगो दें और छानकर वही पानी आँखों में डालने से  व त्रिफला की टिकिया बाँधने से त्रिदोष से उतपन्न आँखों के सभी रोग दूर होते हैं।*

*(7) सोंठ और नीम के पत्तों को पीसकर गरम कर लें और सेंधा नमक मिलाकर टिकिया बना लें फिर आँखों के ऊपर रखकर पट्टी बाँधने से कई रोगों में आराम मिलता है।*

*(8) हरड़, सेंधा नमक, गेरू और रसौत को पानी में पीसकर पलकों पर लगाने से सभी रोग दूर होते हैं।*

*(9) सात माशे फिटकरी को ग्वारपाठे के रस में घोंटकर, काँसे की थाली में बीच में रख दें, ऊपर से काँसे की कटोरी ढक दें। थाली के नीचे हल्की आँच जलाएं, फिटकरी के फूल उचटकर ऊपर ढकी हुई कटोरी में चिपक जायेंगे, इन फूलों में शुद्ध शोरा मिलाकर- आँखों में लगाने से फूला, जाला आदि रोग दूर होते हैं।*

*(10) ढाक की जड़ का स्वरस या भाप के द्वारा निकाला गया अर्क आँखों में डालने से- रतौंधी और आँखों से पानी बहना आदि रोग दूर हो जाते हैं।*

*(11) देवदारु के चूर्ण को बकरी के मूत्र की भावना देकर, घी के साथ लेने से आँखों के सभी रोग दूर होते हैं।*

*(12) देशी गाय के ताजा गौमूत्र को 16 तह सूती कपड़े से छानकर सुबह शाम एक एक बूंद आँखों मे डालने से नयन के सभी रोग नस्ट होते हैं*

*विशेष चिकित्सीय सलाह हेतु आप व्यक्तिगत रात्रि 9 बजे के बाद सम्पर्क कर सकते हैं*
*Homoeo Trang: 🌹🌹डॉ. वेद प्रकाश,नवादा( बिहार)🌹8051556455🌹*

*निरोगी रहने हेतु महामन्त्र*

*मन्त्र 1 :-*

*• भोजन व पानी के सेवन प्राकृतिक नियमानुसार करें*

*• ‎रिफाइन्ड नमक,रिफाइन्ड तेल,रिफाइन्ड शक्कर (चीनी) व रिफाइन्ड आटा ( मैदा ) का सेवन न करें*

*• ‎विकारों को पनपने न दें (काम,क्रोध, लोभ,मोह,इर्ष्या,)*

*• ‎वेगो को न रोकें ( मल,मुत्र,प्यास,जंभाई, हंसी,अश्रु,वीर्य,अपानवायु, भूख,छींक,डकार,वमन,नींद,)*

*• ‎एल्मुनियम बर्तन का उपयोग न करें ( मिट्टी के सर्वोत्तम)*

*• ‎मोटे अनाज व छिलके वाली दालों का अत्यद्धिक सेवन करें*

*• ‎भगवान में श्रद्धा व विश्वास रखें*

*मन्त्र 2 :-*

*• पथ्य भोजन ही करें ( जंक फूड न खाएं)*

*• ‎भोजन को पचने दें ( भोजन करते समय पानी न पीयें एक या दो घुट भोजन के बाद जरूर पिये व डेढ़ घण्टे बाद पानी जरूर पिये)*

*• ‎सुबह उठेते ही 2 से 3 गिलास गुनगुने पानी का सेवन कर शौच क्रिया को जाये*

*• ‎ठंडा पानी बर्फ के पानी का सेवन न करें*

*• ‎पानी हमेशा बैठ कर घुट घुट कर पिये*

*• ‎बार बार भोजन न करें आर्थत एक भोजन पूर्णतः पचने के बाद ही दूसरा भोजन करें*

*भाई राजीव दीक्षित जी के सपने स्वस्थ भारत समृद्ध भारत और स्वदेशी भारत स्वावलंबी भारत स्वाभिमानी भारत के निर्माण में एक पहल आप सब भी अपने जीवन मे भाई राजीव दीक्षित जी को अवश्य सुनें*

*स्वदेशीमय भारत ही हमारा अंतिम लक्ष्य है :- भाई राजीव दीक्षित जी*

*मैं भारत को भारतीयता के मान्यता के आधार पर फिर से खड़ा करना चाहता हूँ उस काम मे लगा हुआ हूँ*

*आपका अनुज गोविन्द शरण प्रसाद वन्देमातरम जय हिंद*


*भोजन हमेशा अपनी प्रकृति*(हमारे शरीर के लिए गर्म स्वभाव या ठंडे स्वभाव की चीज़े कोन सी ठीक है)

*ओर मौसम* ( गर्मी या सर्दी या वर्षा ऋतु) के अनुसार करना चाहिए

शरीर मे रोग नही होंगे

इस समय भादो का महीना चल रहा है

भादो मास में खान पान का विशेष् ध्यान रखे।
 इस मौसम में जठराग्नि (पाचन शक्ति) कमजोर व् मंद हो जाती है।
        इसलिए वात् पित्त व् कफ रोग बढ़ जाते है।वर्षा ऋतू में जलवायु में विषाक्त कीटाणु पैदा हो जाते है।

जो बीमारियां फैलाते है।

क्या न खाए ---
1. हरी पते वाली सब्ज़िया न खाएं।
2. रसदार फल न खाएं।
3. बैंगन न खाएं इनमे कीड़े हो जाते है   और गैस भी बनाते है।
4. चकुंदर,खीरा, ककड़ी न खाए।
5. फ़ास्ट फूड न खाएं।
6. ज्यादा मिठाई न खाएं।
7. मास मदिरा न ले।
8.ठंडी व् बासी चीज न खाय।
9. आइस क्रीम व् कोल्ड ड्रिंक्स न पियें।


क्या खाएं ----
आयुर्वेद के अनुसार इस महीने में जल्दी पचने वाले ताज़ा व् गर्म खाना चाहिए।
1. सेब,   अनार,   नासपाती आदि    मौसमी फल खाये।
2. टमाटर का सुप ले सकते है।
3. अदरक,प्याज, लहसन खाएं।
4. बेसन की चीजें व् हलवा खाये।
5. पानी उबाल कर पिए।
6. हल्दी वाला  दूध पिए।
7. देसी चाय पिए।
8. पुराना चावल, गेहूं,  मक्का,
                       मुंग, अरहर की दाल खाएं।
9.  हरड खाएं पेट साफ़ रहेगा व्
                    पेट की बीमारियो से बचाव रहेगा।

स्वास्थ्य से सम्बंधित अधिक जानकारी के लिए पढ़े

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*संस्कृत*: कुछ रोचक तथ्य....

*संस्कृत के बारे में ये 20 तथ्य जान कर आपको भारतीय होने पर गर्व होगा।*

आज हम आपको संस्कृत के बारे में कुछ
ऐसे तथ्य बता रहे हैं,जो किसी भी भारतीय
का सर गर्व से ऊंचा कर देंगे;;

.1. संस्कृत को सभी भाषाओं की जननी
माना जाता है।

2. संस्कृत उत्तराखंड की आधिकारिक
भाषा है।

3. अरब लोगो की दखलंदाजी से पहले
संस्कृत भारत की राष्ट्रीय भाषा थी।

4. NASA के मुताबिक, संस्कृत धरती
पर बोली जाने वाली सबसे स्पष्ट भाषा है।

5. संस्कृत में दुनिया की किसी भी भाषा से
ज्यादा शब्द है।
वर्तमान में संस्कृत के शब्दकोष में 102
अरब 78 करोड़ 50 लाख शब्द है।

6. संस्कृत किसी भी विषय के लिए एक
अद्भुत खजाना है।
जैसे हाथी के लिए ही संस्कृत में 100 से
ज्यादा शब्द है।

7. NASA के पास संस्कृत में ताड़पत्रो
पर लिखी 60,000 पांडुलिपियां है जिन
पर नासा रिसर्च कर रहा है।

8. फ़ोबर्स मैगज़ीन ने जुलाई,1987 में
संस्कृत को Computer Software
के लिए सबसे बेहतर भाषा माना था।

9. किसी और भाषा के मुकाबले संस्कृत
में सबसे कम शब्दो में वाक्य पूरा हो
जाता है।

10. संस्कृत दुनिया की अकेली ऐसी
भाषा है जिसे बोलने में जीभ की सभी
मांसपेशियो का इस्तेमाल होता है।

11. अमेरिकन हिंदु युनिवर्सिटी के अनुसार
संस्कृत में बात करने वाला मनुष्य बीपी,
मधुमेह,कोलेस्ट्रॉल आदि रोग से मुक्त हो
जाएगा।
संस्कृत में बात करने से मानव शरीरका
तंत्रिका तंत्र सदा सक्रिय रहता है जिससे
कि व्यक्ति का शरीर सकारात्मक आवेश
(PositiveCharges) के साथ सक्रिय
हो जाता है।

12. संस्कृत स्पीच थेरेपी में भी मददगार
है यह एकाग्रता को बढ़ाती है।

13. कर्नाटक के मुत्तुर गांव के लोग केवल
संस्कृत में ही बात करते है।

14. सुधर्मा संस्कृत का पहला अखबार था,
जो 1970 में शुरू हुआ था।

आज भी इसका ऑनलाइन संस्करण
उपलब्ध है।

15. जर्मनी में बड़ी संख्या में संस्कृतभाषियो
की मांग है।
जर्मनी की 14 यूनिवर्सिटीज़ में संस्कृत पढ़ाई
जाती है।

16. नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार जब
वो अंतरिक्ष ट्रैवलर्स को मैसेज भेजते थे
तोउनके वाक्य उलट हो जाते थे।
इस वजह से मैसेज का अर्थ ही बदल
जाता था।
उन्होंले कई भाषाओं का प्रयोग किया
लेकिन हर बार यही समस्या आई।

आखिर में उन्होंने संस्कृत में मैसेज
भेजा क्योंकि संस्कृत के वाक्य उल्टे
हो जाने पर भी अपना अर्थ नही
बदलते हैं।
जैसे
अहम् विद्यालयं गच्छामि।
विद्यालयं  गच्छामि अहम्।
गच्छामिअहम् विद्यालयं ।
उक्त तीनो के अर्थ में कोई अंतर नहीं है।

17. आपको जानकर हैरानी होगी कि
Computer द्वारा गणित के सवालो को
हल करने वाली विधि यानि Algorithms
संस्कृत में बने है ना कि अंग्रेजी में।

18. नासा के वैज्ञानिको द्वारा बनाए
जा रहे 6th और 7th जेनरेशन Super
Computers संस्कृतभाषा पर आधारित
होंगे जो 2034 तक बनकर तैयार हो जाएंगे।

19. संस्कृत सीखने से दिमाग तेज हो जाता
है और याद करने की शक्ति बढ़ जाती है।
इसलिए London और Ireland के कई
स्कूलो में संस्कृत को Compulsory
Subject बना दिया है।

20. इस समय दुनिया के 17 से ज्यादा
देशो की कम से कम एक University
में तकनीकी शिक्षा के कोर्सेस में संस्कृत
पढ़ाई जाती है।

संस्कृत के बारे में ये 20 तथ्य जान कर
आपको भारतीय होने पर गर्व होगा।
      🔔जयतु संस्कृतं🔔

     🔔वदतु संस्कृतम्🔔

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तिल तेल अमृत

🔹तिल के तेल में इतनी ताकत होती है कि यह पत्थर को भी चीर देता है. प्रयोग करके देखें....
🔹आप पर्वत का पत्थर लिजिए और उसमे कटोरी के जैसा खडडा बना लिजिए, उसमे पानी, दुध, धी या तेजाब संसार में कोई सा भी कैमिकल, ऐसिड डाल दीजिए, पत्थर में वैसा की वैसा ही रहेगा, कही नहीं जायेगा...
🔹लेकिन... अगर आप ने उस कटोरी नुमा पत्थर में तिल का तेल डाल दीजिए, उस खड्डे में भर दिजिये.. 2 दिन बाद आप देखेंगे कि, तिल का तेल... पत्थर के अन्दर भी प्रवेश करके, पत्थर के नीचे आ जायेगा. यह होती है तेल की ताकत, इस तेल की मालिश करने से हड्डियों को पार करता हुआ, हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है.

🔹 तिल के तेल के अन्दर फास्फोरस होता है जो कि हड्डियों की मजबूती का अहम भूमिका अदा करता है.

🔹और तिल का तेल ऐसी वस्तु है जो अगर कोई भी भारतीय चाहे तो थोड़ी सी मेहनत के बाद आसानी से प्राप्त कर सकता है. तब उसे किसी भी कंपनी का तेल खरीदने की आवश्यकता ही नही होगी.

🔹तिल खरीद लीजिए और किसी भी तेल निकालने वाले से उनका तेल निकलवा लीजिए. लेकिन सावधान तिल का तेल सिर्फ कच्ची घाणी (लकडी की बनी हुई) का ही प्रयोग करना चाहिए.
🔷तैल शब्द की व्युत्पत्ति तिल शब्द से ही हुई है। जो तिल से निकलता वह है तैल। अर्थात तेल का असली अर्थ ही है "तिल का तेल".
🔹तिल के तेल का सबसे बड़ा गुण यह है की यह शरीर के लिए आयुषधि का काम करता है.. चाहे आपको कोई भी रोग हो यह उससे लड़ने की क्षमता शरीर में विकसित करना आरंभ कर देता है. यह गुण इस पृथ्वी के अन्य किसी खाद्य पदार्थ में नहीं पाया जाता.
🔹सौ ग्राम सफेद तिल 1000 मिलीग्राम कैल्शियम प्राप्त होता हैं। बादाम की अपेक्षा तिल में छः गुना से भी अधिक कैल्शियम है।
काले और लाल तिल में लौह तत्वों की भरपूर मात्रा होती है जो रक्तअल्पता के इलाज़ में कारगर साबित होती है।
🔷तिल में उपस्थित लेसिथिन नामक रसायन कोलेस्ट्रोल के बहाव को रक्त नलिकाओं में बनाए रखने में मददगार होता है।
तिल के तेल में प्राकृतिक रूप में उपस्थित सिस्मोल एक ऐसा एंटी-ऑक्सीडेंट है जो इसे ऊँचे तापमान पर भी बहुत जल्दी खराब नहीं होने देता। आयुर्वेद चरक संहित में इसे पकाने के लिए सबसे अच्छा तेल माना गया है।

🔷तिल में विटामिन  सी छोड़कर वे सभी आवश्यक पौष्टिक पदार्थ होते हैं जो अच्छे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक होते हैं। तिल विटामिन बी और आवश्यक फैटी एसिड्स से भरपूर है।
इसमें मीथोनाइन और ट्रायप्टोफन नामक दो बहुत महत्त्वपूर्ण एमिनो एसिड्स होते हैं जो चना, मूँगफली, राजमा, चौला और सोयाबीन जैसे अधिकांश शाकाहारी खाद्य पदार्थों में नहीं होते।

🔹ट्रायोप्टोफन को शांति प्रदान करने वाला तत्व भी कहा जाता है जो गहरी नींद लाने में सक्षम है। यही त्वचा और बालों को भी स्वस्थ रखता है। मीथोनाइन लीवर को दुरुस्त रखता है और कॉलेस्ट्रोल को भी नियंत्रित रखता है।

🔷तिलबीज स्वास्थ्यवर्द्धक वसा का बड़ा स्त्रोत है जो चयापचय को बढ़ाता है।
यह कब्ज भी नहीं होने देता।
तिलबीजों में उपस्थित पौष्टिक तत्व,जैसे-कैल्शियम और आयरन त्वचा को कांतिमय बनाए रखते हैं।

🔷तिल में न्यूनतम सैचुरेटेड फैट होते हैं इसलिए इससे बने खाद्य पदार्थ उच्च रक्तचाप को कम करने में मदद कर सकता है।
सीधा अर्थ यह है की यदि आप नियमित रूप से स्वयं द्वारा निकलवाए हुए शुद्ध तिल के तेल का सेवन करते हैं तो आप के बीमार होने की संभावना ही ना के बराबर रह जाएगी.

🔹 जब शरीर बीमार ही नही होगा तो उपचार की भी आवश्यकता नही होगी. यही तो आयुर्वेद है.. आयुर्वेद का मूल सीधांत यही है की उचित आहार विहार से ही शरीर को स्वस्थ रखिए ताकि शरीर को आयुषधि की आवश्यकता ही ना पड़े.

🔹एक बात का ध्यान अवश्य रखिएगा की बाजार में कुछ लोग तिल के तेल के नाम पर अन्य कोई तेल बेच रहे हैं.. जिसकी पहचान करना मुश्किल होगा. ऐसे में अपने सामने निकाले हुए तेल का ही भरोसा करें. यह काम थोड़ा सा मुश्किल ज़रूर है किंतु पहली बार की मेहनत के प्रयास स्वरूप यह शुद्ध तेल आपकी पहुँच में हो जाएगा. जब चाहें जाएँ और तेल निकलवा कर ले आएँ.

🔷तिल में मोनो-सैचुरेटेड फैटी एसिड (mono-unsaturated fatty acid) होता है जो शरीर से बैड कोलेस्ट्रोल को कम करके गुड कोलेस्ट्रोल यानि एच.डी.एल. (HDL) को बढ़ाने में मदद करता है। यह हृदय रोग, दिल का दौरा और धमनीकलाकाठिन्य (atherosclerosis) के संभावना को कम करता है।
कैंसर से सुरक्षा प्रदान करता है-
तिल में सेसमीन (sesamin) नाम का एन्टीऑक्सिडेंट (antioxidant) होता है जो कैंसर के कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने के साथ-साथ है और उसके जीवित रहने वाले रसायन के उत्पादन को भी रोकने में मदद करता है।

🔹 यह फेफड़ों का कैंसर, पेट के कैंसर, ल्यूकेमिया, प्रोस्टेट कैंसर, स्तन कैंसर और अग्नाशय के कैंसर के प्रभाव को कम करने में बहुत मदद करता है।
तनाव को कम करता है-

🔹इसमें नियासिन (niacin) नाम का विटामिन होता है जो तनाव और अवसाद को कम करने में मदद करता है।
हृदय के मांसपेशियों को स्वस्थ रखने में मदद करता है-

🔹तिल में ज़रूरी मिनरल जैसे कैल्सियम, आयरन, मैग्नेशियम, जिन्क, और सेलेनियम होता है जो हृदय के मांसपेशियों को सुचारू रूप से काम करने में मदद करता है और हृदय को नियमित अंतराल में धड़कने में मदद करता है।

🔹शिशु के हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है-
तिल में डायटरी प्रोटीन और एमिनो एसिड होता है जो बच्चों के हड्डियों के विकसित होने में और मजबूती प्रदान करने में मदद करता है।

🔹उदाहरणस्वरूप 100ग्राम तिल में लगभग 18 ग्राम प्रोटीन होता है, जो बच्चों के विकास के लिए बहुत ज़रूरी होता है।
गर्भवती महिला और भ्रूण (foetus) को स्वस्थ रखने में मदद करता है-

🔹तिल में फोलिक एसिड होता है जो गर्भवती महिला और भ्रूण के विकास और स्वस्थ रखने में मदद करता है।

 🔹शिशुओं के लिए तेल मालिश के रूप में काम करता है-

🔹अध्ययन के अनुसार तिल के तेल से शिशुओं को मालिश करने पर उनकी मांसपेशियाँ सख्त होती है साथ ही उनका अच्छा विकास होता है।

🔹 आयुर्वेद के अनुसार इस तेल से मालिश करने पर शिशु आराम से सोते हैं।
अस्थि-सुषिरता (osteoporosis) से लड़ने में मदद करता है-

🔹तिल में जिन्क और कैल्सियम होता है जो अस्थि-सुषिरता से संभावना को कम करने में मदद करता है।

🔹मधुमेह के दवाईयों को प्रभावकारी बनाता है-

🔹डिपार्टमेंट ऑफ बायोथेक्सनॉलॉजी विनायक मिशन यूनवर्सिटी, तमिलनाडु (Department of Biothechnology at the Vinayaka Missions University, Tamil Nadu) के अध्ययन के अनुसार यह उच्च रक्तचाप को कम करने के साथ-साथ इसका एन्टी ग्लिसेमिक प्रभाव रक्त में ग्लूकोज़ के स्तर को 36% कम करने में मदद करता है जब यह मधुमेह विरोधी दवा ग्लिबेक्लेमाइड (glibenclamide) से मिलकर काम करता है। इसलिए टाइप-2 मधुमेह (type 2 diabetic) रोगी के लिए यह मददगार साबित होता है।

🔹दूध के तुलना में तिल में तीन गुना कैल्शियम रहता है। इसमें कैल्शियम, विटामिन बी और ई, आयरन और ज़िंक, प्रोटीन की भरपूर मात्रा रहती है और कोलेस्टरोल बिल्कुल नहीं रहता है।

🔹तिल का तेल ऐसा तेल है, जो सालों तक खराब नहीं होता है, यहाँ तक कि गर्मी के दिनों में भी वैसा की वैसा ही रहता है.
तिल का तेल कोई साधारण तेल नहीं है। इसकी मालिश से शरीर काफी आराम मिलता है। यहां तक कि लकवा जैसे रोगों तक को ठीक करने की क्षमता रखता है।

🔹इसे सर्दी के मौसम में इस तेल से शरीर की मालिश करें, तो  ठंड का एहसास नहीं होता।

🔹 इससे चेहरे की मालिश भी कर सकते हैं। चेहरे की सुंदरता एवं कोमलता बनाये रखेगा। यह सूखी त्वचा के लिए उपयोगी है।

🔹तिल का तेल- तिल विटामिन ए व ई से भरपूर होता है। इस कारण इसका तेल भी इतना ही महत्व रखता है। इसे हल्का गरम कर त्वचा पर मालिश करने से निखार आता है। अगर बालों में लगाते हैं, तो बालों में निखार आता है, लंबे होते हैं।

🔹जोड़ों का दर्द हो, तो तिल के तेल में थोड़ी सी सोंठ पावडर, एक चुटकी हींग पावडर डाल कर गर्म कर मालिश करें। तिल का तेल खाने में भी उतना ही पौष्टिक है विशेषकर पुरुषों के लिए।इससे मर्दानगी की ताकत मिलती है!

🔹हमारे धर्म में भी तिल के बिना कोई कार्य सिद्ध नहीं होता है, जन्म, मरण, परण, यज्ञ, जप, तप, पित्र, पूजन आदि में तिल और तिल का तेल के बिना संभव नहीं है अतः इस पृथ्वी के अमृत को अपनावे और जीवन निरोग बनावे ।


हींग खाने के 73 सेहतमंद फायदे |



★ हींग का उपयोग आमतौर पर दाल-सब्जी में डालने के लिए किया जाता है इसलिए इसे `बघारनी´ के नाम से भी जाना जाता है।
★ हींग फेरूला फोइटिस नामक पौधे का चिकना रस है। इसका पौधा 60 से 90 सेमी तक ऊंचा होता है। ये पौधे-ईरान, अफगानिस्तान, तुर्किस्तान, ब्लूचिस्तान, काबुल और खुरासन के पहाड़ी इलाकों में अधिक होते हैं।
★ हींग के पत्तों और छाल में हलकी चोट देने से दूध निकलता है और वहीं दूध पेड़ पर सूखकर गोंद बनता हैं उसे निकालकर पत्तों या खाल में भरकर सुखा लिया जाता है। सूखने के बाद वह हींग के नाम से जाना जाता है।
★ वैद्य लोग जो हींग उपयोग में लाते हैं। वह हीरा हींग होती है और यही सबसे अच्छी होती है।
★ हमारे देश में इसकी बड़ी खपत है। हींग बहुत से रोगों को खत्म करती है।
★ वैद्यों का कहना है कि हींग को उपयोग लाने से पहले उसे सेंक लेना चाहिए।
★ चार प्रकार के हींग बाजारों में पाये जाते हैं जैसे कन्धारी हींग, यूरोपीय वाणिज्य का हींग, भारतवर्षीय हींग, वापिंड़ हींग।

स्वभाव :hing ki taseer
हींग गर्म और खुश्क होती है।

हानिकारक : hing khane ke nuksan
यह गर्म दिमाग और गर्म मिजाज वालों को हानि पहुंचा सकती है।

मात्रा : सवा दो ग्राम।

हींग के औषधीय गुण : hing ke aushadhi gun

★ हींग पुट्ठे और दिमाग की बीमारियों को खत्म करती है जैसे मिर्गी, फालिज, लकवा आदि।
★ हींग आंखों की बीमारियों में फायदा पहुंचाती है। खाने को हजम करती है, भूख को भी बढ़ा देती है। गरमी पैदा करती है और आवाज को साफ करती हैं।
★ हींग का लेप घी या तेल के साथ चोट और बाई पर करने से लाभ मिलता है तथा हींग को कान में डालने से कान में आवाज़ का गूंजना और बहरापन दूर होता है।
★ हींग जहर को भी खत्म करती है।
★ हवा से लगने वाली बीमारियों को भी हींग मिटाती है।
★ हींग हलकी, गर्म और और पाचक है।
★ यह कफ तथा वात को खत्म करती है।
★ हींग हलकी तेज और रुचि बढ़ाने वाली है।
★ हींग श्वास की बीमारी और खांसी का नाश करती है। इसलिए हींग एक गुणकारी औषधि है।

हींग से घरेलु उपचार:Hing se Upchar in Hindi

1. दस्त:
• हींग को भूनकर और चावलों के काढ़े को बनाकर सेवन करने से उल्टी, पेट में जलन, बुखार और दस्त में लाभ मिलता है।
• भुनी हींग, सफेद जीरा, काला जीरा, छोटी इलायची और दालचीनी को बराबर मात्रा में चूर्ण बनाकर रख लें, फिर इसी चूर्ण को 4-4 की मात्रा में लेकर सेंधानमक मिलाकर एक दिन में 3 से 4 बार फंकी के रूप में सेवन करने से अतिसार में आराम मिलता है।
2. गर्भपात होने से रोकना : बार-बार होने वाले गर्भपात को रोकने के लिए हींग बहुत ही उपयोगी होता है। गर्भ के ठहरने के लक्षण प्रतीत होते ही 6 ग्राम हींग की 60 गोलियां बना लेनी चाहिए तथा सुबह-शाम एक-एक गोली का सेवन करना चाहिए। धीरे-धीरे इसकी मात्रा 10 गोली तक प्रतिदिन देनी चाहिए। बाद में प्रसव के समय तक इसकी मात्रा धीरे-धीरे कम करते जाएं और पहले की तरह ही एक गोली सुबह और शाम को सेवन करें। इससे गर्भपात होने की आशंका बिल्कुल समाप्त हो जाती है।
3. कान के रोग:
• हींग, धतूरे का रस और मूली के बीज को सरसों के तेल में डालकर पका लें इस तेल को कान में डालने से कान का दर्द और बहरापन जैसा रोग ठीक हो जाता है।
• 25 मिलीलीटर मूली का रस, 10 ग्राम पिसी हुई रत्न जोत, 5 ग्राम पिसी हुई हींग को 50 मिलीलीटर सरसों के तेल में अच्छी तरह से पका लें। फिर इसे ठण्डा होने के बाद छान लें। इस तेल की 2-2 बूंदें गुनगुना करके कान में डालने से कान के सभी रोगों में लाभ होता है।
• हींग और सरसों के तेल को गर्म करके छान लें। जब तेल बस हल्का सा गर्म रह जाये तो उसे कान के अन्दर बूंद-बूंद करके डालने से कफज (बलगम) के कारण उत्पन्न कान का दर्द समाप्त हो जाता है।
• औरत के दूध के साथ असली हींग को पीसकर कान में डालने से बहरेपन का रोग ठीक हो जाता है।
4. बहरापन:
• असली हींग को किसी औरत के दूध में डालकर बूंद-बूंद करके बच्चे के कान में डालने से बहरेपन के रोग में लाभ होता है।
• हीरा हींग को गाय के दूध के साथ पीसकर कान में डालने से कान का रोग ठीक हो जाता है।
• कूट, हींग, सौंफ, दारूहल्दी, बच, सोंठ और सेंधानमक को बराबर मात्रा में लेकर बारीक पीस लें। फिर इन सबको बकरे के पेशाब में मिलाकर तेल में पकाने के लिए आग पर रख दें। जब पकते हुए बस तेल ही बाकी रह जाये तो इस तेल को आग पर से उतारकर छान लें। इस तेल में से 3-4 बूंद कान में डालने से बहरेपन का रोग मिट जाता है।
5. मासिक-धर्म का कष्ट के साथ आना (कष्टार्तव): भुनी हींग लगभग आधा ग्राम की मात्रा में लेकर पानी से माहवारी चालू होने के दिन से सुबह तीन दिनों तक लगातार देना चाहिए। इससे मासिक-धर्म की पीड़ा नष्ट हो जाती है।
6. मासिक-धर्म संबन्धी परेशानियां:
• मासिक-धर्म के समय यदि दर्द होता है तो 240 मिलीग्राम हींग को पानी में घोलकर कुछ दिनों तक नियमित रूप से सेवन करने से दर्द समाप्त हो जाता है।
• मासिकस्राव (माहवारी) कम आती हो तो हींग का सेवन करना चाहिए। इससे मासिकस्राव नियमित रूप से आना प्रारम्भ हो जाती है।
7. अग्निमान्द्यता (अपच):
• थोड़ी-सी हींग को लेकर पानी में घोलकर नाभि के पास मालिश करने से अपच, गैस और डकार में लाभ मिलता है।
• 720 मिलीग्राम भुनी हुई हींग और 6 ग्राम कालानमक खाना खाने के पहले निवाले के साथ खाने से लाभ होता है।
• हींग, सोंठ, कालीमिर्च, भुना हुआ स्याह जीरा, सफेद जीरा, अजमोद, सेंधानमक 10-10 ग्राम की मात्रा में लेकर अच्छी तरह से पीसकर कपड़े से छानकर चूर्ण बनाकर रख लें। इस चूर्ण की चौथाई चम्मच मात्रा को घी के साथ भोजन करने के पहले लेने से अग्निमान्द्यता की बीमारी में लाभ पहुंचता है।
8. अम्लपित्त: हींग को भूनकर उसमें थोड़ा-सा कालानमक मिलाकर पानी में उबालकर ठण्डा करके पीने से लाभ होता है।
9. बच्चे का जन्म आसानी से होना: भुनी हुई हींग को एक ग्राम की मात्रा में पीसकर गर्म पानी से सेंककर सेवन करने से बच्चे का जन्म आसानी से हो जाता है।
10. प्रसव पीड़ा:
• हींग चुटकी भर लेकर, 10 ग्राम गुड़ में मिलाकर खायें। इसके खाने के बाद आधा कप पानी या गाय का दूध पीने से प्रसव के समय होने वाली पीड़ा नष्ट हो जाती है।
• हींग और बाजरे को गुड़ में रखकर निगल जाएं। दो घूंट से ज्यादा पानी न पियें। ऐसा करने से बच्चे के जन्म के समय का दर्द नहीं होगा।
11. प्रसव के बाद का रक्तस्राव: घी में भुनी हुई हींग 240 मिलीग्राम से 960 मिलीग्राम सुबह-शाम लेने से आर्तव (मासिकस्राव) की शुद्धि होकर रक्तस्राव ठीक हो जाता है।
12. शीतपित्त: हींग को घी में मिलाकर मालिश करने से शीतपित्त में लाभ होता है।
13. जम्हाई: लोहे के बर्तन में घी के साथ हींग को भून लें। इस हींग के साथ हरीतकी, सोंठ, सेंधानक और कालीमिर्च सभी को एक समान मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। फिर 1 से 3 ग्राम चूर्ण प्रतिदिन गर्म पानी के साथ सेवन करने से जम्भाई रोग में लाभ होता है।
14. पेट के कीड़े:
• हींग को अजवायन और ग्वारपाठा के बीच के भाग (गूदे) के साथ खाने से आंतों के कीड़े समाप्त हो जाते हैं।
• हींग को पानी में मिलाकर रूई का फोया भिगोकर बच्चों की गुदा पर लगाने से बच्चों के पेट के कीड़े मर जाते हैं।
• थोड़ी-सी मात्रा में बच्चों को हींग खिलाने से भी लाभ होता है।
• हींग को थोड़े-से पानी में मिलाकर गुदा पर लगाने से पेट के कृमि नष्ट हो जाते हैं।
• थोड़ी-सी मात्रा में हींग को पानी में घोलकर दिन में 3 से 4 बार पीने से कीड़े मरने लगते हैं।
15. नाक के कीड़े: पिसी हुई हींग को गर्म पानी में मिलाकर नाक में डालने से नाक का जख्म दूर हो जाता है और कीड़े भी समाप्त हो जाते हैं।
16. नाक के रोग: हींग और कपूर को बराबर मात्रा में लेकर उसके अन्दर थोड़े से शहद को मिलाकर लगभग 240-240 मिलीग्राम की छोटी-छोटी गोलियां बना लें। इस 1 गोली को हर 4 से 6 घंटे के बाद अदरक के रस के साथ मिलाकर चाटने से जुकाम ठीक हो जाता है।
17. कील, कांटा चुभना: कांटा चुभने पर हींग को घोलकर उस स्थान पर लेप करने से शरीर के अंग के अन्दर घुसा हुआ कांटा बाहर निकल आता है।
18. कोड़ी का दर्द: 120 मिलीग्राम भुनी हुई हींग को बिना गुठली वाले मुनक्का में रखकर पानी से दिन में दो बार लेने से कोड़ी का दर्द दूर हो जाता है तथा हिचकी की बीमारी भी दूर होती है।
19. प्लीहा वृद्धि (तिल्ली):
• हींग, एलुवा, सुहागा, सज्जी सफेद, नौसादर इन सभी को बराबर मात्रा में लेकर घी-ग्वार के लुआब में बेर के बराबर गोलियां बना लें और एक-एक गोली प्रतिदिन तिल्ली के रोगी को दें। इससे तिल्ली का बढ़ना बंद हो जाता है।
• हींग, सोंठ, सेंधानमक और भुना हुआ सुहागा इन सभी को बराबर भाग में लेकर सहजन के रस में जंगली बेर के बराबर गोली बनाकर सुबह और शाम को एक-एक गोली देने से तिल्ली खत्म हो जाती है।
20. सभी प्रकार का दर्द: हींग, त्रिकुटा, धनिया, अजवायन, चीता और हरड़ को बारीक पीसकर चूर्ण बना लें, फिर इस बने चूर्ण में जवाखार और सेंधानमक मिलाकर साफ पानी के साथ पीने से वायु शूल, पेशाब में दर्द, मल त्याग में दर्द के साथ सभी प्रकार के दर्द समाप्त हो जाते हैं। यह पाचन शक्ति को ताकत देती है।
21. गुल्म (वायु का गोला) : हींग, पीपरा मूल (पीपल की जड़), धनिया, जीरा, बच, कालीमिर्च, चीता, पाढ़, चव्य, कचूर, सेंधानमक, बिरिया संचर नमक, विशांबिल, छोटी पीपल, सोंठ, जवाखार, सज्जीखार, हरड़, अनार दाना, अम्लवेत, पोहकरमूल, हाऊबेर और काला जीरा को बराबर मात्रा में पीसकर छान लें। फिर उस चूर्ण को बिजौरा नींबू के रस में कूटकर छाया में सुखा लें और बोतल में भरकर रख दें। इस चूर्ण को 3 से 4 ग्राम की मात्रा में गर्म पानी के साथ सेवन करने से अफारा (पेट में गैस), ग्रहणी, उदावर्त्त (मल के रुकने से होने वाली बीमारी), पथरी, अरुचि, उरुस्तम्भ (जांघों की सुन्नता), स्तन और पसलियों में वायु और कफ के दोश समाप्त हो जाते हैं।
22. पेट में दर्द:
• हींग को गर्म पानी में मिलाकर लेप बनाकर नाभि के आस-पास गाढ़ा लेप लगाने से पेट दर्द शान्त होता है।
• शुद्ध हींग को घी में मिलाकर चाटने से पेट की बीमारी में लाभ मिलता है।
• सेंकी हुई हींग और जीरा, सोंठ, सेंधानमक मिलाकर चौथाई चम्मच भर गर्म पानी से सेवन करना फायदेमंद होता है।
• हींग को देशी घी में पीसकर चाटने से पेट के दर्द में आराम मिलता है।
• हींग को पानी में डालकर पकायें फिर इसी पानी को ठण्डा करके पीयें। इससे पेट के दर्द में आराम मिलता है।
• हींग, अजवायन और काले नमक को पीसकर चूर्ण बनाकर गर्म पानी के साथ रोगी को देने से लाभ होता है।
• भुनी हुई हींग को 120 मिलीग्राम की मात्रा को गर्म पानी के साथ दिन में तीन बार पीने से लाभ होता है।
• हींग 2 से 3 ग्राम की मात्रा में घोलकर बस्ति (नाभि का निचला भाग) पर लगाने से अफारा (गैस) और पेट के दर्द में लाभ होता है।
• हींग और संचर नमक लगभग 20 मिलीग्राम को दशमूल के काढ़े में मिलाकर खाना खाने के बाद लें। इससे पेट का दर्द समाप्त हो जाता है।
• भुनी हुई हींग एक बाजरे के दाने खाने से पेट के दर्द में आराम मिलता है।
• 2 ग्राम हींग को 500 मिलीलीटर पानी में उबालें जब यह पानी चौथाई रह जायें तो इसे उतार लें और गर्म-गर्म सेवन करें।
• हींग से बनी ऐसाफिटिडा मदरटिंचर की 10 बूंदों को 1 चम्मच पानी में मिलाकर सेवन करने से लाभ होता है।
23. बाला रोग: 30 ग्राम मोठ के आटे में एक चने के बराबर हींग मिलाकर पानी में घोलकर गर्म कर लें। जब यह लेई जैसा हो जाये तो उसे उतारकर बाला पर पट्टी बांध दें। इस पट्टी से बाला का धागा सा कीड़ा निकल आयेगा। इसके साथ ही 5 ग्राम हींग को एक गिलास ठण्डे पानी में घोलकर लगातार चार दिन तक सुबह और शाम पीने से बाला रोग दोबारा कभी नहीं होगा।
24. दिल की धड़कन: हींग 1 ग्राम, कपूर 1 ग्राम, 2 हरी मिर्चे। तीनों को पीसकर चने के बराबर की गोलियां बना लें। इसकी 2-2 गोलियां दिन में तीन बार रोगी को ठण्डे पानी से दें।
25. हैजा:
• हींग, सोंठ, कालीमिर्च, पीपल, कपूर, सेंधानमक इन सब चीजों को 120 मिलीग्राम की मात्रा लेकर बारीक पीसकर इसकी छोटी-छोटी गोलियां बना लें। एक खुराक में दो गोलियां दिनभर में तीन-चार बार दें। इससे हैजे का रोग दूर हो जाता है।
• भुनी हुई हींग 3 ग्राम, जीरा काला, जीरा सफेद, लाल मिर्च, सौंठ और शुद्ध रसकर्पूर दो-दो ग्राम तथा शुद्ध अफीम 1 ग्राम लेकर कूट पीस लें और पानी के साथ खरल करके उड़द के समान अकार की गोली बनाकर सुखायें और शीशी में भर लें। एक-एक गोली ताजे पानी के साथ एक-एक घंटे के अन्तर से दें। आवश्यक होने पर 30-30 मिनट के अन्तर से भी दे सकते हैं।
• हींग, कपूर और आम की गुठली बराबर लेकर पुदीने के रस में पीसकर, चने के बराबर गोलियां बना लें ये गोलियां हैजा में फायदा पहुंचाती है।
• हींग, कालीमिर्च और आक के जड़ की छाल बराबर लेकर पुदीना के रस में पीसकर चने के बराबर गोलियां बना लें। यह गोलियां आधा-आधा घंटे के अन्दर से रोगी को खिलाने से हैजा रोग खत्म होता है।
26. गठिया रोग: घुटने का दर्द दूर करने के लिये असली हींग को घी में पीस लें। फिर इससे जोड़ों के दर्द पर मालिश करें। इससे गठिया का रोग दूर हो जाता है।
27. हृदय रोग:
• भुनी हींग, कालाजीरा, सफेद जीरा, अजवायन, और सेंधानमक पीसकर चूर्ण बना लें। इसको एक बार में ढाई-तीन ग्राम ताजे पानी के साथ लेने से दिल की कमजोरी, घबराहट तथा जलन में लाभ होता है।
• हींग, बच, सोंठ, जीरा, कूट, हरड़ चीता, जवाखार, संचर नमक तथा पोहकर मूल। इन सबको बराबर की मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। इसमें से आधा चम्मच चूर्ण शहद या देशी घी के साथ सेवन करें।
• हींग 120 मिलीग्राम को पीसकर बीज निकले मुनक्का में रखकर गोली बनाकर कम गर्म पानी से दें।
28. गुल्यवायु हिस्टीरिया:
• हिस्टीरिया में हींग सुंघाने से बेहाश रोगी होश में आ जाता है।
• लगभग 120 मिलीग्राम शुद्ध हींग को 480 मिलीग्राम गुड़ में मिला लें। फिर इसकी 120-120 मिलीग्राम की गोलियां बनाकर सुबह और शाम को जल के साथ खाने से हिस्टीरिया में लाभ मिलता है।
• लगभग 10 ग्राम हींग, 30 ग्राम वचा, 5 ग्राम केसर, 40 ग्राम जटामांसी और 50 ग्राम अजवाइन को लेकर कूट पीसकर चूर्ण बना लें। हल्के गर्म पानी में 3-3 ग्राम की मात्रा में इस चूर्ण को सुबह और शाम लेने से यह रोग नष्ट हो जाता है।
• रोजाना आधा ग्राम से एक ग्राम (रोग और आयु के अनुसार) तक हींग खिलाने से हिस्टीरिया रोग ठीक हो जाता है।
29. नहरुआ (स्यानु)
• हींग को थोड़ी-सी मात्रा में ठण्डे पानी के साथ पीसकर पीने से रोगी को लाभ पहुंचता है।
• जिसे नहरूआ बहुत अधिक मात्रा में निकलते हो उसे 300 मिलीग्राम से 720 मिलीग्राम की हींग की गोलियां बनाकर पानी के साथ खानी चाहिए। इससे नहरूआ के घाव में से धागे के समान कीडे़ नहीं निकलते हैं।
• थोड़ी सी हींग को भैंस के गोबर में मिलाकर नहरूआ के घाव पर रखने से लाभ मिलता है।
30. निम्नरक्तचाप:
• 250 मिलीलीटर मट्ठा में भुनी हुई हींग और जीरे का छौंक लगाकर सेवन करें। इससे निम्न रक्तचाप (लो ब्लड प्रेशर) के रोगी बहुत लाभ होता है।
• निम्न रक्तचाप (लो ब्लड प्रेशर) के रोगी को अपने भोजन में शुद्ध हींग का उपयोग अवश्य करना चाहिए। इससे रोग शीघ्र ही ठीक हो जाता है।
• हींग को, लोहे के बर्तन में घी डालकर आग पर लाल कर लें फिर इस हींग में से 120 से 240 मिलीग्राम मात्रा सुबह शाम नित्य सेवन करने से निम्न रक्तचाप (लो ब्लड प्रेशर) में लाभ होता है।
31. मिर्गी (अपस्मार):
• 10 ग्राम असली हींग कपड़े में बांधकर गले में डाले रहने से मिरगी के दौरे दूर हो जाते हैं।
• हींग, सेंधानमक व घी इनको 10-10 ग्राम लेकर 125 मिलीलीटर गोमूत्र में मिलाएं। उसके बाद उसे उबालें, उबालने पर जब केवल घी शेष बचे तो इसे पीने से अपस्मार (मिर्गी) में लाभ होता है।
• भुनी हींग, त्रिकुटा और काला नमक को बराबर मात्रा में लेकर
32. दाद: दाद को खुजालकर उस पर हींग का लेप करने से दाद ठीक हो जाता है।
33. सिर का दर्द:
• सर्दी से सिरदर्द हो तो हींग गर्म करके लेप बनायें और लेप माथे पर मलें। इससे सिर का दर्द दूर हो जाता है।
• हींग को पानी के साथ घोलकर सूंघने से सिर दर्द खत्म हो जाता है।
• थोड़ी-सी हींग को पानी में घोलकर माथे पर लगाने से सर्दी के कारण होने वाला सिर का दर्द कुछ ही मिनटों में खत्म हो जाता है।
• पानी में हींग को घोलकर उसकी कुछ बूंदें नाक में डालने से आधासीसी के कारण होने वाला दर्द दूर हो जाता है।
34. आग से जलना: असली हींग को पानी में मिलाकर जले हुए भाग पर 24 घंटों में 4 से 5 बार मुर्गी के पंख से लगाने से फफोलें नहीं पड़ते और जल्दी आराम आ जाता है।
35. जुकाम:
• 1-1 ग्राम हींग, सोंठ और मुलहठी को बारीक पीसकर गुड़ या शहद में मिलाकर चने के आकार की छोटी-छोटी गोलियां बनाकर रख लें। यह गोली 1-1 रोजाना सुबह और शाम चूसने से जुकाम दूर हो जाता है।
• हींग, बायविडंग, सेंधानमक, मैनसिल, बच और गूगल को अच्छी तरह से पीसकर उसका चूर्ण बनाकर छान लें। इस चूर्ण को सूंघने से जुकाम दूर हो जाता है।
• हींग के घोल को नाक से सूंघने से नाक के अन्दर जमा हुए रीट (बलगम, श्लेश्मा) बाहर निकल जाते हैं और बदबू भी दूर हो जाती है।
36. बच्चों के रोग:
• हींग को पानी में पीसकर और गर्म करके नाभि के आस-पास तथा उसके ऊपर लेप कर दें।
• भुनी हुई हींग, कबीला, बायविडंग को बराबर मात्रा में पीस लें पहले बच्चे को गुड़ खिला लें और उसके बाद यह मिश्रण खिलाने से पेट के सभी कीड़े मर जाते हैं।
• हींग, काकड़सिंगी, गेरू, मुलेठी, सोंठ और नागरमोथा का चूर्ण बनाकर शहद में मिलाकर चटाने से हिचकी और श्वास (दमा) में आराम आ जाता है।
• सेंधानमक, सोंठ, हींग और भारंगी का चूर्ण बनाकर उसमें घी मिलाकर खाने से बच्चों के पेट का अफारा (पेट में मरोड़ होना), और वादी (गैस) का दर्द मिट जाता है।
• कुलिंजन को घिसकर छाछ में मिलाकर और उसमें थोड़ी सी हींग डालकर कढ़ी बना लें और बच्चों को खिलायें। इससे बच्चों का अतिसार (दस्त) रोग समाप्त हो जाता है।
• 60 मिलीग्राम भुनी हुई हींग मां के दूध में मिलाकर दें। इससे बच्चों का पेट दर्द ठीक हो जायेगा।
• हींग को पानी में घोलकर गुदा में लगाने से बच्चे के चुन्या रोग (गुदा मार्ग में कीड़े) खत्म हो जाते हैं।
• यदि बच्चा रोए तथा चिल्लाये तो समझना चाहिए कि बच्चे के पेट में दर्द है ऐसी हालत में थोड़ी सी रूई लेकर उसकी गद्दी बनाकर गर्म करके पेट की सिंकाई करें तथा गुलरोगन गर्म करके पेट पर मालिश करें या 60 मिलीग्राम हींग मां के दूध में मिलाकर पिलायें। इससे बच्चे के पेट का दर्द ठीक हो जायेगा और बच्चा चुप हो जायेगा।
37. स्वर भंग (गला बैठना):
• 120 मिलीग्राम हींग को गर्म पानी के साथ खाने से बैठा हुआ गला खुलकर साफ हो जाता है।
• गर्म पानी में हींग को डालकर गरारे करने से बैठी हुई आवाज ठीक हो जाती है।
• जुकाम का पानी गले में गिरने या जलवायु परिवर्तन (हवा, पानी बदलना) से आवाज बैठ जाये तो आधा ग्राम हींग को गर्म पानी में घोलकर दो बार गरारे करें। इससे आवाज ठीक हो जाती है।
• थोड़ी सी हींग को गर्म पानी के साथ सेवन करने से बैठा हुआ गला ठीक हो जाता है।
38. आचार की सुरक्षा: आचार की सुरक्षा के लिए बर्तन में पहले हींग का धुंआ दें। उसके बाद उसमें अचार भरें। इस प्रयोग से आचार खराब नहीं होता है।
39. पसली का दर्द: हींग को गर्म पानी में मिलाकर पसलियों पर मालिश करें। इससे दर्द में लाभ मिलता है।
40. पित्ती: हींग को घी में मिलाकर मालिश करना पित्ती में लाभकारी होता है।
41. जहर खा लेने पर: हींग को पानी में घोलकर पिलाने से उल्टी होकर ज़हर का असर खत्म हो जाता है।
42. दांतों की बीमारी: दांतों में दर्द होने पर दर्द वाले दातों के नीचे हींग दबाकर रखने से जल्द आराम मिलता है।
43. दांतों में कीड़े लगना: हींग को थोड़ा गर्मकर कीड़े लगे दांतों के नीचे दबाकर रखें। इससे दांत व मसूढ़ों के कीड़े मर जाते हैं।
44. दांत दर्द:
• हींग को पानी में उबालकर उस पानी से कुल्ले करने से दांतों का दर्द दूर हो जाता है।
• शुद्ध हींग को चम्मच भर पानी में गर्म करके रूई भिगोकर दर्द वाले दांत के नीचे रखें। इससे दांतों का दर्द ठीक होता है।
• हींग को गर्म करके दांत या जबड़े के नीचे दबाने से दांतों में लगे हुए कीड़े मर जाते हैं और दर्द में आराम मिलता है।
45. अपच: हींग, छोटी हरड़, सेंधानमक, अजवाइन, बराबर मात्रा में पीस लें। एक चम्मच प्रतिदिन 3 बार गर्म पानी के साथ लें। इससे पाचन शक्ति ठीक हो जाती है।
46. भूख न लगना: भोजन करने से पहले घी में भुनी हुई हींग एवं अदरक का एक टुकड़ा, मक्खन के साथ लें। इससे भूख खुलकर आने लगती है।
47. पागल कुत्ते के काटने पर: पागल कुत्ते के काटने पर हींग को पानी में पीसकर काटे हुए स्थान पर लगायें। इससे पागल कुत्ते के काटने का विष समाप्त हो जाता है।
48. सांप के काटने पर:
• हींग को एरण्ड की कोपलों के साथ पीसकर चने के बराबर गोलियां बना लें सांप के विष पर ये गोलियां हर आधा घंटे के अन्दर सेवन करने से लाभ होता है।
• गाय के घी के साथ थोड़ा-सा हींग डालकर खाने से सांप का जहर उतर जाता है।
49. बुखार:
• हींग का सेवन करने से सीलन भरी जगह में होने वाला बुखार मिटाता है।
• हींग को नौसादार या गूगल के साथ देने से टायफायड बुखार में लाभ होता है।
50. कमर दर्द: 1 ग्राम तक सेंकी हुई हींग थोड़े से गर्म पानी में मिलाकर धीरे-धीरे पीने से कमर का दर्द, स्वरभेद, पुरानी खांसी और जुकाम आदि में लाभ होता है।
51. अजीर्ण:
• हींग की गोली (चने के आकार की) बनाकर घी के साथ निगलने से अजीर्ण और पेट के दर्द में लाभ होता है।
• पेट दर्द होने पर हींग को नाभि पर लेप लगाएं।
52. वातशूल: हीग को 20 ग्राम पानी में उबालें। जब थोड़ा-सा पानी बच जाए तो तब इसको पीने से वातशूल में लाभ होता है।
53. पीलिया:
• हींग को गूलर के सूखे फलों के साथ खाने से पीलिया में लाभ होता है।
• पीलिया होने पर हींग को पानी में घिसकर आंखों पर लगायें।
54. पेशाब खुलकर आना: हींग को सौंफ के रस के साथ सेवन करने से पेशाब खुलकर आता है।
55. चक्कर: घी में सेंकी हुई हींग को घी के साथ खाने से गर्भावस्था के दौरान आने वाले चक्कर और दर्द खत्म हो जाते हैं।
56. घाव के कीड़े: हींग और नीम के पत्ते पीसकर उसका लेप करने से व्रण (घाव) में पड़े हुए कीडे़ मर जाते हैं।
57. कान दर्द: हींग को तिल के तेल में पकाकर उस तेल की बूंदें कान में डालने से तेज कान का दर्द दूर होता है।
58. मलशुद्धि: हींग, सेंधानमक और एरण्ड के तेल से बत्ती बनाकर गुदा में रखने से वायु का अनुलोमन होकर मल की शुद्धि होती है।
59. हिचकी:
• हींग और उड़द का चूर्ण अंगारे पर डालकर उसका धुंआ मुंह में लेने से हिचकी मिटती है।
• थोड़ी-सी हींग 10 ग्राम गुड़ में मिलाकर खाने से हिचकियां आना बंद हो जाती हैं।
• हींग और उड़द का ध्रूमपान करने से हिचकी में लाभ होता है।
• 2 ग्राम हींग, 4 पीस बादाम की गिरी दोनों को एक साथ पीसकर पीने से हिचकी बंद हो जाती है।
• थोड़ी-सी हींग पानी में घोलकर पीने से हिचकी में लाभ होता है।
• बाजरे के बराबर हींग को गुड़ या केले में रखकर खाने से अधिक हिचकी नहीं आती है।
60. गर्भसंकोचन: हींग का नियमित सेवन करने से गर्भाशय का संकोचन होता है
61. उल्टी:
• हींग को पानी में पीसकर पेट पर लेप करने से उल्टी बंद होती है।
• हींग 1 हिस्सा, कालीमिर्च और अफीम 2-2 हिस्से लेकर इन तीनों चीजों को पुदीना के रस में अच्छी तरह पीसकर चने के बराबर गोलियां बना लें। 1-1 गोली 1-1 घंटे के अन्तर से पानी के साथ रोगी को सेवन कराने से उल्टी और दस्त बंद हो जाते हैं।
• 3 ग्राम हींग और 3 ग्राम अनन्त-मूल के चूर्ण को पानी के साथ मिलाकर खाने से हर तरह की उल्टी आना बंद हो जाती है।
• 1 ग्राम हींग, 5 ग्राम बहेड़ा का छिलका और 4 लौंग को एक साथ पीसकर 1 कप पानी में मिलाकर पीने से उल्टी आना रुक जाती है।
62. आमातिसार (दस्त के आंव का आना):
• हींग 5 ग्राम, कपूर 10 ग्राम, कत्था 10 ग्राम और नीम के कोमल पत्ते 3 ग्राम लेकर तुलसी के रस में पीसकर चने जैसी गोली बना लें। यह गोली दिन में 3-4 बार गुलाब के रस के साथ देने से हैजे में और जामुन के पेड़े की छाल के रस में देने से आमातिसार में लाभ होता है।
• 240 से 960 मिलीग्राम कालीमिर्च के चूर्ण में हींग एवं अफीम एक साथ मिलाकर सुबह-शाम लेने से आमातिसार में लाभ मिलता है।
• हींग, कालीमिर्च और कपूर ये तीनों वस्तुएं 10-10 ग्राम तथा अफीम 3 ग्राम लेकर अदरक के रस में 6 घण्टे तक घोटें फिर छोटी-छोटी गोलियां बना लें। यह 1 या 2 गोलियां दिन में लेने से आमातिसार और हैजा मिटता है।
63. मलेरिया का बुखार: 2 ग्राम हींग को 2 ग्राम गुड़ में मिलाकर सुबह और शाम दें। इससे मलेरिया का बुखार नष्ट हो जाता है।
64. काली खांसी: काली खांसी (कुकुर खांसी) में बच्चों के सीने पर हींग का लेप करने से लाभ मिलता है।
65. मोतियाबिन्द: हींग, बच, सोंठ और सौंफ का कुछ भाग लेकर शहद में मिलाकर रोज खाने से मोतियाबिन्द के रोग में जल्दी आराम आता है।
66. निमोनिया: रोजाना सुबह, दोपहर तथा शाम को लगभग 240 मिलीग्राम हींग को तीन-चार मुनक्कों में भरकर खिलाने से एक सप्ताह के अन्दर ही निमोनिया ठीक हो जाता है।
67. गुदा रोग: हींग को पानी के साथ पीस लें और रूई में लगाकर बच्चे के गुदा के अन्दर लगाएं। इससे गुदा रोग ठीक होता है।
68. अफारा (पेट में गैस का बनना):
• हींग को पानी में घोलकर नाभि (पेट के निचले भाग) के आस-पास लेप करने और गर्म पानी की थैली या बोतल रखने से वायु निकल जाती है।
• हींग को 2 से 3 ग्राम पानी में घोलकर बस्ति (नाभि के निचले भाग) पर लगाने से अफारा में लाभ होता है।
• देशी घी में भुनी हुई हींग 240 मिलीग्राम से लेकर 960 मिलीग्राम में अजवायन और काला नमक के साथ पानी में घोलकर पिलाने से पेट की गैस में तुरन्त लाभ मिलता है।
69. डकार आना: भुनी हुई हींग, काला नमक और अजवायन को देशी घी साथ सुबह और शाम सेवन करने से डकार, गैस और भोजन के न पचने के रोगों में लाभ मिलता है।
70. जुएं का पड़ना: बिना भुनी हींग (कच्ची हींग) पानी में घोल मिलाकर बालों की जड़ों तक लगायें, और पूरे बालों को इस घोल से गीला करके छोड़ दें, कुछ घंटों बाद नींबू रस मिले पानी से बालों को धो लें। इससे सारे जुएं मर जाएंगे और ऐसा रोजाना एक बार कुछ दिन तक करें। इससे पूरे सिर के जूएं की सफाई हो जाएगी।
71. बांझपन को दूर करना: यदि गर्भाशय में वायु (गैस) भर गई हो तो थोड़ी सी काली हींग को काली तिलों के तेल में पीसकर तथा उसमें रूई का फोहा भिगोकर तीन दिन तक योनि में रखें। इससे बांझपन का दोष नष्ट हो जाएगा। प्रतिदिन दवा को ताजा ही पीसना चाहिए।
72. कब्ज:
• हिंगाष्टक चूर्ण 6 ग्राम को पानी के साथ खाने से हर प्रकार के वायु की बीमारियां मिट जाती हैं।
• देशी घी में भुनी हुई हींग को 240 मिलीग्राम से लेकर 960 मिलीग्राम की मात्रा में अजवायन और काले नमक के चूर्ण के साथ पानी में घोलकर रोजाना दिन और रात को सेवन करने से पेट की गैस और कब्ज से छुटकारा मिलता है।
• भुनी हुई हींग को सब्जी में डालकर सेवन करने से पेट की गैस और कब्ज नष्ट हो जाती है।
73. पेट की गैस बनना:
• हींग, काला नमक और अजवाइन को पीसकर चूर्ण बनाकर सेवन करने से लाभ होता है।
• हींग को गर्म पानी में घोलकर नाभि (पेट का निचला भाग) के आस-पास लेप करें और 1 ग्राम हींग भूनकर किसी भी चीज के साथ खाने से लाभ होता है।
• 2 ग्राम हींग को आधा किलो पानी में उबाल लें। जब पानी थोड़ा-सा बचे पानी को गुनगुनी मात्रा में पीने से लाभ होता है। हींग, जीरा और पीने का तम्बाकू को पीसकर काढ़ा बना लें। फिर इस काढ़े को गुनगुना करके पेट पर लेप करने से पेट की गैस और दर्द में लाभ होता है।

*पेनकिलर और एंटीबायोटीक से सावधान* –

🌻पेनकिलर कभी ना खायें …. अगर किडनी बढ़िया रखनी है तो | पैरासिटामॉल कभी ना खायें .... अगर शरीर, पेट आदि सभी अच्छा रखना है तो…. वो तो टी.वी. पे ऐसे ही दिखाते है "क्या हुआ सर दर्द हुआ कुछ लेते क्यों नही ? हाँ पैरासिटामॉल, आह अच्छा हुआ | " अच्छा नही हुआ पैरासिटामॉल से नही हुआ उसे रुपया मिला था... वो तो एक्टिंग कर रहा था और तुम सचमुच में खाकर ओर बीमार हो जाओ | पैरासिटामॉल है, पेनकिलर है, एंटीबायोटीक है, हे भगवान! बचके रहना इन एंटीबायोटीकों से और पेनकिलर से | घर पे पड़ी हो तो गटर में फेंक देना किसी को मुफ्त में भी मत देना |

🌻फीके दूध में (गरम दूध हो) हल्दी डालकर पियो एंटीबायोटीक का बाप है | कभी एंटीबायोटीक की जरुरत पड़े तो शुद्ध हल्दी हो गरम दूध ...शक्कर न डाला हुआ उसमे मिलके पियो | दूध का दूध एंटीबायोटीक का एंटीबायोटीक ...बढ़िया हो जायेगा | पेनकिलर दर्द होता है तो थोडा खानपान में ध्यान रखे ..जौ का दलिया और जौ के अट्टे की रोटी खायें, तो शरीर में अन्दर जहाँ भी सुजन है जिसके कारण तकलीफ होती है वो चली जायेगी | जो आदमी जौ का दलिया और जौ की रोटी खाता है उसको बुढ़ापे में और जब तक जीयेगा तब तक किडनी ख़राब नहीं होती|

- Shri Sureshanandji Delhi 2nd Aug' 2012


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पुनर्नवा औषधि

इस औषधि का नाम “पुनर्नवा” है। यह शब्द संस्कृत भाषा के 2 शब्दों “पुनः एवं नवः” से मिलकर बना है। जिसका अर्थ होता है “फिर से नया बनाने वाली औषधि”, यह औषधि आपके शरीर को फिर से नया बनाने के गुण को अपने में लिए है। यही कारण है कि इसको पुनर्नवा कहा जाता है। इस औषधि का प्रयोग रोगों से लड़ने की शक्ति को बढ़ाने से लेकर कैंसर तक के इलाज में होता है।

इस प्रकार पुनर्नवा करती है लाभ

यदि कोई व्यक्ति इस औषधि के रस का मात्र एक चम्मच अपनी सब्जी में मिलाकर खाता है तो वह वृद्ध अवस्था को प्राप्त नहीं होता। यह औषधि उस व्यक्ति के शरीर को हमेशा जवान बनाएं रखती है। इसके अलावा यह औषधि पीलिया रोग, उल्टी, प्लीहा, मंद अग्नि, बुढ़ापा, मूत्र रोगों के अलावा अन्य बहुत से रोगों से निजात दिलाती है।

पुनर्नवा नामक यह औषधि इसको उपयोग करने वाले व्यक्ति के शरीर में से अंदर की सारी गंदगी को मल मूत्र की सहायता से निकाल कर व्यक्ति की बीमारियों को जड़ से ही खत्म कर देती है और आपका स्वास्थ्य हमेशा सही बना रहता है। यही कारण है कि इस औषधि का सेवन करने वाला व्यक्ति कभी बीमार नहीं पड़ता है।


http://bit.ly/2Y5nbee

20 जुलाई 1965 बलिदान दिवस .....

यूं तो मुझे हिन्दुस्तान की जंग ए आज़ादी के सारे मुजाहिद ए आज़ादी, इंक़लाबी और क्रांतिकारियों से मुहब्बत है, और मै उनकी तह ए दिल से इज़्ज़त करता हुं। पर जिस क्रांतिकारी से मुझे आज सबसे अधिक लगाव है वो हैं भगत सिंह के साथ एसेंबली में बम फोड़ने वाले महान क्रांतिकारी बटुकेश्वर दत्त साहेब।

वही बटुकेश्वर दत्त जो हिन्दुस्तान की आज़ादी के लिए फांसी के सज़ा से बचते हुए सालों तक काले पानी की कालकोठरी में क़ैद रहे; और जब मुल्क आज़ाद हुआ तो पेट पालने के लिए सड़कों पर ऐड़ियां घींसा!

जिस शख़्स को युवाओं का आदर्श होना था उसे आदर्श तो क्या, लोगों ने जीते जी ही भुला दिया था। आज़ादी के बाद पटना शहर में बटुकेश्वर दत्त ने कभी ठेले पर बनियान बेची तो कभी साइकिल पर घूम-घूमकर बिस्कुट बेचा, कभी सिगरेट कंपनी में काम किया तो कभी बस चलाने का नाकाम व्यवसाय किया।

चूंकी बटुकेश्वर दत्त का मानना था कि आज़ादी की लड़ाई लड़ने का कोई मुआवज़ा नहीं होना चाहिए इसलिए उन्हे आज़ाद भारत में 18 साल तक गुमनामी और अभावग्रस्त जीवन जीना पड़ा।

इस अजीब सी कहानी का सबसे दुखद पहलु यह है कि वह पटना शहर भी बटुकेश्वर दत्त को ठीक से याद नहीं करता जहां उन्होंने अपने आधी से अधिक ज़िन्दगी गुज़ार दी। जहां उनकी इकलौती संतान भारती बागची जी रहती हैं, जो पटना के मगध महिला कॉलेज में अर्थशास्त्र की प्रोफ़ेसर थीं।

इत्तेकाफ़ से हमें उनसे मिलने का कई बार मौक़ा मिला और हम उनकी सादगी देख कर दंग रह गए। दो कमरे के एक फ़्लैट मे रहने वाली भारती जी से जब आप बात कीजिएगा तो कहीं से ऐहसास ही नही होगा के आप उससे बात कर रहे जो एक अज़ीम विरासत की ऐकलौती वारिस हैं।

उनसे मै जब जब मिला तब एक ही सवाल करता था के आपको बटुकेश्वर दत्त की बेटी होने पर कैसा महसूस होता है? हर बार उनका वही जवाब होता था जो एक सायादार दरख़्त का होना चाहीये! वो निहायत ही मसूमियत के साथ बता थीं के उनके लिए फ़ख़्र की बात है, और बटुकेश्वर दत्त के संतान होने के कारण ही मै उनसे मिलने आया!

भारती बागची जी बताती हैं के पटना से बहुत कम लोग उनसे मिलने आते हैं, पर पंजाब से बड़ी तादाद में लोग उनसे मिलने आते हैं।

बटुकेश्वर दत्त जी से बचपन में उर्दु सीखने वाली भारती बागची जी से जब हम उनकी सादगी के बारे में पूछते हैं तो वो कहती हैं ये उन्हे उनके पिता से विरासत मे मिली है।

जब हम उनसे पूछते हैं के आपके पिता बटुकेश्वर दत्त जी को क्या वो सम्मान मिला जिस सम्मान के वो हक़दार थे ? तो वो कहती हैं नही! पर बिहार के मुख्यमंत्री का शुक्रिया भी अदा करती हैं के उनकी वजह कर उनके पिता बटुकेश्वर दत्त जी की प्रतीमा बिहार विधानसभा के सामने लगी है। लेकन अब आपको जान कर हैरत होगी के अज़ीम क्रांतिकारी बटुकेश्वर दत्त जी की प्रतीमा को सड़क चौड़ा करने के नाम पर वहां से हटा दिया गया हा। अब तक सड़क तो चौड़ी नही हुई पर बटुकेश्वर दत्त जी की उस प्रतीमा को वहां से हटा कर पटना के किसी गुमनाम जगह पर लगा दिया गया है।

और हां भारती बागची जी कॉफ़ी बहुत बेहतरीन बनाती हैं। उन्होने ख़ुद अपने हाथों से बना कर हमें पिलाया था। आप भी उनसे आशिर्वाद ले सकते हैं।

आज सुबह ही भारती बागची जी से बात कर आशिर्वाद लिया। जब मैने उन्हे बताया के ये कॉल मैने उनके पिता जी, भारत की शान, बिहार के लाल बटुकेश्वर दत्त की पुण्यतिथी पर ख़िराज ए अक़ीदत पेश करने के लिए किया है तो वो बहुत ख़ुश हुईं।

जिंदगी का सिलेबस :गड़बड़ कहाँ हुई :
एक बहुत ब्रिलियंट लड़का था। सारी जिंदगी फर्स्ट आया। साइंस में हमेशा 100% स्कोर किया। अब ऐसे लड़के आम तौर पर इंजिनियर बनने चले जाते हैं, सो उसका भी सिलेक्शन IIT चेन्नई में हो गया। वहां से B Tech किया और वहां से आगे पढने अमेरिका चला गया और यूनिवर्सिटी ऑफ़ केलिफ़ोर्निया से MBA किया।
अब इतना पढने के बाद तो वहां अच्छी नौकरी मिल ही जाती है। उसने वहां भी हमेशा टॉप ही किया। वहीं नौकरी करने लगा. 5 बेडरूम का घर  उसके पास। शादी यहाँ चेन्नई की ही एक बेहद खूबसूरत लड़की से हुई।
एक आदमी और क्या मांग सकता है अपने जीवन में ? पढ़ लिख के इंजिनियर बन गए, अमेरिका में सेटल हो गए, मोटी तनख्वाह की नौकरी, बीवी बच्चे, सुख ही सुख।
लेकिन दुर्भाग्य वश आज से चार साल पहले उसने वहीं अमेरिका में, सपरिवार आत्महत्या कर ली. अपनी पत्नी और बच्चों को गोली मार कर खुद को भी गोली मार ली। What went wrong? आखिर ऐसा क्या हुआ, गड़बड़ कहाँ हुई।
ये कदम उठाने से पहले उसने बाकायदा अपनी wife से discuss किया, फिर एक लम्बा suicide नोट लिखा और उसमें बाकायदा अपने इस कदम को justify किया और यहाँ तक लिखा कि यही सबसे श्रेष्ठ रास्ता था इन परिस्थितयों में। उनके इस केस को और उस suicide नोट को California Institute of Clinical Psychology ने ‘What went wrong'? जानने के लिए study किया।
पहले कारण क्या था, suicide नोट से और मित्रों से पता किया। अमेरिका की आर्थिक मंदी में उसकी नौकरी चली गयी। बहुत दिन खाली बैठे रहे। नौकरियां ढूंढते रहे। फिर अपनी तनख्वाह कम करते गए और फिर भी जब नौकरी न मिली, मकान की किश्त जब टूट गयी, तो सड़क पर आने की नौबत आ गयी। कुछ दिन किसी पेट्रोल पम्प पर तेल भरा बताते हैं। साल भर ये सब बर्दाश्त किया और फिर पति पत्नी ने अंत में ख़ुदकुशी कर ली...
इस case study को ऐसे conclude किया है experts ने : This man was programmed for success but he was not trained, how to handle failure. यह व्यक्ति सफलता के लिए तो तैयार था, पर इसे जीवन में ये नहीं सिखाया गया कि असफलता का सामना कैसे किया जाए।
अब उसके जीवन पर शुरू से नज़र डालते हैं। पढने में बहुत तेज़ था, हमेशा फर्स्ट ही आया। ऐसे बहुत से Parents को मैं जानता हूँ जो यही चाहते हैं कि बस उनका बच्चा हमेशा फर्स्ट ही आये, कोई गलती न हो उस से। गलती करना तो यूँ मानो कोई बहुत बड़ा पाप कर दिया और इसके लिए वो सब कुछ करते हैं, हमेशा फर्स्ट आने के लिए। फिर ऐसे बच्चे चूंकि पढ़ाकू कुछ ज्यादा होते हैं सो खेल कूद, घूमना फिरना, लड़ाई झगडा, मार पीट, ऐसे पंगों का मौका कम मिलता है बेचारों को, 12th कर के निकले तो इंजीनियरिंग कॉलेज का बोझ लद गया बेचारे पर, वहां से निकले तो MBA और अभी पढ़ ही रहे थे की मोटी तनख्वाह की नौकरी। अब मोटी तनख्वाह तो बड़ी जिम्मेवारी, यानी बड़े बड़े targets।
कमबख्त ये दुनिया, बड़ी कठोर है और ये ज़िदगी, अलग से इम्तहान लेती है। आपकी कॉलेज की डिग्री और मार्कशीट से कोई मतलब नहीं उसे। वहां कितने नंबर लिए कोई फर्क नहीं पड़ता। ये ज़िदगी अपना अलग question paper सेट करती है। और सवाल, सब out ऑफ़ syllabus होते हैं, टेढ़े मेढ़े, ऊट पटाँग और रोज़ इम्तहान लेती है। कोई डेट sheet नहीं।
एक अंग्रेजी उपन्यास में एक किस्सा पढ़ा था। एक मेमना अपनी माँ से दूर निकल गया। आगे जा कर पहले तो भैंसों के झुण्ड से घिर गया। उनके पैरों तले कुचले जाने से बचा किसी तरह। अभी थोडा ही आगे बढ़ा था कि एक सियार उसकी तरफ झपटा। किसी तरह झाड़ियों में घुस के जान बचाई तो सामने से भेड़िये आते दिखे। बहुत देर वहीं झाड़ियों में दुबका रहा, किसी तरह माँ के पास वापस पहुंचा तो बोला, माँ, वहां तो बहुत खतरनाक जंगल है। Mom, there is a jungle out there।
इस खतरनाक जंगल में जिंदा बचे रहने की ट्रेनिंग बच्चों को अवश्य दीजिये।
बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ संस्कार भी देना जरूरी है, हर परिस्थिति को ख़ुशी ख़ुशी धैर्य के साथ झेलने की क्षमता, और उससे उबरने का ज्ञान और विवेक बच्चों में होना ज़रूरी है।
बच्चे हमारे है, जान से प्यारे है।
🙏💖🙏


*अगर इस पद्धति से देशी गाय के दूध से घी बने तो अमृत अन्यथा (batter oil) जो हमारी सेहत के लिए नुकसानदायक है।*

*समुद्र मंथन के बाद ही पता चला हमें दही से मक्खन निकालने की क्रिया*

 मेरु पर्वत और देव दानवो द्वारा की गयी मंथन ही दही मंथन क्रिया हैं इसमें क्षीर सागर दूध से भरा घड़ा है मेरु पर्वत उस दही को मथने वाली मथनी है और हमारे दो हाथ जिनसे यह क्रिया होती है उसमे एक देव हस्त (पुण्य) है और दूसरा दानव हस्त (पाप) है

*इस मंथन की क्रिया में मथनी का एक बार पृथ्वी की दिशा में घूमने से और दूसरी बार विपरीत दिशा में घूमने से दही के परमाणु आपस में टकराते है*

 और परमाणुओं का सामूहिक रूप से विखंडन होता है । उस विखंडन से निकले हुए दही के प्रोटोन (Proton) आपस में तेज़ गति से टकराते है और उनका विखंडन भी होता है । यही पर सृष्टि के निर्माण में लगे हुए तीनो ऊर्जाओ का अलग होना और फिर सम्मिलित होने की प्रक्रिया काफी देर तक चलती है । इस क्रिया के फलस्वरूप ही दही अपने अन्दर छिपे हुए अग्नि को जल के साथ मिश्रित कर मक्खन के रूप में बाहर निकाल देता है ।

*यह मक्खन जो सहज रूप से अर्द्धतरल के रूप में दिखता है यह वास्तव में सृष्टि का ऐसे अद्भुत पदार्थ है जिसमे दो विरुद्ध महाभूतो का समावेश है -अग्नि और जल । जो कभी साथ रहने की प्रकृति वाले नहीं है*।

 लेकिन मक्खन में साथ-साथ रहते है इसी मक्खन को जब हम अग्नि पर तपाते है तब उसमे से जल वाष्प के रूप में उड़ जाता है और सृष्टि की शुद्ध अग्नि जो अग्नि महाभूत के नाम से जाना जाता है वह हमे प्राप्त होता है।  इस घृत को जलने से जो लौ बनती है और उस से निकलने वाली प्रकाश की किरणें सूर्य नारायण की किरणों के सदृश्य है जिसमे सृष्टि के सञ्चालन की दो ऊर्जाए "प्रज्ञा एवं क्रिया ऊर्जा" का समावेश होता है। ऐसे घृत से जलता हुआ दीपक सौर मंडल के सूरज का एक छोटा हिस्सा है । *इस प्रकार से बना 10 ml घृत यदि किसी दीपक में जले तब उससे सोलह सौ लीटर अशुद्ध वायु का रूपांतरण प्राण वायु (ऑक्सीजन) रूप में होता है ।*

यही कारण है की वेदों में सूर्य नारायण की किरणों का नाम "गौ" भी है।  वेद कहते है सूर्य की किरणों में ज्योति, आयु और "गौ" यह तीन प्रकृति है।  इन तीनो से ही वनस्पति जगत और जीव जगत को यथा संभव उर्जा मिलती है। *किरणों में जो "गौ" प्रकृति है उसका शोषण केवल भारतीय नस्ल की गौमाताएं ही कर सकती है ।  इसीलिए भारत के महर्षियों ने इस जीव को "गौ" कहा और अपने लिए, अपने उपयोग की वनस्पतियों के लिए पृथ्वी और सृष्टि को दीर्घायु बनाने के लिए  "गौ" का सानिध्य किया ।*  यजुर्वेद की एक ऋचा में एक प्रश्न है

*"कस्य मात्र न विद्यते"?*

*पृथ्वी और सृष्टि दोनों ही गोमाता के स्वरुप है उनमे कोई भेद नहीं है । दोनों ही एक दूसे के सहायक और परिपूरक है* ।

इसी क्रिया को आधुनिक विज्ञानं ने समझा और उसे प्रमाणित करने के लिए इस कलयुग का *सबसे बड़ा परिक्षण "Big Bang Test" के नाम से वर्ष 2006 में स्विट्ज़रलैंड की सीमा पर किया । इस परिक्षण में 27 km परिधि की एक सुरंग धरती के गर्भ में बनाया गया*

 । उसमे बड़े बड़े चुम्बकीय ऊर्जा वाले यंत्र जिसे इकोलाईज़र मशीन कहते है लगाये गए ।  इन मशीनों की मदद से शुद्ध हाइड्रोजन परमाणुओं को तोड़ कर इसके Protons को *सूर्या की किरणों के बराबर वेग देकर आपस में टकराया गया।*

जिसे प्रोटोन Bombardment कहा गया।  इस क्रिया ने protons को तोड़ दिया ।  इसके तीन खंड हुए जिनमे दो खंडो के पास आकृति मिली । पहली  आकृति जिसकी संरचना *शिवलिंग की तरह दिखलाई दी और दूसरी संरचना भगवन विष्णु के सहस्र रूप की तरह एवं तीसरा खंड एक ज्योति पुंज की तरह निकला और ओझल हो गया ।  यही ब्रह्मा है जिसकी कोई आकृति नहीं है लेकिन जैसे ही शिव और विष्णु स्वरुप के बीच से निकला प्रोटोन नष्ट हो गया ।  अर्थात वह ज्योति पूंज ही वह ऊर्जा है जो इस सृष्टि को बांधे हुए है इसीलिए ब्रम्हा रूप यह ज्योति पुंज ही ईश्वर है* जिनसे इस सृष्टि का निर्माण हुआ है ।  यही कारण है की आधुनिक वैज्ञानिकों ने पहली बार स्वीकार किया की ईश्वर का अस्तित्व है जिसका दर्शन उन्होंने क्षण भर के लिए किया और माना की भारत की धारणा "कण-कण में ईश्वर है" यह शाश्वत सत्य है

इस प्रयोग की प्रक्रियाओ का ज्ञान वैज्ञानिको को भारत के उन घरो से मिला जहाँ आज भी ब्रह्म मुहूर्त में दही मंथन की क्रिया होती है ।  मक्खन रुपी आण्विक ऊर्जा निकली जाती है ।  *इसी आण्विक ऊर्जा के सेवन से भारत भूमि पर ऋषि और क्रन्तिकारी पैदा होते आये लेकिन दुर्भाग्य हम भारतवासियों का की सृष्टि के इस उत्क्रष्ट अनुसंधान हमने खोया यही कारण है की आज के भारत में ऋषि व्यक्तित्व और भगवन श्री कृष्ण जैसे क्रन्तिकारी व्यक्तित्व जन्म नहीं ले रहे हैं ।*

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अंग्रेजियत का भूत चढ़ा है कि सभी ओर सुंदर दिखने की होड़ में शरीर को  दिखाना शुरू करदिया है ये सुंदरता ना होकर अश्लीलता बनती जा रही है और आजकल मूर्ख लोग इसको स्टैंडर्ड कहने लगे है।

मैंने गरीब महिला को भूखा तो देखा है परन्तु अश्लील कपड़ो में नही देखा।। उनको भी इतनी समझ है कि शरीर ढकने के लिए होता है दिखाने के लिए नही।।

जीन्स टॉप के अलावा जो सूट है
वो बिना बाजू के पहन रही है और उसमे कंधे के आस पास का सारा शरीर दिखता है
गले के ऊपर गला छोटा पहन रही है
गला इतना छोटा होता है कि कोई इज्जतदार इंसान उस महिला को देख ले तो उसको शर्म  आ जायेगी पर
महिलाओ ने अपनी शर्म लज्जा बेच दी है और बेशर्म होती जा रही है।

कुछ महिलाएं ये बोलती है कि सोच का फर्क है सोच सही होनी चाहिए तो
आपये बताओ कि आपने कय्या सोच कर ते कपड़े पहने है कि जिसमे आपका गला दिखे आपके कंधों का हिस्सा दिखा

फिर वो सब महिलाएं चुपी साध लेती है

एक छोटी सी वीडियो शायद मुर्खता की पट्टी आंखों से हटा दे।।


#ब्राजील ने हमारी #देसी_गायों का आयात कर अब तक गायों की संख्या 65 लाख कर ली है और इससे भी दोगुनी भारतीय देसी नस्ल की गाय दूसरे देशों में निर्यात की है ! #google पर #Indian_Cow_in_Brazil सर्च कर सकते हैं

उन लोगों ने हृदय से इन #गौवंश (सांडो सहित) की सेवा कर आज औसत में एक गाय से दिनभर में करीब 40 लीटर दूध पाने की शानदार स्थिति बना ली !

अब सुनिए दूसरी बात :-

ब्राजील इन भारतीय देसी गायों के दूध से पाउडर बना कर #ऑस्ट्रेलिया, #ड़ेनमार्क को निर्यात करता है ! जबकि डैनमार्क जैसे देश में आदमी से अधिक वहाँ उनके देश की गाय हैं लेकिन वो अपनी गायों का दूध नहीं पीते ! वहाँ #milk_is_white_poison वाली बात प्रचलित है ! वहां ब्राजील से आने वाला भारतीय नस्ल की गायों का दूध,और दूध पाउडर का ही उपयोग किया जाता हैं।डेनमार्क में ही नहीं आस्ट्रेलिया और आस पास के देशों में भी ब्राजील से आने वाले भारतीय नस्ल की गायों के दूध का उपयोग किया जाता है,

और तो और ऑस्ट्रेलिया, डैनमार्क आदि देश अपनी #जर्सी_होलस्टीन_युवान (जिन्हें हम गाय कहते नहीं थकते) के दूध से पाउडर निकाल कर हमारे देश भारत को भेजता है और हम बड़े शौक से इस #जहर का उपयोग करते हैं जबकि इस पाउडर को  ऑस्ट्रेलिया में उपयोग में लाने पर कड़ा #प्रतिबन्ध है | वे सिर्फ ब्राजील के दूध पाउडर को ही उपयोग में लाते हैं !

क्यों ?

क्योंकि ऑस्ट्रेलिया, डैनमार्क आदि देशो की #जर्सी_गायों के दूध से #डायबिटीज़, #कैंसर जैसी भयंकर बीमारी फैलती है ! जबकि ब्राजील से आने वाला भारतीय गायो का दूध इन बीमारियों को खत्म करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है आज हमारा भारत डायबिटीज़ व कैंसर की बीमारी की विश्व राजधानी बनता जा रहा है ! भारत की प्रत्येक डेयरी दूध में से सम्पूर्ण फैट निकाल लेती है।फिर उसमे इसी आयातित दूषित ऑस्ट्रेलियन, ड़ेनमार्क से आए दूध के पाउडर को मिला देती हैं।  इस तरह प्रोसेस किया जहर थैलियों के माध्यम से हमारी रसोई तक पहुंचाया जाता है !

ये कैसा दुष्चक्र है !!!!

भारत की देसी गाय ब्राजील में । वहाँ से दूध और दूध का पाउडर आस्ट्रेलिया और डेनमार्क में।

ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क का दूषित दूध पाउडर भारत में और फिर होता है दवाइयों का आयात !

*मेडिकल साइंस के अनुसार जानिए हमें गर्म पानी क्यो पीना चाहिए:*

नित्य सुबह खाली पेट गर्म पानी पीने से कब्ज और गैस जैसी पेट की तमाम समस्याएँ दूर रहती हैं। जब आप सुबह उठते हैं तो आपके मुंह में लार बनी हुई होती है और कहा जाता है कि खाली पेट पानी पीने से यह लार हमारे पेट में जाने के बाद कई प्रकार के रोगों से बचाती है क्योंकि यह एंटीसेप्टिक की तरह हमारे शरीर के लिए कार्य करती है आपको जानकर हैरानी होगी कि मानो लाड 98% पानी से ही बनी हुई होती है और 2% भाग एंजाइम बलगम इलेक्ट्रिक और जीवाणुरोधी यौगिक जैसे तत्व मौजूद होते हैं किंतु जब हमारे मुंह में पानी आता है तो उस पदार्थ को हम लार कहते हैं यह हमारे शरीर को बहुत तंदुरुस्त रखने में फायदेमंद साबित होती है उन्हीं फायदों के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं।

*तो आइये जानते है गर्म या हल्का गुनगुना पानी पीने के अनेक चमत्कारी फायदे:-*

सुबह जल्दी उठकर गर्म पानी पीने से हमारे शरीर की पाचन क्रिया तेज होती है और खाने का डीकंपोजीशन बढ़ता है नित्य गर्म पानी का सेवन करने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन तेज होता है, ह्रदय भी स्वस्थ रहता है। अगर कोई व्यक्ति पथरी की समस्या से परेशान हैं तो वह सुबह शाम दोनों समय भोजन करने के पश्चात एक गिलास गर्म पानी का सेवन अवश्य ही करें।

उम्र से पहले बुढ़ापा आना यह एक बड़ी समस्या है। खास तौर पर यह महिलाओं में देखी जाती है। सुबह उठकर गुनगुना पानी पीने से प्रीमेच्योर एंजिंग समस्या से बचा जा सकता है। बुखार में गर्म पानी पीना अधिक लाभदायक होता है। जुकाम में गर्म पानी पीने से बहुत आराम मिलता है, इससे कफ और सर्दी शीघ्र दूर होते हैं।
सुबह गुनगुना पानी पीने से हमारा वेट कम होता है, इससे हमको बहुत ज्यादा फायदा मिलता है। गुनगुना पानी हमारे शरीर का तापमान को तेजी से बढ़ाता है। नियमित रूप से सुबह खाली पेट और रात में खाने के बाद गरम पानी के सेवन से कब्ज़ से राहत मिलती है। गर्म पानी वजन घटाने में भी बहुत मददगार होता है,रोज़ सुबह खाली पेट गर्म पानी में 1/2 नींबू व एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से शरीर स्लिम होता है।

नित्य एक गिलास गर्म पानी में एक नींबू का रस, काली मिर्च व काला नमक डालकर पीने से पेट का भारीपन दूर होता है भूख भी खुलकर लगती है। उठकर गुनगुना पानी पीने से शरीर के विषाक्त पदार्थ तथा टॉक्सिन को शरीर से बाहर निकालता है, इससे हमारे शरीर का सरकुलेशन ठीक होता है।

पानी को उबालते हुए जब उसका चौथाई हिस्सा जल जाये अर्थात तीन हिस्सा पानी ही बचे तो ऐसा पानी पीना श्रेष्ठ है। ऐसा गर्म पानी का सेवन हमारे शरीर के वात, कफ और पित्त्त तीनो ही दोषों को समाप्त करता है। नित्य सुबह खाली पेट व रात्रि को खाने के बाद गर्म पानी पीने से पेट की सभी समस्याएँ खत्म होती है और गैस जैसी समस्याएं निकट भी नहीं आती हैं।

गर्म पानी त्वचा के लिए रामबाण है। अगर आपको त्वचा सम्बन्धी परेशानियाँ रहती है , त्वचा में कील मुहाँसे भी निकलते है तो नित्य सुबह शाम एक गिलास गर्म पानी चाय की तरह चुस्कियाँ लेते हुए पीना शुरू कर दें। इससे आपकी त्वचा सम्बन्धी परेशानियाँ दूर हो जाएगी, कील मुहाँसे नहीं होंगे, त्वचा चमकने लगेगी।
नित्य गर्म पानी का सेवन करने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन तेज होता है, ह्रदय भी स्वस्थ रहता है। अगर कोई व्यक्ति पथरी की समस्या से परेशान हैं तो वह सुबह शाम दोनों समय भोजन करने के पश्चात एक गिलास गर्म पानी का सेवन अवश्य ही करें। गले में टांसिल्स होने पर या गला खराब होने पर गर्म पानी में 1 चुटकी नमक डालकर गरारे करने से गले की परेशानी में शीघ्र आराम मिलता है।


*आज नाखून के बारे में भी बता देते हैं, जिनके बारे में आमतौर पर लोग अनभिज्ञ रहते हैं।*

*नाखून लालिमायुक्त सफ़ेद, साफ़-सुथरे और चमकीले होने चाहिए। अगर नाखून जल्दी टूट रहे हैं तो इसका अर्थ है कि ज़रूर शरीर में कोई ऐसी क्रिया हो रही है, जो देर-सबेर बीमारी के रूप में सामने आ सकती है। ऐसा भी हो सकता है कि शरीर में मिनरल्स और प्रोटीन समेत दूसरे पोषक तत्वों की कमी हो रही हो। थायरॉइड की समस्या, हार्मोन्स के असंतुलित होने का असर भी नाखूनों पर होता है।*

*नाखून के रंग से हमारे स्वास्थ्य व रोग की पहचान :*

*पीला रंग के नाखून :हल्के पीले, फ़ीके या कमज़ोर नाख्न एनीमिया, कुपोषण, हृदय रोग और लिवर की बीमारी का संकेत देते हैं। फंगल इन्फेक्शन होने पर नाखून पीले हो जाते हैं डायबिटीज़, पीलिया, सिरोसिस और थायरॉइड जैसी बीमारी में नाखून पीले हो जाते हैं। अगर पीले-मोटे नाखून धीमी गति से बढ़ रहे हैं, तो यह फेफड़े की बीमारी का संकेत हो सकता है।*

*सफ़ेद धब्बे या सफ़ेद रंग के नाखून :कभी-कभी नाखूनों पर सफ़ेद धब्बे नज़र आने लगते हैं, तो वहीं कई बार पूरा नाखून ही सफ़ेद नज़र आता है। नाखूनों में यह सफ़ेदी लिवर, हृदय और आँत के रोग होने का संकेत देती है। अत्यधिक वसा का स्तर शरीर में बढ़ने पर भी नाखून सफ़ेद हो जाते हैं, खून की कमी भी इसका एक कारण है।*

*गहरे लाल रंग के नाखून :जब नाखूनों का रंग गहरा लाल होने लगे, तो यह हाई ब्लडप्रेशर का संकेत हो सकता है। इसी तरह अगर नाखूनों का रंग जामुनी हो जाए, तो समझ जाएँ कि आप लो ब्लडप्रेशर की चौथी अवस्था से गुज़र रहे हैं।*

*पर्पल या नीले रंग के नाखून :अगर शरीर में ऑक्सीजन का संचार ठीक प्रकार से नहीं हो रहा है, तो नाखून का रंग नीला होने लगता है। यह फेफड़े में संक्रमण, दिल की बीमारी या न्यूमोनिया का संकेत देता है। पाचनतंत्र की गड़बड़ी, अनिद्रा, डिप्रेशन, जीर्ण डायरिया एवं क़ब्ज़ में भी नाखून लाल हो जाते हैं।*

*गुलाबी और सफ़ेद रंग के नाखून :जब आधे नाखून का रंग अचानक गुलाबी और आधे नाखून का रंग सफ़ेद हो जाए तो समझ लीजिए कि यह गुर्दे के रोग का संकेत है।*

*गुलाबी और चमकदार नाखून :गुलाबी और चमकदार तथा चिकने नाखन बेहतरीन स्वास्थ्य की निशानी हैं। यदि नाखूनों का यह रंग न हो, तो वह इंगित करता है कि स्वास्थ्य ख़राब है या ख़राब होने वाला है।*

*नाखूनों पर लकीरें :यह कार्बोहाइड्रेट, नमक एवं शुगर का अधिक मात्रा में सेवन करने की निशानी है। लिवर, किडनी एवं पाचनतंत्र कमज़ोर होने पर भी नाखूनों पर लकीरें बन जाती हैं।*

*नाखूनों के सिरों का फटना :यह हृदय, प्रजनन और तंत्रिका तंत्र की कमज़ोरी को सचित करता है। यह टेस्टीज़ और ओवरी की क्रियाविधि में गड़बड़ का एक भरोसेमंद सूचक है। जिस तरफ़ की ओवरी या टेस्टिकल की क्रियाविधि गड़बड़ होगी उस तरफ़ के अँगूठे के नाखून के सिरे फटे हुए होंगे।*

*नाखूनों पर गड्ढे :अचानक से डाइट में परिवर्तन करने से नाखूनों में गड्ढे दिखाई देते हैं। यदि हम किसी एक जगह से दूसरी जगह या किसी अन्य देश में बस जाते हैं, तो भी नाखूनों में ये परिवर्तन आ जाते हैं।*

*नाखूनों का छिलना :शुगर, जंक फूड्स, सॉफ्ट ड्रिंक्स, अत्यधिक दवाइयों का सेवन करने से शरीर में मिनरल्स की कमी हो जाती है और नाखून छिलने लगते हैं। माहवारी की समस्या, यौन रोग , अनिद्रा, थकान, डिप्रेशन और डर का भी एक लक्षण नाखूनों का छिलना है।*

*नाखूनों के बेस पर चंद्रमा बनना(व्हाइट मून) :यदि आपकी चयापचय या मेटाबॉलिक दर धीमी है तो मून छोटा बनेगा। यदि चंद्रमा बड़ा है तो यह बताता है कि मेटाबॉलिज़्म की दर तेज़ है। बुढ़ापे में यह मून दिखाई नहीं देता है। अत्यधिक बड़ा मून शारीरिक दुर्बलता की निशानी है।*







*विशेष चिकित्सीय सलाह हेतु आप व्यक्तिगत रात्रि 9 बजे के बाद सम्पर्क कर सकते हैं*
*Homoeo Trang: 🌹🌹डॉ. वेद प्रकाश,नवादा( बिहार)🌹8051556455🌹*

*निरोगी रहने हेतु महामन्त्र*

*मन्त्र 1 :-*

*• भोजन व पानी के सेवन प्राकृतिक नियमानुसार करें*

*• ‎रिफाइन्ड नमक,रिफाइन्ड तेल,रिफाइन्ड शक्कर (चीनी) व रिफाइन्ड आटा ( मैदा ) का सेवन न करें*

*• ‎विकारों को पनपने न दें (काम,क्रोध, लोभ,मोह,इर्ष्या,)*

*• ‎वेगो को न रोकें ( मल,मुत्र,प्यास,जंभाई, हंसी,अश्रु,वीर्य,अपानवायु, भूख,छींक,डकार,वमन,नींद,)*

*• ‎एल्मुनियम बर्तन का उपयोग न करें ( मिट्टी के सर्वोत्तम)*

*• ‎मोटे अनाज व छिलके वाली दालों का अत्यद्धिक सेवन करें*

*• ‎भगवान में श्रद्धा व विश्वास रखें*

*मन्त्र 2 :-*

*• पथ्य भोजन ही करें ( जंक फूड न खाएं)*

*• ‎भोजन को पचने दें ( भोजन करते समय पानी न पीयें एक या दो घुट भोजन के बाद जरूर पिये व डेढ़ घण्टे बाद पानी जरूर पिये)*

*• ‎सुबह उठेते ही 2 से 3 गिलास गुनगुने पानी का सेवन कर शौच क्रिया को जाये*

*• ‎ठंडा पानी बर्फ के पानी का सेवन न करें*

*• ‎पानी हमेशा बैठ कर घुट घुट कर पिये*

*• ‎बार बार भोजन न करें आर्थत एक भोजन पूर्णतः पचने के बाद ही दूसरा भोजन करें*

*भाई राजीव दीक्षित जी के सपने स्वस्थ भारत समृद्ध भारत और स्वदेशी भारत स्वावलंबी भारत स्वाभिमानी भारत के निर्माण में एक पहल आप सब भी अपने जीवन मे भाई राजीव दीक्षित जी को अवश्य सुनें*

*स्वदेशीमय भारत ही हमारा अंतिम लक्ष्य है :- भाई राजीव दीक्षित जी*

*मैं भारत को भारतीयता के मान्यता के आधार पर फिर से खड़ा करना चाहता हूँ उस काम मे लगा हुआ हूँ*

*आपका अनुज गोविन्द शरण प्रसाद वन्देमातरम जय हिंद*


*नमस्कार* 

अगर आपको अपने घूटने नही बदलवाने तो यह मैसेज जरूर पढिये और दूसरों को भेजिए ताकि वो लोग भी अपने घुटनों की सारवार घर पर ही कर सकेl
*घुटने का ऑपरेशन करवाने से पहले जरूर प्रयोग करके देखे दोस्तो और ये योग हर शरीर के हर जोड़ो में काम करता हैं।*
 दोस्तो घुटने बलनेका ऑपरेशन आज 8 से 10 लाख तक का होता है । लेकिन उसे आपके घुटने में दर्द तो चला जायेगा लेकिन 3 या 4 साल के बाद  वापस वही के वही आ जाता है । और डॉक्टर कहता है कि आपको वापस ऑपरेशन करना पड़ेगा । लेकिन *आयुर्वेद में घुटने का 100% और कारगत इलाज है* जो 
🍃 *आपके घुटनो का दर्द*
🍃 *घुटने में सूजन*
🍃 *घुटने का लिक़्क़वीड कम  हो जाना*
 और भी घुटनों की कोई भी समस्या में 100 % लाभदायक और आजमाया हुवा फॉर्मूला है ।
 
आये जानते है इस आयुतवेदिक फॉर्मूले के बारे में ..

👉 *ध्यान रखना जड़ीबूटियां नकली ना हो।*
                 
🌿  *देसी बबुल फली        100GM*
🌿  *हाड़सिंगार                100GM*
🌿  *अजवाइन                   50GM*
🌿  *मेथी                           30GM*
🌿   *अश्वगंधा                    30GM*
🌿    *प्रवालपिस्टी              10GM*
🌿    *स्वर्णमाक्षिक भस्म        5GM*
🌿    *गोदन्ती भस्म             10GM*
🌿    *योगराज गूगल           60GM*

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 इस सभी चीजो को पंसारी के यहा या कोई आयुर्वेद की स्टोर पर से लेकर  चूर्ण बना के और उसे काच के चीनी मिट्टी के बर्तन में रखे  और सुबह - शाम 1-1 चम्मस गुनगुने पानी के साथ ले 

इस दवाए का सेवन डॉक्टर या वैध की सलाह अनुसार करे

हमारे यहां पर हर प्रकार की देशी जड़ी बूटियों मिलती हैं। ओर हर प्रकार की देशी दवाई तेयार की जाती हैं।
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तुलसी एक गुण अनेक
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तुलसी के बारे में घर-घर में सभी जानते हैं। हिंदू धर्म में तुलसी को विशेष महत्व दिया गया हैैं। कहा जाता हैं कि जहां तुसली फलती हैं, उस घर में रहने वालों को कोई संकट नहीं आते। स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेद में तुलसी के अनेक गुण के बारे में बताया गया हैं। यह बात कम लोग जानते हैं कि तुलसी परिवार में आने वाले संकट के बारे में सुखकर पहले संकेत दे देती हैं। पेटलावद के ज्योतिषी आनंद त्रिवेदी बता रहे हैं कि तुलसी एक, लेकिन गुण अनेक किय तरह से हैं।

प्रकृति की अपनी एक अलग खासियत है। इसने अपनी हर एक रचना को बड़ी ही खूबी और विशिष्ट नेमत बख्शी है। इंसान तो वैसे भी प्रकृति की उम्दा रचनाओं में से एक है जो समझदारी और सूझबूझ से काम लेता है। इसके अलावा जानवरों की खूबी ये है कि वे आने वाले खतरे, मसलन भूकंपए सुनामी, पारलौकिक ताकतों आदि को पहले ही भांप सकने में सक्षम होते हैं, लेकिन बहुत ही कम लोग यह बात जानते हैं कि पौधों के भीतर भी ऐसी ही अलग विशेषता है, जिसे अगर समझ लिया जाए तो घर के सदस्यों पर आने वाले कष्टों को पहले ही टाला जा सकता है।

क्यों मुरझाता है तुलसी का पौधा
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शायद कभी किसी ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि चाहे तुलसी के पौधे पर कितना ही पानी क्यों ना डाला जाए उसकी कितनी ही देखभाल क्यों ना की जाएए वह अचानक मुरझाने या सूखने क्यों लगता है।

क्या बताना चाहता है👇
आपको यकीन नहीं होगा लेकिन तुलसी का मुरझाया हुआ पौधा आपको यह बताने की कोशिश कर रहा होता है कि जल्द ही परिवार पर किसी विपत्ति का साया मंडरा सकता है। कहने का अर्थ यह है कि अगर परिवार के किसी भी सदस्य पर कोई मुश्किल आने वाली है तो उसकी सबसे पहली नजर घर में मौजूद तुलसी के पौधे पर पड़ती है।

हिन्दू शास्त्र
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शास्त्रों में यह बात भली प्रकार से उल्लेख है कि अगर घर पर कोई संकट आने वाला है तो सबसे पहले उस घर से लक्ष्मी यानि तुलसी चली जाती है और वहां दरिद्रता का वास होने लगता है।

बुध ग्रह
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जहां दरिद्रता, अशांति व कलह का वातावरण होता है वहां कभी भी लक्ष्मी का वास नहीं होता। ज्योतिष के अनुसार ऐसा बुध ग्रह की वजह से होता है क्योंकि बुध का रंग हरा होता है और वह पेड़-पौधों का भी कारक माना जाता है।

लाल किताब
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ज्योतिष शास्त्र से संबंधित लाल किताब के अनुसार बुध को एक ऐसा ग्रह माना गया है जो अन्य ग्रहों के अच्छे-बुरे प्रभाव को व्यक्ति तक पहुंचाता है। अगर कोई ग्रह अशुभ-फल देने वाला है तो उसका असर बुध ग्रह से संबंधित वस्तुओं पर भी होगा और अगर कोई अच्छा फल मिलने वाला है तो उसका असर भी बुध ग्रह से जुड़ी चीजों पर दिखाई देगा।

अच्छा और बुरा प्रभाव
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अच्छे प्रभाव में पेड़-पौधे बढऩेे लगते हैं और बुरे प्रभाव में मुरझाकर अपनी दुर्दशा बयां कर देते हैं।

विभिन्न प्रकार की तुलसी
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शास्त्रानुसार तुलसी के विभिन्न प्रकार के पौधों का जिक्र मिलता है, जिनमें श्रीकृष्ण तुलसी, लक्ष्मी तुलसी, राम तुलसी, भू तुलसी, नील तुलसी, श्वेत तुलसी, रक्त तुलसी, वन तुलसी, ज्ञान तुलसी मुख्य रूप से हैं। इन सभी के गुण अलग-अलग और विशिष्ट हैं। तुलसी मानव शरीर में कान, वायु, कफ, ज्वर, खांसी और दिल की बीमारियों के लिए खासी उपयोगी है।

वास्तुशास्त्र में तुलसी
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वास्तुशास्त्र में भी तुलसी को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। वास्तु के अनुसार तुलसी को किसी भी प्रकार के दोष से मुक्त रखने के लिए उसे दक्षिण-पूर्व से लेकर उत्तर-पश्चिम के किसी भी स्थान तक लगा सकते हैं। अगर तुलसी के गमले को रसोई के पास रखा जाए तो किसी भी प्रकार की कलह से मुक्ति पाई जा सकती है। जिद्दी पुत्र का हठ दूर करने के लिए पूर्व दिशा में लगी खिड़की के सामने रखें।

संतान में सुधार
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नियंत्रण या मर्यादा से बाहर निकल चुकी संतान को पूर्व दिशा से रखी गई तुलसी के तीन पत्तों को किसी ना किसी रूप में खिलाने पर वह आपकी आज्ञा का पालन करने लगती है।

कारोबार में वृद्धि
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कारोबार की चिंता सताने लगी है, घर में आय के साधन कम होते जा रहे हैं तो दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखी तुलसी पर हर शुक्रवार कच्चा दूध और मिठाई का भोग लगाने के बाद उसे किसी सुहागिन स्त्री को दे दें। इससे व्यवसाय में सफलता मिलती है।

नौकरी पेशा
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अगर आप नौकरी पेशा हैं और ऑफि स में आपका कोई सीनियर परेशान कर रहा है तो ऑफि स की खाली जमीन पर या किसी गमले में सोमवार के दिन तुलसी के सोलह बीज किसी सफेद कपड़े में बांध कर ऑफि स जाते ही दबा दीजिए। इससे ऑफिस में आपका सम्मान बढ़ेगा।

शालिग्राम का अभिषेक
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घर की महिलाएं रोजाना पंचामृत बनाकर शालिग्राम का अभिषेक करती हैं तो घर में कभी भी वास्तुदोष की हालत नहीं आएगी।

शारीरिक फायदे
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ज्योतिष के अलावा शारीरिक तौर पर भी तुलसी के बड़े लाभ देखे गए हैं। सुबह के समय खाली पेट ग्रहण करने से डायबिटीज, रक्त की परेशानी, वात, पित्त आदि जैसे रोगों से मुक्ति पाई जा सकती है। प्रतिदिन अगर तुलसी के सामने कुछ समय के लिए बैठा जाए तो अस्थमा आदि जैसे श्वास के रोगों से जल्दी छुटकारा मिलता है।

वैद्य का दर्जा
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शास्त्रों में तुलसी को एक वैद्य का दर्जा भी दिया गया है, जिसका घर में रहना अत्यंत लाभकारी है। मनुष्य को अपने जीवन के प्रत्येक चरण में तुलसी की आवश्यकता पड़ती है। साथ ही आधुनिक रसायन शास्त्र भी यह बात स्वीकारता है कि तुलसी का सेवन, इसका स्पर्श, दीर्घायु और स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी सिद्ध होता है।

ध्यान रखें तुलसी की ये 10 बात
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पुरानी परंपरा है कि घर में तुलसी जरूर होना
चाहिए। शास्त्रों में तुलसी को पूजनीय, पवित्र और
देवी का स्वरूप बताया गया है। यदि आपके घर में भी
तुलसी हो तो यहां बताई जा रही 10 बातें हमेशा
ध्यान रखनी चाहिए। यदि ये बातें ध्यान रखी
जाती हैं तो सभी देवी-देवताओं की विशेष कृपा
हमारे घर पर बनी रहती है। घर में सकारात्मक और
सुखद वातावरण रहता है। पैसों की कमी नहीं आती
है और परिवार के सदस्यों को स्वास्थ्य लाभ भी
मिलता है। यहां जानिए शास्त्रों के अनुसार बताई
गई तुलसी की खास बातें...

1🌱तुलसी के पत्ते चबाना नहीं चाहिए
तुलसी का सेवन करते समय ध्यान रखें कि इन पत्तों
को चबाए नहीं, बल्कि निगल लेना चाहिए। इस तरह
तुलसी का सेवन करने से कई रोगों में लाभ मिलता है।
तुलसी के पत्तों में पारा धातु के तत्व होते हैं। पत्तों
को चबाते समय ये तत्व हमारे दांतों पर लग जाते हैं
जो कि दांतों के लिए फायदेमंद नहीं है। इसीलिए
तुलसी के पत्तों को बिना चबाए ही निगलना
चाहिए।

2🌱शिवलिंग पर तुलसी नहीं चढ़ाना चाहिए शिवपुराण के अनुसार, शिवलिंग पर तुलसी के पत्ते नहीं चढ़ाना चाहिए। इस संबंध में एक कथा बताई गई है। कथा के अनुसार, पुराने समय दैत्यों के राजा
शंखचूड़ की पत्नी का नाम तुलसी था। तुलसी के पतिव्रत धर्म की शक्ति के कारण सभी देवता भी शंखचूड़ को हराने में असमर्थ थे। तब भगवान विष्णु ने
छल से तुलसी का पतिव्रत भंग कर दिया। इसके बादशिवजी ने शंखचूड़ का वध कर दिया।
जब ये बात तुलसी को पता चली तो उसने भगवान विष्णु को पत्थर बन जाने का श्राप दिया। विष्णुजी ने तुलसी का श्राप स्वीकार कर लिया और कहा कि तुम धरती पर गंडकी नदी तथा तुलसी के पौधे के रूप में हमेशा रहोगी। इसके बाद से ही अधिकांश पूजन कर्म में तुलसी का उपयोग विशेष रूप से किया जाता है, लेकिन शंखचूड़ की पत्नी होने के कारण तुलसी शिवलिंग पर नहीं चढ़ाई जाती है।

3🌱कब नहीं तोड़ना चाहिए तुलसी के पत्ते तुलसी के पत्ते कुछ खास दिनों में नहीं तोड़ना चाहिए। ये दिन हैं एकादशी, रविवार और सूर्य या चंद्र ग्रहण समय। इन दिनों में और रात के समय तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ना चाहिए। बिना वजह तुलसी केपत्ते कभी नहीं तोड़ना चाहिए। ऐसा करने पर दोष लगता है। अनावश्यक रूप से तुलसी के पत्ते तोड़ना, तुलसी को नष्ट करने के समान माना गया है।

4🌱रोज करें तुलसी का पूजन हर रोज तुलसी पूजन करना चाहिए। साथ ही, तुलसी के संबंध में यहां बताई गई सभी बातों का भी ध्यान रखना चाहिए। हर शाम तुलसी के पास दीपक जलाना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि जो लोग शाम के समय तुलसी के पास दीपक जलाते हैं, उनके घर में महालक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहती है।

5🌱तुलसी से दूर होते हैं वास्तु दोष
घर-आंगन में तुलसी होने से कई प्रकार के वास्तु दोष भी समाप्त हो जाते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति पर भी इसका शुभ असर होता है।

6🌱तुलसी घर में हो तो नहीं लगती है बुरी नजर मान्यता है कि तुलसी से घर पर किसी की बुरी नजर नहीं लगती है। साथ ही, घर के आसपास की किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा पनप नहीं पाती
है। सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।

7🌱तुलसी से वातावरण होता है पवित्र
तुलसी से घर का वातावरण पूरी तरह पवित्र और
हानिकारक सूक्ष्म कीटाणुओं से मुक्त रहता है। इसी
पवित्रता के कारण घर में लक्ष्मी का वास होता है
और सुख-समृद्धि बनी रहती है।

8🌱तुलसी का सूखा पौधा नहीं रखना चाहिए घर में
यदि घर में लगा हुआ तुलसी का पौधा सूख जाता है
तो उसे किसी पवित्र नदी में, तालाब में या कुएं में
प्रवाहित कर देना चाहिए। तुलसी का सूखा पौधा
घर में रखना अशुभ माना जाता है। एक पौधा सूख
जाने के बाद तुरंत ही दूसरा पौधा लगा लेना
चाहिए। घर में हमेशा स्वस्थ तुलसी का पौधा ही
लगाना चाहिए।

9🌱तुलसी है औषधि भी
आयुर्वेद में तुलसी को संजीवनी बूटी के समान माना
जाता है। तुलसी में कई ऐसे गुण होते हैं जो बहुत-सी
बीमारियों को दूर करने में और उनकी रोकथाम करने
में सहायक होते हैं। तुलसी का पौधा घर में रहने से
उसकी महक हवा में मौजूद बीमारी फैलाने वाले कई
सूक्ष्म कीटाणुओं को नष्ट करती है।

10🌱रोज तुलसी की एक पत्ती सेवन करने से मिलते हैं ये
फायदे
तुलसी की महक से सांस से संबंधित कई रोगों में लाभ
मिलता है। साथ ही, तुलसी का एक पत्ता रोज सेवन
करने से हम सामान्य बुखार से बचे रहते हैं। मौसम
परिवर्तन के समय होने वाली बीमारियों से बचाव
हो जाता है। इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक
क्षमता बढ़ती है, लेकिन हमें नियमित रूप से तुलसी
का सेवन करते रहना चाहिए।

एक और बात तुलसी कृष्ण को बेहद प्यारी हैं,इसलिये प्रतिदिन कान्हा के चरणों में तुलसीदल यानि तुलसी का पत्ता ज़रूर अर्पण करना चाहिये..

कृष्णसेवा के प्रत्येक भोग में तुलसी दल रखकर अर्पण करना चाहिये

“तुलसी कृष्ण प्रेयसी नमो: नमो:"
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बच्चों का बुखार दूर करेंगे यह  सबसे कामयाब घरेलु उपचार

बच्चों के बुखार का कारण :

★ बच्चों को पूरे दिन खेलने-कूदने से थकावट हो जाती है जिसकी वजह से उन्हें बुखार चढ़ जाता है,

★ दूसरे कारणों में ज्यादा ठंड लग जाने की वजह से, ठंडे पानी से नहाने से, जुकाम होने के कारण और छोटे बच्चों के दांत निकलते समय भी बच्चों को बुखार (Children fever)हो जाता है।

बुखार के लक्षण :

★ बुखार के रोग में कभी तो बहुत ज्यादा ठंड लगती है या कभी गर्मी की वजह से शरीर में बैचेनी होने लगती है।

★ इस रोग में पूरा शरीर जैसे टूटा हुआ सा लगता है, सिर में दर्द होता है, सांस तेज हो जाती है, भूख नहीं लगती है और आंखें लाल हो जाती हैं।

★ बुखार का बढ़ना, कब्ज, जी मिचलाना, डकार आना, प्यास, बेहोशी, सुस्ती, थकावट, चक्कर आना और भावुकता इत्यादि बाल ज्वर के लक्षण हैं।

विभिन्न औषधियों से बुखार का घरेलु उपचार :

*तुलसी रस शहद के साथ मिलाकर चटाते रहने से हर प्रकार के ज्वर रोग में रामबाण सिद्ध होता है*

*चिरायता का स्वरस दो दो बून्द पिलाते रहें*

1. कालीमिर्च : लगभग 2 कालीमिर्च और 2 तुलसी के पत्तों को पीसकर शहद के साथ दिन में 3 बार बच्चे को चटाने से बुखार का रोग दूर हो जाता है।

2. पीपल : काकड़ासिंगी और पीपल का चूर्ण शहद के साथ 2 चुटकी बच्चे को खिलाने से बुखार दूर हो जाता है।

3. कुटकी : लगभग 2 चुटकी कुटकी का चूर्ण शहद के साथ बच्चे को सुबह-शाम चटाने से बुखार में आराम आता है।

4. हरड़ : 1 छोटी हरड़, 2 चुटकी आंवले का चूर्ण, 2 चुटकी हल्दी और नीम की 1 कली को एक साथ मिलाकर काढ़ा बना लें और बच्चे को पिलाएं। इससे बुखार नष्ट हो जाता है।

5. जायफल : जायफल को पीसकर माथे, छाती और नाक पर लेप करने से बुखार के रोग में आराम आता है।

6. पीपल : पीपल के फल के चूर्ण को बारीक पीसकर शहद के साथ मिलाकर बच्चे को चटाने से बुखार में लाभ होता है।

7. गुडूची : आधे से एक चम्मच गुडूची का रस बच्चे को पिलाने से लाभ होता है।

8. मुलेठी : 5-5 ग्राम दारूहल्दी, मुलेठी, कटेरी, हल्दी, कटेरी और इन्द्रजौ को एक साथ मिलाकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े को बच्चे को पिलाने से बुखार में आराम आता है।
9. अभ्रक भस्म : यदि 1 से 2 साल के बच्चे को गर्मी का पित्ती ज्वर (बुखार) हो तो लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग प्रवाल भस्म को दूध से देने से ज्वर (बुखार) उतर जाता है। अभ्रक भस्म एक से दो साल के बच्चे को उड़द के बराबर दूध से दें तो वादी शीत कफ का बुखार दूर हो जायेगा

10. जायफल : लगभग 6-6 ग्राम की मात्रा में जायफल, शीतलचीनी, तज, जयपत्री, लौंग, इलायची, वंशलोचन और पीपर को पीसकर चूर्ण बना लें फिर 3 ग्राम केसर, 1 ग्राम कस्तूरी को पीसकर पानी में डालकर उड़द के दाने के बराबर गोली बना लें। यह बच्चों के ज्वर, कफ (बलगम), खांसी, दूध का न पचना, दूध निकालना, हरे दस्तों का होना और सर्दी-जुकाम में लाभकारी है।
11. हींग : 6-6 ग्राम शुद्ध पारा, शुद्ध गंधक की कज्जली (काजल) बना लें। फिर 3-3 ग्राम भुनी हुई हींग, पीपर, सोंठ, तज, जायफल, भुना हुआ केसर, सोहागा, लालनमक, भुनी हुई लौंग, अजवाइन, वायविडंग, अतीस, काकड़ासिंगी को लेकर चूर्ण बनाकर छान लें और कज्जली में मिला दें। फिर पानी के साथ इसकी उड़द के बराबर की छोटी-छोटी गोलियां बना लें। यह गोली सुबह-शाम मां के दूध से देने से बच्चों की सर्दी, जुकाम, खांसी, दूध डालना, हरे दस्तो का होना, पेट की बीमारी नहीं होती है। यह गोली बच्चों के लिये बनाकर हमेशा सेवन कराएं। इससे बच्चे को किसी बीमारी होने का डर नहीं रहता। यह बच्चों को ज्वर (बुखार) में भी दी जाए तो शीतवाई का ज्वर (बुखार), कफ (बुखार) दूर होते हैं

12 गिलोय : गिलोय का रस 120 मिलीलीटर शहद में मिलाकर दिन में तीन बार बच्चे को चटाने से बच्चों का बुखार दूर हो जाता है।

13. नीम : भद्रमोथा, हरड़, नीम, कड़वे परवल और मुलेठी को मिलाकर काढ़ा बनाकर पीने से सभी प्रकार के ज्वर (बुखार) समाप्त हो जाते हैं। परन्तु यह काढ़ा गुनगुना सा पिलाना चाहिए।
15. पीपल : नागरमोथा, पीपल, अतीस और काकड़सिंगी को बारीक पीसकर और छानकर रख लें। इस चूर्ण को शहद में मिलाकर चटाने से बच्चों का ज्वरातिसार, खांसी, वमन (उल्टी) और दमा जैसे रोगों में आराम आता है। वास्तव में यह प्रयोग ज्वरातिसार (बुखार और दस्त) को समाप्त करने वाला है। अगर ज्वारातिसार के साथ खांसी, दमा और उल्टी का रोग भी हो तो वे भी इससे समाप्त हो जाते हैं। इसका प्रयोग बच्चों के लिए बहुत ही लाभकारी है।


16. अतीस :
★ अतीस अकेला ही ज्वर (बुखार) में बहुत ही लाभकारी होता है। अतीस को तुलसी के रस के साथ देने से मलेरिया का बुखार भी समाप्त हो जाता है। बालकों को मलेरिया का बुखार हो तो यह जरूर देना चाहिए। तेज बुखार चले जाने पर जब हल्का बुखार या हरारत रह जाय तो अतीस, नीम की छाल और गिलोय का काढ़ा उचित मात्रा में पिलाने से बाकी बचा हुआ बुखार भी समाप्त हो जाता है। इससे शरीर में ताकत आ जाती है तथा भूख बढ़ती है। अतीस पुष्टिकारक भी है। गर्भवती स्त्रियों को जबकि ज्वरनाशक अन्य दवाएं शरीर में गर्मी करती हैं, उस दौरान यह उपयोग की जा सकती है। यह औषधि बुखार का नाश करती है तथा गर्भ के लिए किसी भी प्रकार से हानिकारक नहीं होती है।
★ 10 ग्राम पिसा हुआ अतीस और 10 ग्राम खांड में शहद मिलाकर आधा-आधा ग्राम बच्चे को सुबह और शाम चटाने से बुखार ठीक हो जाता है।

17. हल्दी : हल्दी, दारूहल्दी, मुलेठी, कटेरी और इन्द्रजौ को मिलाकर उसका काढ़ा बना लें। इस काढ़े को बच्चों को पिलाने से ज्वरातिसार (बुखार के साथ दस्त आना), दमा, खांसी और उल्टी आदि रोग समाप्त हो जाते हैं।
18. इन्द्रजौ : धाय के फूल, बेलगिरी, धनिया, लोध्र, इन्द्रजौ और सुगन्धवाला को बारीक पीसकर “संजीवनी शहद” में मिलाकर चटनी की तरह बच्चों को चटाना चाहिए। इससे ज्वरातिसार (बुखार और दस्त) वात-विकार (गैस की बीमारी) आदि रोग समाप्त हो जाते हैं।
19. धनिया : लोध्र, इन्द्रजौ, धनिया, आमला, सुगन्धवाला और नागरमोथा आदि को बारीक पीसकर शहद में मिलाकर चटाने से बुखार समाप्त हो जाता है
20. मिश्री : कुटकी का चूर्ण मिश्री या शहद के साथ चटाने से बच्चों का बुखार समाप्त हो जाता है।
21. कुटकी : कुटकी को पानी में पीसकर उसका लेप बना लें। इसे बच्चों के शरीर पर लेप करने से बच्चों का ज्वर (बुखार) समाप्त हो जाता है

22. नागरमोथा : नागरमोथा, काकड़ासिंगी और अतीस को बारीक पीसकर और छानकर शहद में मिलाकर चटाने से दूध पीने वाले बच्चों के ज्वर (बुखार), खांसी और उल्टी में जरूर ही आराम हो जाता है।

अमर शहीद राष्ट्रगुरु, आयुर्वेदज्ञाता, होमियोपैथी ज्ञाता स्वर्गीय भाई राजीव दीक्षित जी के सपनो (स्वस्थ व समृद्ध भारत) को पूरा करने हेतु अपना समय दान दें



मेरी दिल की तम्मना है हर इंसान का स्वस्थ स्वास्थ्य के हेतु समृद्धि का नाश न हो इसलिये इन ज्ञान को अपनाकर अपना व औरो का स्वस्थ व समृद्धि बचाये। ज्यादा से ज्यादा शेयर करें और जो भाई बहन इन सामाजिक मीडिया से दूर हैं उन्हें आप व्यक्तिगत रूप से ज्ञान दें।

#कान_में_दर्द_के_घरेलू_उपाय

(1). कान में हो रहे दर्द के लिए अदरक का रस एक कारगर दवा है। इसका रस निकालकर कानों में डालने से दर्द से राहत मिलती है।

(2). कई रोगों में रामबाण की तरह काम करने वाला जैतून का तेल कान दर्द में भी राहत देता है।

(3). प्याज का रस भी कान के दर्द में बहुत ही फायदेमंद है। इसका रस निकालकर रूई की मदद से कान में कुछ बूंदे डालने से कान दर्द से राहत मिलती है।

(4). खाने की चीज में विटामिन सी की मात्रा अधिक हो, उसका भरपूर सेवन करना चाहिए। कान दर्द में आराम मिलती है।

(5). अगर आप कान के दर्द से पीड़ित हैं तो तुलसी की ताजी पत्तियों का रस निकालकर उसकी बूंदे कान में डालिए। इससे कान दर्द से राहत मिलेगी। यह बहुत ही पुराना और कारगर उपाय है।



#घमौरियां_के_लिए_घरेलु_उपचार।

गरमी के दिनों में पसीना मरने या त्वचा में सूख जाने के कारण शरीर पर छोटे-छोटे दाने निकल आते हैं। इन्हीं को घमौरियां या अंधौरी कहते हैं।यह धूप में अधिक देर तक काम करने के कारण निकलती हैं।

घमौरियां का कारण :- पसीना आने के बाद शरीर के रोमकूप बंद हो जाते हैं। उन पर हवा नहीं लगती, अत: दबा-ढका स्थान विकारजन्य होकर लाल-लाल दानों के रूप में दिखाई देने लगता है।

घमौरियां की पहचान :- दानों में खुजली होती है। खुजाने के बाद उनमें जलन पड़ती है।

घमौरियों से छूटकारा पाने के कुछ घरेलू उपाय।

(1). करेला :-घमौरियों पर करेले का रस मलिए।

(2). मेहंदी :- मेहंदी पीसकर घमौरियों पर लेप लगाने से वे चली जाती हैं।

(3). नारंगी और घी :- नारंगी या संतरे के छिलकों को सुखाकर उसका चूर्ण घी में मिलाकर घमौरियों पर लगाएं।

(4). बर्फ :- बर्फ मलने से घमौरियां नष्ट हो जाती हैं।

(5). दूध और मुलतानी मिट्टी :- दूध में मुलतानी मिट्टी मिलाकर घमौरियों पर लेप करें।

(6). जीरा और देशी घी :- जीरे को पीसकर देशी घी में मिलाकर घमौरियों पर लगाएं।

(7). सरसों और नमक :- सरसों के तेल में नमक मिलाकर घमौरियों पर मालिश करें।

(8). बकरी का दूध और बर्फ :- बकरी के दूध में बर्फ मिलाकर शरीर पर मलें।

(9). सरसों और नीम :- सरसों के तेल में जरा-सा नीम का तेल मिलाकर शरीर पर लगाएं।

(10). हल्दी और शहद :- हल्दी को पीसकर शहद में मिलाकर घमौरियों पर लगाएं।


#कई_रोगों_में_लाभकारी_है_बेलपत्र।

(1). बेल के रस को हल्के गुनगुने पानी में मिलाएं और इसमें शहद की कुछ बूंदें डालें। इस घोल का नियमित सेवन करने से खून साफ होने में मदद मिलती है।

(2). कहते है कि बेलपत्र की मदद से सफेद दाग भी ठीक होते हैं। बेल के गूदे में सोरलिन नामक तत्व पाया जाता है जो त्वचा की धूप सहने की क्षमता बढ़ाता है, साथ ही इसमें कैरोटीन भी पाया जाता है जो सफेद दाग हल्के करने में मदद करता है।

(3). बेलपत्र पित्त की समस्या, खुजली और त्वचा के दाग-छब्बों को भी दूर करने में सहायक है। इसके लिए बेल के रस में जीरा मिलाकर पिएं।

(4). सिर और बालों से संबंधित समस्या को भी बेलपत्र की सहायता से दूर किया जा सकता है। इसके लिए बेल के पके हुए फल के छिलके लें, उन्हें साफ करके उनमें तिल का तेल और कपूर मिलाएं। अब इस तेल को रोजाना सिर में लगाएं, इससे सिर में जूं खत्म होने के अलावा अन्य समस्याओं में भी फायदा होता है।

(5). बेलपत्र बालों को झड़ने से रोकने में भी मददगार है। इसके लिए रोजाना एक बेल के पत्ते को धोकर खा सकते है। जल्द ही आपको फर्क दिखना शुरू हो जाएगा।

(6). अगर बेल के पके फल को शहद और शकर मिलाकर खाया जाएं, तो खून साफ होने में मदद मिलती है।

(7). शरीर से आ रही दुर्गंध को खत्म करने के लिए भी बेलपत्र का इस्तेमाल कर सकते है। इसके लिए बेल के पत्तों का रस पूरे शरीर पर लगाकर कुछ देर रखे फिर एक घंटे बाद नहा लें।

(8). मुंह के छाले ठीक करने के लिए पके हुए बेल के गूदे को पानी में उबाल कर ठंडा कर लें। अब इस पानी से कुल्ला करें।

(9). बेलपत्र का काढ़ा नियमित पीने से दिल मज़बूत रहता है और हार्ट अटैक की आशंका कम होती है।

(10). बेल पत्तियों का रस बनाकर नियमित रूप से सेवन करने से सांस से जुड़ी बीमारियों में लाभ होता है।


#डेंगू_से_राहत_के_घरेलु_उपचार

(1). पपीते की पत्ती :- डेंगू के उपचार में पपीते की पत्तियां काफी लाभदायक हैं। इसके लिए इन्हें पहले अच्छे से तोड़ कर साफ कर लें और एक गिलास पानी में उबालें। प्लेटलेट्स बढ़ाने में ये काफी फायदेमंद है और आपकी इम्युनिटी भी बढ़ाती हैं।
(2). काली मिर्च और हल्दी :- काली मिर्च और हल्दी भी डेंगू के इलाज में काफी मददगार साबित होती हैं। इसमें एंटी बैक्टेरियल और एंटी इंफ्रलामेट्री गुण होते हैं इसलिए इन्हें गर्म दूध के साथ लेना फायदेमंद होता है।

(3). तुलसी :- तुलसी भी  डेंगू के घरेलु उपचार में शामिल है। तुलसी की यह चाय डेंगू रोगी को बहुत आराम पहुंचाती है. यह चाय दिनभर में तीन से चार बार पी जा सकती है ।

(4). नारियल पानी :- डेंगू के बुखार में नारियल पानी पीना बहुत फायदेमंद रहता है. इसमें एलेक्‍ट्रोलाइट्स, मिनरल और अन्‍य जरुरी पोषक तत्‍व होते हैं जो शरीर को मजबूत बनाते हैं ।

#सार्वजनिक तौर पर #गणेशोत्सव की शुरूआत कैसे हुई ! इसके पीछे क्या था #मकसद !

#गणेशोत्सव की शुरूआत
#गणेशोत्सव की शुरूआत – पूरे #महाराष्ट्र में हर साल गणेशोत्सव का पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है.

पूरे दस दिनों तक चलनेवाले इस उत्सव के दौरान भगवान गणेश घर-घर और #सार्वजनिक पंडालों में #विराजमान होते हैं.

इस दौरान गणपति बप्पा के सारे भक्त अपने आराध्य देव की भक्ति और आस्था के रंग में इस कदर सराबोर हो जाते हैं कि चारो तरफ सिर्फ ‘गणपति बप्पा मोरया’ की गूंज ही सुनाई देती है.

भक्तों के जीवन से विघ्नों को हरनेवाले और उनके जीवन को मंगलमय बनाने वाले भगवान गणेश का हर साल की तरह इस साल भी अपने भक्तों के बीच आगमन हो रहा है.

भगवान गणपति के आगमन की तैयारियों के साथ ही पूरा माहौल भक्तिमय हो गया है.

…लेकिन क्या आप जानते हैं कि गणेशोत्सव की शुरूआत कैसे हुई ?

इस उत्सव को सार्वजनिक तौर पर शुरू करने का श्रेय आखिर किसे जाता है और इसके पीछे क्या मंशा रही होगी?

गणेशोत्सव की शुरूआत

आइए हम आपको बताते हैं गणेशोत्सव की शुरूआत कैसे हुई और उससे जुड़े इतिहास के बारे में.

#लोकमान्य बाल #गंगाधर तिलक ने की थी गणेशोत्सव की शुरूआत

गणेशोत्सव के इतिहास पर गौर करें तो कहा जाता है है कि पेशवाओं ने गणेशोत्सव को बढ़ावा दिया था. शिवाजी महाराज की मां जीजाबाई ने पुणे में कस्बा गणपति नाम से प्रसिद्ध गणपति की स्थापना की थी.

लेकिन सन 1893 में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने सार्वजनिक तौर पर गणेशोत्सव की शुरूआत की. हालांकि तिलक के इस प्रयास से पहले गणेश पूजा सिर्फ परिवार तक ही सीमित थी. तिलक उस समय एक युवा क्रांतिकारी और गर्म दल के नेता के रूप में जाने जाते थे. वे एक बहुत ही स्पष्ट वक्ता और प्रभावी ढंग से भाषण देने में माहिर थे. तिलक ‘पूर्ण स्वराज’ की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे थे और वे अपनी बात को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना चाहते थे. इसके लिए उन्हें एक ऐसा सार्वजानिक मंच चाहिए था, जहां से उनके विचार अधिकांश लोगों तक पहुंच सके.

तिलक ने गणेशोत्सव को सार्वजनिक महोत्सव का रूप देते समय उसे महज धार्मिक कर्मकांड तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि आजादी की लड़ाई, छुआछूत दूर करने, समाज को संगठित करने के साथ ही उसे एक आंदोलन का स्वरूप दिया, जिसका #ब्रिटिश साम्राज्य की नींव को हिलाने में महत्वपूर्ण योगदान रहा.

गणेशोत्सव की शुरूआत

गणेशोत्सव से घबरा गई थी अंग्रेजी हुकूमत

अंग्रेजो की हुकूमत को उखाड़ फेंकने और देश को आज़ादी दिलाने के मकसद से शुरु किए गए गणेशोत्सव ने देखते ही देखते पूरे महाराष्ट्र में एक नया आंदोलन छेड़ दिया.

अंग्रेजों की पूरी हुकूमत भी इस गणेशोत्सव से घबराने लगी. इतना ही नहीं इसके बारे में रोलेट समिति की रिपोर्ट में भी चिंता जताई गई.

इस रिपोर्ट में ज़िक्र किया गया था कि गणेशोत्सव के दौरान युवकों की टोलियां सड़कों पर घूम-घूम कर अंग्रेजी शासन विरोधी गीत गाती हैं व स्कूली बच्चे पर्चे बांटते हैं, जिसमें अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ हथियार उठाने और मराठों से शिवाजी की तरह विद्रोह करने का आह्वान किया जाता था.

गौरतलब है कि तिलक द्वारा सार्वजनिक तौर पर गणेशोत्सव की शुरूआत करने से दो फायदे हुए.

एक तो वह अपने विचारों को जन-जन तक पहुंचा पाए और दूसरा यह कि इस उत्सव ने आम जनता को भी स्वराज के लिए #संघर्ष करने की #प्रेरणा दी और उन्हें जोश से भर दिया.
          🙏👌👏
अब फिर हम सभीको यह प्रयास करना चाहिए कि गणेशजी एवं दुर्गा माता की झांकीयो में विबस्थाओ का सद उपयोग हो और समाज की आध्यात्मिक उन्नति हो इसलिए कोई विदृवान संत महात्मा गुरु जनों द्वारा मंच मायिक झांकी पर कथा प्रबचन में उपयोग करना चाहिए👏🙏

इस तरह से हुई गणेशोत्सव की शुरूआत – बहरहाल #आज़ादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण #भूमिका निभाने वाले इस #गणेशोत्सव को आज भी सभी भारतीय बड़े ही धूमधाम से मनाते हैं और इस उत्सव को आगे भी इसी तरह से मनाते रहेंगे.


*प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश*

*प्रकृति हम सबको सदा स्वस्थ बनाए रखना चाहती है और इसके लिए प्रकृति ने अनेक प्रकार के फल, फूल, साग, सब्जियां, जड़ी-बूटियां, अनाज, दूध, दही, मसाले, शहद, जल एवं अन्य उपयोगी व गुणकारी वस्तुएं प्रदान की हैं। इस उपयोगी पुस्तक माला में हमने इन्हीं उपयोगी वस्तुओं के गुणों एवं उपयोग के बारे में विस्तार से चर्चा की है। आशा है यह पुस्तक आपके समस्त परिवार को सदा स्वस्थ बनाए रखने के लिए उपयोगी सिद्ध होगी।*

*प्रकृति ने हमारे शरीर-संरचना एवं स्वभाव को ध्यान में रखकर ही औषधीय गुणों से युक्त पदार्थ बनाए हैं। शरीर की भिन्न-भिन्न व्याधियों के लिए उपयोगी ये प्राकृतिक भोज्य पदार्थ, अमृततुल्य हैं।*



*इन्हीं अमृततुल्य पदार्थों जैसे-तुलसी, अदरक, हल्दी, आंवला, पपीता, बेल, प्याज, लहसुन, मूली, गाजर, नीबू, सेब, अमरूद आदि के औषधीय गुणों व रोगों में इनके प्रयोग के बारे में जानकारी अलग-अलग पुस्तकों के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास है—यह पुस्तक।*

*प्रस्तावना*

*प्रकृति ने हमारे शरीर, गुण व स्वभाव को दृष्टिगत रखते हुए फल, सब्जी, मसाले, द्रव्य आदि औषधीय गुणों से युक्त ‘‘घर के वैद्यों’’ का भी उत्पादन किया है। शरीर की भिन्न-भिन्न व्याधियों के लिए उपयोगी ये प्राकृतिक भोज्य पदार्थ, अमृततुल्य हैं। ये पदार्थ उपयोगी हैं, इस बात का प्रमाण प्राचीन आयुर्वेदिक व यूनानी ग्रंथों में ही नहीं मिलता, वरन् आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी इनके गुणों का बखान करता नहीं थकता। वैज्ञानिक शोधों से यह प्रमाणित हो चुका है कि फल, सब्जी, मेवे, मसाले, दूध, दही आदि पदार्थ विटामिन, खनिज व कार्बोहाइड्रेट जैसे शरीर के लिए आवश्यक तत्त्वों का भंडार हैं। ये प्राकृतिक भोज्य पदार्थ शरीर को निरोगी बनाए रखने में तो सहायक हैं ही, साथ ही रोगों को भी ठीक करने में पूरी तरह सक्षम है।*

*तुलसी, अदरक, हल्दी, आँवला, पपीता, बेल, प्याज, लहसुन, मूली, गाजर, नीबू, सेब, अमरूद, आम, विभिन्न सब्जियां, मसाले व दूध, दही, शहद आदि के औषधीय गुणों व रोगों में इनके प्रयोग के बारे में अलग-अलग पुस्तकों के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास ‘मानव कल्याण’ व ‘सेवा भाव’ को ध्यान में रखकर किया गया है।*
*उम्मीद है, पाठकगण इससे लाभान्वित होंगे।*
*सादर,*

*-डॉ. राजीव शर्मा*
*आरोग्य ज्योति*
*320-322 टीचर्स कॉलोनी*
*बुलन्दशहर, उ.प्र.*

                *पुरानी व नई माप*

     8 रत्ती        -        1 माशा
     12 माशा    -        1 तोला
     1 तोला        -        12 ग्राम
     5 तोला        -        1 छटांक
     16 छटांक    -        1 कि.ग्रा.
     1 छटांक        -        लगभग 60 ग्राम

*नीबू-सामान्य परिचय*


*नीबू में ए, बी और सी विटामिनों की भरपूर मात्रा है-विटामिन ए अगर एक भाग है तो विटामिन बी दो भाग और विटामिन सी तीन भाग। इसमें ये तत्त्व प्रचुरता में हैं-पोटेशियम, लोहा, सोडियम, मैगनेशियम तांबा, फास्फोरस और क्लोरीन। प्रोटीन, वसा और कार्बोज भी पर्याप्त मात्रा में हैं।*

*विटामिन ‘ए’ की कमी हो तो शरीर की बढ़ोतरी रुक जाती है, यहां तक कि रोगों से लड़ने की ताकत ही घट जाती है, आंखें भी कमोजर पड़ जाती हैं, हड्डियों के जोड़ दर्द करने लगते हैं, शरीर सूखता चला जाता है और शरीर-तंत्र में सड़ांध पैदा होने लगती है, यह सड़ाध मुँह से बदबूदार साँस बनकर निकलने लगती है, दोस्त-यार उसके पास खड़े होने में भी कतराते हैं। नीबू में विटामिन ‘ए’ का एक ही भाग इन सब बुराइयों को जड़ से मिटा देता है। आप यूं भी कह सकते हैं कि नीबू ‘बिछुड़े यार’ मिलवाता है, क्योंकि विटामिन ए की कमी दूर होने से न पायरिया होना, न मसूड़े फूलेंगे न सड़ांध रहेगी, मुँह से सुगंधित सांस निकलने लगेगी और लोगबाग आपके पास खिंचे हुए आने लगेंगे।*


*नीबू मौत के मुँह से बचाता है*

*अब जरा विटामिन ‘बी’ की कमी का नजारा भर देखिए ! खाने-पीने का शौक ही मरने लगता है क्योंकि जठराग्नि ठंडी पड़ जाती है, जब पेट में पहले से पड़े खाद्य पदार्थ ही नहीं पकेंगे तो मुँह के रास्ते हँडिया में कुछ और डालने की इच्छा ही मरने लगेगी, पेट ने ही काम न किया तो मक्खियों की तरह सौ-सौ रोग झपट्टे मारेंगे, कब्ज रहने लगेगी, पेट में सड़ रहे मल की गैस दिमाग खराब कर देगी, आदमी दूसरों को हर घड़ी काट खाने को दौड़ेगा, दोस्त आपका हालचाल पूछ रहे होंगे और आप पेट में उठते मरोड़ को मुट्ठी में दबाए शौचालय की तरफ भागेंगे, जीना ही दूभर हो जाएगा। नीबू में विटामिन ‘बी’ दो भाग है। यह आदमी को मौत के मुँह से बचा लेता है। बुझी जा रही जठराग्नि को यह इतनी प्रचंडता से भड़का देता है कि आदमी खाता भी जी भरकर है और खाया हुआ पचा भी देता है। जिसका हाजमा सही हो गया, उसके अंदर विकार रहेगा कैसे ! हाँ नीबू का सेवन उतनी ही मात्रा में कीजिए जहां तक उसके असर से आप ‘भुक्खड़ न कहलाने लगें।*


*नीबू सूखे गाल भर देता है*


*विटामिन सी की कमी भी शरीर का सत्यानाश कर देती है। यहां तक कि आंतों में छाले भी पड़ जाते हैं, रक्त दूषित हो जाता है जोड़ों में ऐंठन सी आ जाती है, शरीर की मशीनरी ही ढंग से काम नहीं करती, मुँह की महक मर जाती है और दांत खराब होने लगते हैं, मतलब यह कि आदमी मरियल-सा होकर रह जाता है। इसके सेवन से अन्दरूनी सफाई के साथ-साथ ताजगी और स्फूर्ति आती है। सूखे हुए गाल भरने लगते हैं और उनमें साफ खून की ललाई उमड़ आती है।*


*नीबू मेल-जोल सिखाता है*


*यहां हम यह भी स्पष्ट कर देना चाहते हैं नीबू मेलजोल से और घुल-मिलकर रहने वाला फल है। मगर स्वभाव से यह दाहक (जलानेवाला) और तीखा है। इसीलिए पानी, फल या सलाद सब्जी में डालकर ही नीबू का सेवन करना चाहिए। यह ऐसा ईधन है जो फल या जल में मिलकर शरीर को स्वास्थ्य और सौंदर्य देकर यह साबित करता है कि मिल-जुलकर रहोगे तो सुख भोगोगे।*


*खनिज-तत्त्वों का भंडार*


*हमारे शरीर में खनिज-तत्त्वों का सही मात्रा में मौजूद होना उतना ही जरूरी है जितना स्वस्थ रहना। पोटेशियम ऐसा तत्त्व है, जिसके अभाव में हमारा जिगर बेकार होने लगता है, जिगर का काम ठप होगा तो मल जमा होने लगेगा, इसका असर यह होगा कि फोड़े-फुंसियों से बदन भर जाएगा, घाव भरने में ही नहीं आएंगे।*


*मैग्नीशियम की कमी से स्नायु-तंत्र में भारी गड़बड़ी पैदा हो जाती है जैसे कि अपने आप पर से विश्वास उठ जाना, दिल की धड़कन बढ़ जाना सीने में जलन रहना, खून में अम्लता का अंश बढ़ जाना, डाँवाडोल हो जाना, बे-सिर पैर की बातें सोचना और वहमी या शक्की मिजाज हो जाना। नीबू में मैग्नीशियम भी अच्छी मात्रा में है और यह स्नायु-तंत्र को मजबूत करके वहमों से छुटकारा दिला देता है।*


*नीबू भूख जगाता है*


*हमारे शरीर में बल और स्फूर्ति के स्रोत हैं कार्बोज। जीने-योग्य गर्मी बनाए रखने के लिए हमें कार्बोज की हमेशा जरूरत होती है। गर्मी से हमारा मतलब झगड़ालूपन नहीं, बल्कि यौवन से है। अन्दर गर्मी होगी तो भूख भी लगेगी और प्यास भी। शरीर की गर्मी ही मर जाए तो नींद भी भागने लगती है। नीबू में कार्बोज भी भरपूर हैं और ये आदमी को बुढ़ापे में भी फुर्तीला बना देते हैं।*


*नीबू ‘मिलन’ कराता है*


*सच तो यह है कि नीबू में खनिजों का विशाल भंडार है। खनिज-तत्त्व एक तरह से अग्नि तत्त्व होते हैं। इनकी कमी हमारे दिलो-दिमाग पर भी असर डालती है और इन्द्रियों पर भी। शरीर में ताजगी होगी तो खाना भी अच्छा लगेगा, घर भी अच्छा लगेगा, पत्नी भी सुन्दर लगेगी और पति भी प्यारा लगेगा। कामेच्छा का भी इससे सीधा गहरा सम्बन्ध है। नींबू में इतना गुण है कि यह नपुंसकता को जड़ से उखाड़ देता है। पति का ढीलापन और पत्नी की उदासीनता को हटा के उन्हें प्यार और मिलन के लिए उकसाता है।*


*याद रखें-*

*1 नीबू-रस को ‘अकेला’ कभी न पीएँ।*
*2 एक ग्लास जल में चम्मच-भर-नीबू रस काफी समझें।*
*3 नीबू की दहकता कम करने के लिए नमक भी मिलाएँ।*

*4 सुबह और शाम जरूर लें।*

*5 दोपहर के भोजन के साथ न लें तो अच्छा।*

*6 प्याज में डालकर दोपहर को भी लिया जा सकता है।*

*7 दाल-सब्जी में नीबू निचोड़ना छोड़ दें।*

*8 गर्मियों में नीबू का भरपूर सेवन करें।*

*9 सर्दियों में कम मात्रा लें।*

*10 बरसात में संभलकर सेवन करें।*

*11 शुरू में 24 घंटों में दो नीबू काफी हैं।*

*12 चार-पाँच नीबू रोजाना से आगे न बढ़े।*

*13 खाली पेट नीबू-रस लेना विशेष हितकारी है।*

*14 आंच देकर अधिक रस निचोड़ने का लालच न करें।*

*15 नीबू का बीज गले तक न पहुंचने दें।*

*16 नीबू का रस छानकर इस्तेमाल करना उत्तम है।*

*17 नीबू-रस हमेशा कप, ग्लास या काँच की शीशी में ही निचोड़े पीतल, लोहे या तांबे के पात्रों को नीबू से अलग ही रखें।*

*18पीला नीबू ही प्रयोग में लाएँ, हरा नहीं।*

*19 नीबू की कई किस्में हैं-कागजी, जंभीरी, बिजौरा आदि। सब-के-सब नीबू हैं और नीबू हर हाल में अपना असर दिखाता है।*


*दुर्गंध नाशक है नीबू :-नीबू तन-मन्दिर महकाने के काम भी आती है। इसकी सुगन्धि में यह गुण है कि किसी दुर्गन्धि के आगे यह दब नहीं जाती। स्वच्छता के साथ-साथ यह हमारे मुँह का स्वाद भी बढ़ाती है और सुवासित भी करती है। तन की नाली प्रणाली की गंदगी निकालकर यह रक्त के विकार भी मिटा देती है। जिसका खून साफ हो गया, उसे बीमारी से क्या मतलब !*


*पेट के रोग*


*अजीर्ण*

 *अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े काटकर उन पर नीबू निचोड़िए ऊपर से सेंधा नमक छिड़किए और चटखारे लेकर चबाना शुरू कीजिये। मिनटों में हाजमा सही होने की रसीद आ जाएगी, अर्थात् हाजमेदार एक-दो डकार खुलकर आ जाएंगे।*

*नीबू के रस में अदरक के टुकड़े थोड़े गुड़ और सेंधा नमक के साथ सिल पर पीसकर चटनी बनाइए और स्वाद के साथ चाट जाइए। पलों में चुस्ती और फुर्ती की लहरें सी उठती महसूस होने लगेंगी।*

 *किसी मर्तबान में नीबू काटकर सेधा नमक डालें और बन्द करके दो-चार दिन कड़क धूप में रखें। यह स्वादिष्ट अचार थोड़ा-थोड़ा चाटिये और खाइये। जठराग्नि भड़क उठेगी। पहले का खाया हुआ तो पच ही जाएगा, नया खाने को भी जी ललचाएगा।*

 *वमन (कै) से शरीर खिंचकर ढीला पड़ जाता है, क्योंकि शरीर के बहुत से खनिज निकल जाते हैं। कैल्शियम की भी कमी होती है। इसके लिए नीबू का रस ढाई तीन माशे, उससे आधी मात्रा में अजवाइन दो तोला चूने का निथरा हुआ पानी और तोला-भर शहद मिलाकर सेवन करें। बच्चों से लेकर बूढ़ों के सभी अजीर्ण समूल उखाड़ देगा।*

*ज्यादा दौड़भाग न कर सकें तो नीबू को बीच से काटकर उस पर सेंधा नमक छिड़क दीजिए। अब इसे हल्की-सी आंच देकर चूस लीजिए। क्षणों में चैतन्य होकर आप भले-चंगे मुस्कराने लगेंगे।*

* सेंधा नमक नीबू का रस, अदरक का रस और जरा-सा केशर मिलाकर, छुहारे के टुकड़ों के साथ चबाइये। शक्ति और स्फूर्ति के धारे आपके अंग-अंग से फूटने लगेंगे।*

 *रामबाण गोली-सोंठ, सेंधा नमक और शुद्ध गन्धक समान मात्रा में लेकर नीबू-रस में खूब अच्छी तरह घोट लें। इनकी नन्हीं-नन्हीं (चने बराबर) गोलियाँ बना लें। जब भी कब्ज हो, अजीर्णता सताए, दो गोली सुबह और दो गोली शाम को चूस लें। सारे कष्ट दूर हो जाएंगे।*


*अतिसार (दस्त)*


*एक कप पानी में एक नीबू का रस निचोड़ लें और उसमें सेंधा नमक मिला लें। बारह घंटों में पाँच बार सेवन करें। दस्त बंद हो जाएंगे और शरीर भी ढीला नहीं पड़ेगा।*

*एक जायफल और तीन रत्ती अफीम को नीबू छेदकर डाल दें। उस पर कोई साफ-सुधरा कपड़ा लपेटकर गीली मिट्टी चढ़ा दें और आग पर पका लें। ठंडा हो जाने पर मिट्टी आदि उतार दें और नीबू में से जायफल व अफीम निकाल लें। अब नीबू की कोई जरूरत नहीं उसे फेंक दें। जायफल और अफीम में थोड़ा जल डालकर एक दर्जन गोलियाँ बना लें। तीन-तीन घंटे बाद गोली का सेवन करें। दस्त बंद हो जाएंगे और तबीयत संभलने लगेगी।*

*नीबू-रस में नाममात्र की अफीम घिसकर चटाने से भी अतिसार का वेग शांत हो जाता है।*


*अम्लपित्त:-शरीर में गर्मी और तेजाबी माद्दा जमा हो जाए तो अनेक विकार पैदा हो जाते हैं। इसका बड़ा ही आसान इलाज है-कोसे (कवोष्ण, हल्के गर्म) पानी में नीबू निचोड़कर पी जाइए एक बार न आए तो एक और बार पी जाइए।*

*आँव-दस्त या आमातिसार:-पेचिश या मरोड़ के साथ अगर आँव आती रहे तो नीबू की शरण में आइये। नीबू के रस में एकाध रत्ती अफीम घोलकर उसमें प्याला-भर दूध मिला दें। तुरन्त पी जाए। न पेचिश सताएगी और न मरोड़ उठेंगे।*


*पेट दर्द उपचार-एक चौथाई ‘नीबू-रस निकालें, एक तोला काला नमक, और तीन माशा हींग भी लें। किसी साफ शीशी में, निचुड़े हुए नीबुओं का गूदा डाल दें, उसमें बीज नहीं होना चाहिए। गूदे के ऊपर काला नमक डालकर शीशी को हिलाए और धूप में डाल दें। गूदा गल जाने पर नीबू का रस और हींग भी डाल दें। शीशी को ढक्कन लगाकर तीन सप्ताह चाहे धूप में रखें, चाहे धरती में गाड़ दें। दवा तैयार उदर-शूल में विशेष हितकारी है।*

*काला नमक, त्रिफला सोंठ, सनाय की पत्ती, चारों समान मात्रा में लेकर नीबू के रस में बारीक पीस दें। इसकी गोलियाँ बना लें। जब भी पेट में शूल उठे, दो गोली सुबह और दो गोली शाम को ताजा पानी के साथ निगल लें। दर्द और चमक शांत हो जाएंगे।*

*नीबू काटकर उस पर जरा सी हींग और काला नमक बुरक दें। इसे चाटते-चाटते ही हाजमें के डकार आने लगेंगे और इसके साथ ही आप शूल को भूल जाएंगे।*


*कब्ज:-सूखी सब्जियां दिन-रात खाने, दूध-दही को हाथ न लगाने और प्यास मारने से किसी को भी कब्ज हो सकती है। कइयों का पेट सप्ताहों तक सख्त बना रहता है। उनके लिए आसान तरीका यह है कि सुबह खाली पेट नमकीन शिकंजी के दो गिलास पी लें। सारा मल निकल जाएगा। पुराने कब्ज में यह क्रिया सुबह-शाम करनी चाहिए। बहुत पुराने कब्ज को तोड़ने के लिए दिनभर में दस नीबू इस्तेमाल किये जा सकते हैं।*

 *बीच-बीच में मीठी शिंकजी भी लेते रहें, इससे नमक और मिठास का सन्तुलन बना रहेगा।*


*खूनी बवासीर उपचार-इसमें दूध के साथ नीबू रस लेना पड़ता है। नीबू मिलते ही दूध न फट जाए, इसके लिए आसान तरीका यह है कि खुली कटोरी में दूध पीते समय साथ-ही साथ बीज से मुक्त नीबू भी दूध में निचोड़ते रहें खूनी बवासीर का यह अकसीर इलाज है।*

* नीबू को काटिये, उस पर सेंधा नमक भुरकिये और चूसते रहिए। खून बहना बन्द हो जाएगा और शरीर में ताजगी भी आने लगेगी।


*जी मिचलाना:-अगर मचली आने लगे या कै (वमन) हो रही हो तो ताजे ठंडे जल में शक्कर घोलकर नीबू निचोड़िये और पी जाइए। कलेजे में ठंडक पड़ जाएगी। सर्दी के दिनों में शक्कर की जगह शहद का इस्तेमाल करना चाहिए। शक्कर की शिकंजी पित्त का प्रकोप शान्त करती है और शहद की शिकंजी सर्दी सहने की क्षमता को बढ़ाती है। सर्दियों में शिकंजी के लिए पानी थोड़ा गुनगुना (हल्का गर्म) लेना चाहिए।*


*दूध उलटना:-यह विकार अधिकतर बच्चो में देखा जाता है। आप नीबू की जड़ दूध में घिसकर वही दूध बच्चे को पिलाइये। न वह दूध उलटेगा, न कमजोर पड़ेगा। बच्चा दूध पी चुके तो नीबू रस की दो बूँदे चम्मच-भर पानी में मिलाकर उसे पिला दें। यह वहम छोड़ दीजिए कि दूध और नीबू विरोधी हैं। गले से उतरते ही दूध तो पहले ही फट जाता है, नीबू से फटने की नौबत कहाँ आएगी !*


*पीलिया:-पांडुरोग (पीलिया) खून की कमी (एनीमिया) का विकार है जो लापरवाही में जानलेवा भी हो सकता है। खून बनाने में सहायक पदार्थों का सेवन करने की अगर क्षमता न हो तो दो तोले नीबू-रस आप हर घंटे बाद ले ही सकते हैं। पीला बदन खून की ललाई से दमकने लगेगा।*


*पेट में कीड़े:-दूषित पानी, बिना धोई साग-सब्जी या फल के साथ कई बार कृमि (कीड़े) पेट में पहुँच जाते हैं। मिट्टी खाने का जिन्हें चस्का लग जाए, उनके पेट में कीड़े पैदा होना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। नीबू के छिलके सुखाकर उसका काढ़ा बनाइए और छानकर पी जाएये। मल के रास्ते कीडों के मुर्दे निकल जाएंगे और चेहरे की रंगत लौटने लगेगी।*


*वायु-विकार:-जंगी हरड़ तोला-भर लेकर आधा तोला शुद्ध तूतिया (नीला थोथा) भी ले लें। दोनों को नीबू रस में खरल करके नन्हीं-नन्हीं गोलियां बना ले। जो लोग नाक सिकोड़कर कहते हैं कि उन्हें गैस ट्रबल (वात प्रकोप) है, उन्हें ये गोलियाँ गाय के घी के साथ लेनी चाहिए। तूतिया के जहर से बचने के लिए गाय का घी लेना ही पड़ता है। दाल-रोटी में भी गाय के दूध का घी उचित रहता है।*


*संग्रहणी:-यह शरीर को निचोड़ डालने वाला विकार है। इसमें नीबू और अफीम का योग कारगर रहता है। नीबू काटकर एक फाँक पर कुल आधी रत्ती अफीम रखकर ऊपर दूसरी फाँक टिकाए। उन्हें आंच पर थोड़ा तपाएं। जब नीबू ठंडा हो जाए तो चूस लें। अफीम न मिले तो नीबू की जड़, अनार की जड़ और असली केसर की चार तुरी डालकर पीसें, पानी के छीटें देकर रगड़ें और पानी में घोलकर पिला दें। संग्रहणी की जड़ें तक हिल जाएंगी। आराम महसूस करके आप यही योग दोबारा लेने पर मजबूर हो जाएंगे।*


*त्वचा व बाल रोग*

*खुजली:-रक्त-विकार में खुजलाने से बड़ा मजा आता है, मगर धीरे-धीरे यह हंसी उड़वाने का लक्षण बन जाता है। कितना अजीब लगता है कि कोई आपसे बात कर रहा हो तो आप पीठ खुजलाते-खुजलाते टाँग उठाकर पिंडली खुजलाने लगें, फिर एक हाथ सिर खुजला रहा हो और दूसरा बगल नाखुन चला रहा हो ! इसका तुरन्त उपचार कीजिए-*

*नारियल के तेल में नीबू का रस मिला लें। तेल में नीबू रस आधी मात्रा में मिलाना चाहिए। इससे बदन की खुलकर मालिश कीजिए। इसके बाद धूप में पानी से मल–मलकर स्नान कीजिए। खाज होगी ही नहीं ! हां, नीबू-रस पीते भी रहिये ताकि खून भी साफ होता रहे।*

*हिलाएं सरसों और हल्दी को नीबू-रस में घोलकर उबटन बना लें और शरीर पर लेपकर, मल-मलकर रगड़ें। खाज तो क्या होगी, बदन मखमल सा मुलायम हो जाएगा।*

*हरताल और गन्धक को नीबू के रस में घोट-पीसकर लगाना भी उत्तम उपचार है।*

 *करौंदे की जड़ नीबू रस में पीसकर लगाना भी उत्तम उपचार है।*

 *खुजली में अगर दाने निकल आए तो नारियल के तेल में आधी मात्रा नीबू रस मिलाकर मालिश करें। शरीर शांत और हल्का हो जाएगा।*


*गंजापन:-अगर सिर पहले ही गंजा हो चुका है तो इसे पैतृक विरासत ही समझना चाहिये। हां, शारीरिक विकार से बाल झड़ रहे हों और सिर में फोड़े-फुंसी हों तो नीबू-रस में जरा सी अफीम घोलकर गंजे भाग पर लेप करें, बाल नये सिरे से उग आएंगे।*

*कुछ 100 जानकारी जिसका ज्ञान सबको होना चाहिए*
1.योग,भोग और रोग ये तीन अवस्थाएं है।
2. *लकवा* - सोडियम की कमी के कारण होता है ।
3. *हाई वी पी में* -  स्नान व सोने से पूर्व एक गिलास जल का सेवन करें तथा स्नान करते समय थोड़ा सा नमक पानी मे डालकर स्नान करे ।
4. *लो बी पी* - सेंधा नमक डालकर पानी पीयें ।
5. *कूबड़ निकलना*- फास्फोरस की कमी ।
6. *कफ* - फास्फोरस की कमी से कफ बिगड़ता है , फास्फोरस की पूर्ति हेतु आर्सेनिक की उपस्थिति जरुरी है । गुड व शहद खाएं
7. *दमा, अस्थमा* - सल्फर की कमी ।
8. *सिजेरियन आपरेशन* - आयरन , कैल्शियम की कमी ।
9. *सभी क्षारीय वस्तुएं दिन डूबने के बाद खायें* ।
10. *अम्लीय वस्तुएं व फल दिन डूबने से पहले खायें* ।
11. *जम्भाई*- शरीर में आक्सीजन की कमी ।
12. *जुकाम* - जो प्रातः काल जूस पीते हैं वो उस में काला नमक व अदरक डालकर पियें ।
13. *ताम्बे का पानी* - प्रातः खड़े होकर नंगे पाँव पानी ना पियें ।
14.  *किडनी* - भूलकर भी खड़े होकर गिलास का पानी ना पिये ।
15. *गिलास* एक रेखीय होता है तथा इसका सर्फेसटेन्स अधिक होता है । गिलास अंग्रेजो ( पुर्तगाल) की सभ्यता से आयी है अतः लोटे का पानी पियें,  लोटे का कम  सर्फेसटेन्स होता है ।
16. *अस्थमा , मधुमेह , कैंसर* से गहरे रंग की वनस्पतियाँ बचाती हैं ।
17. *वास्तु* के अनुसार जिस घर में जितना खुला स्थान होगा उस घर के लोगों का दिमाग व हृदय भी उतना ही खुला होगा ।
18. *परम्परायें* वहीँ विकसित होगीं जहाँ जलवायु के अनुसार व्यवस्थायें विकसित होगीं ।
19. *पथरी* - अर्जुन की छाल से पथरी की समस्यायें ना के बराबर है ।
20. *RO* का पानी कभी ना पियें यह गुणवत्ता को स्थिर नहीं रखता । कुएँ का पानी पियें । बारिस का पानी सबसे अच्छा , पानी की सफाई के लिए *सहिजन* की फली सबसे बेहतर है ।
21. *सोकर उठते समय* हमेशा दायीं करवट से उठें या जिधर का *स्वर* चल रहा हो उधर करवट लेकर उठें ।
22. *पेट के बल सोने से* हर्निया, प्रोस्टेट, एपेंडिक्स की समस्या आती है ।
23.  *भोजन* के लिए पूर्व दिशा , *पढाई* के लिए उत्तर दिशा बेहतर है ।
24.  *HDL* बढ़ने से मोटापा कम होगा LDL व VLDL कम होगा ।
25. *गैस की समस्या* होने पर भोजन में अजवाइन मिलाना शुरू कर दें ।
26.  *चीनी* के अन्दर सल्फर होता जो कि पटाखों में प्रयोग होता है , यह शरीर में जाने के बाद बाहर नहीं निकलता है। चीनी खाने से *पित्त* बढ़ता है ।
27.  *शुक्रोज* हजम नहीं होता है *फ्रेक्टोज* हजम होता है और भगवान् की हर मीठी चीज में फ्रेक्टोज है ।
28. *वात* के असर में नींद कम आती है ।
29.  *कफ* के प्रभाव में व्यक्ति प्रेम अधिक करता है ।
30. *कफ* के असर में पढाई कम होती है ।
31. *पित्त* के असर में पढाई अधिक होती है ।
33.  *आँखों के रोग* - कैट्रेक्टस, मोतियाविन्द, ग्लूकोमा , आँखों का लाल होना आदि ज्यादातर रोग कफ के कारण होता है ।
34. *शाम को वात*-नाशक चीजें खानी चाहिए ।
35.  *प्रातः 4 बजे जाग जाना चाहिए* ।
36. *सोते समय* रक्त दवाव सामान्य या सामान्य से कम होता है ।
37. *व्यायाम* - *वात रोगियों* के लिए मालिश के बाद व्यायाम , *पित्त वालों* को व्यायाम के बाद मालिश करनी चाहिए । *कफ के लोगों* को स्नान के बाद मालिश करनी चाहिए ।
38. *भारत की जलवायु* वात प्रकृति की है , दौड़ की बजाय सूर्य नमस्कार करना चाहिए ।
39. *जो माताएं* घरेलू कार्य करती हैं उनके लिए व्यायाम जरुरी नहीं ।
40. *निद्रा* से *पित्त* शांत होता है , मालिश से *वायु* शांति होती है , उल्टी से *कफ* शांत होता है तथा *उपवास* ( लंघन ) से बुखार शांत होता है ।
41.  *भारी वस्तुयें* शरीर का रक्तदाब बढाती है , क्योंकि उनका गुरुत्व अधिक होता है ।
42. *दुनियां के महान* वैज्ञानिक का स्कूली शिक्षा का सफ़र अच्छा नहीं रहा, चाहे वह 8 वीं फेल न्यूटन हों या 9 वीं फेल आइस्टीन हों ,
43. *माँस खाने वालों* के शरीर से अम्ल-स्राव करने वाली ग्रंथियाँ प्रभावित होती हैं ।
44. *तेल हमेशा* गाढ़ा खाना चाहिएं सिर्फ लकडी वाली घाणी का , दूध हमेशा पतला पीना चाहिए ।
45. *छिलके वाली दाल-सब्जियों से कोलेस्ट्रोल हमेशा घटता है ।*
46. *कोलेस्ट्रोल की बढ़ी* हुई स्थिति में इन्सुलिन खून में नहीं जा पाता है । ब्लड शुगर का सम्बन्ध ग्लूकोस के साथ नहीं अपितु कोलेस्ट्रोल के साथ है ।
47. *मिर्गी दौरे* में अमोनिया या चूने की गंध सूँघानी चाहिए ।
48. *सिरदर्द* में एक चुटकी नौसादर व अदरक का रस रोगी को सुंघायें ।
49. *भोजन के पहले* मीठा खाने से बाद में खट्टा खाने से शुगर नहीं होता है ।
50. *भोजन* के आधे घंटे पहले सलाद खाएं उसके बाद भोजन करें ।
51. *अवसाद* में आयरन , कैल्शियम , फास्फोरस की कमी हो जाती है । फास्फोरस गुड और अमरुद में अधिक है
52.  *पीले केले* में आयरन कम और कैल्शियम अधिक होता है । हरे केले में कैल्शियम थोडा कम लेकिन फास्फोरस ज्यादा होता है तथा लाल केले में कैल्शियम कम आयरन ज्यादा होता है । हर हरी चीज में भरपूर फास्फोरस होती है, वही हरी चीज पकने के बाद पीली हो जाती है जिसमे कैल्शियम अधिक होता है ।
53.  *छोटे केले* में बड़े केले से ज्यादा कैल्शियम होता है ।
54. *रसौली* की गलाने वाली सारी दवाएँ चूने से बनती हैं ।
55.  हेपेटाइट्स A से E तक के लिए चूना बेहतर है ।
56. *एंटी टिटनेस* के लिए हाईपेरियम 200 की दो-दो बूंद 10-10 मिनट पर तीन बार दे ।
57. *ऐसी चोट* जिसमे खून जम गया हो उसके लिए नैट्रमसल्फ दो-दो बूंद 10-10 मिनट पर तीन बार दें । बच्चो को एक बूंद पानी में डालकर दें ।
58. *मोटे लोगों में कैल्शियम* की कमी होती है अतः त्रिफला दें । त्रिकूट ( सोंठ+कालीमिर्च+ मघा पीपली ) भी दे सकते हैं ।
59. *अस्थमा में नारियल दें ।* नारियल फल होते हुए भी क्षारीय है ।दालचीनी + गुड + नारियल दें ।
60. *चूना* बालों को मजबूत करता है तथा आँखों की रोशनी बढाता है ।
61.  *दूध* का सर्फेसटेंसेज कम होने से त्वचा का कचरा बाहर निकाल देता है ।
62.  *गाय की घी सबसे अधिक पित्तनाशक फिर कफ व वायुनाशक है ।*
63.  *जिस भोजन* में सूर्य का प्रकाश व हवा का स्पर्श ना हो उसे नहीं खाना चाहिए
64.  *गौ-मूत्र अर्क आँखों में ना डालें ।*
65.  *गाय के दूध* में घी मिलाकर देने से कफ की संभावना कम होती है लेकिन चीनी मिलाकर देने से कफ बढ़ता है ।
66.  *मासिक के दौरान* वायु बढ़ जाता है , 3-4 दिन स्त्रियों को उल्टा सोना चाहिए इससे  गर्भाशय फैलने का खतरा नहीं रहता है । दर्द की स्थति में गर्म पानी में देशी घी दो चम्मच डालकर पियें ।
67. *रात* में आलू खाने से वजन बढ़ता है ।
68. *भोजन के* बाद बज्रासन में बैठने से *वात* नियंत्रित होता है ।
69. *भोजन* के बाद कंघी करें कंघी करते समय आपके बालों में कंघी के दांत चुभने चाहिए । बाल जल्द सफ़ेद नहीं होगा ।
70. *अजवाईन* अपान वायु को बढ़ा देता है जिससे पेट की समस्यायें कम होती है
71. *अगर पेट* में मल बंध गया है तो अदरक का रस या सोंठ का प्रयोग करें
72. *कब्ज* होने की अवस्था में सुबह पानी पीकर कुछ देर एडियों के बल चलना चाहिए ।
73. *रास्ता चलने*, श्रम कार्य के बाद थकने पर या धातु गर्म होने पर दायीं करवट लेटना चाहिए ।
74. *जो दिन मे दायीं करवट लेता है तथा रात्रि में बायीं करवट लेता है उसे थकान व शारीरिक पीड़ा कम होती है ।*
75.  *बिना कैल्शियम* की उपस्थिति के कोई भी विटामिन व पोषक तत्व पूर्ण कार्य नहीं करते है ।
76. *स्वस्थ्य व्यक्ति* सिर्फ 5 मिनट शौच में लगाता है ।
77. *भोजन* करते समय डकार आपके भोजन को पूर्ण और हाजमे को संतुष्टि का संकेत है ।
78. *सुबह के नाश्ते* में फल , *दोपहर को दही* व *रात्रि को दूध* का सेवन करना चाहिए ।
79. *रात्रि* को कभी भी अधिक प्रोटीन वाली वस्तुयें नहीं खानी चाहिए । जैसे - दाल , पनीर , राजमा , लोबिया आदि ।
80.  *शौच और भोजन* के समय मुंह बंद रखें , भोजन के समय टी वी ना देखें ।
81. *मासिक चक्र* के दौरान स्त्री को ठंडे पानी से स्नान , व आग से दूर रहना चाहिए ।
82. *जो बीमारी जितनी देर से आती है , वह उतनी देर से जाती भी है ।*
83. *जो बीमारी अंदर से आती है , उसका समाधान भी अंदर से ही होना चाहिए ।*
84. *एलोपैथी* ने एक ही चीज दी है , दर्द से राहत । आज एलोपैथी की दवाओं के कारण ही लोगों की किडनी , लीवर , आतें , हृदय ख़राब हो रहे हैं । एलोपैथी एक बिमारी खत्म करती है तो दस बिमारी देकर भी जाती है ।
85. *खाने* की वस्तु में कभी भी ऊपर से नमक नहीं डालना चाहिए , ब्लड-प्रेशर बढ़ता है ।
86 .  *रंगों द्वारा* चिकित्सा करने के लिए इंद्रधनुष को समझ लें , पहले जामुनी , फिर नीला ..... अंत में लाल रंग ।
87 . *छोटे* बच्चों को सबसे अधिक सोना चाहिए , क्योंकि उनमें वह कफ प्रवृति होती है , स्त्री को भी पुरुष से अधिक विश्राम करना चाहिए
88. *जो सूर्य निकलने* के बाद उठते हैं , उन्हें पेट की भयंकर बीमारियां होती है , क्योंकि बड़ी आँत मल को चूसने लगती है ।
89.  *बिना शरीर की गंदगी* निकाले स्वास्थ्य शरीर की कल्पना निरर्थक है , मल-मूत्र से 5% , कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ने से 22 %, तथा पसीना निकलने लगभग 70 % शरीर से विजातीय तत्व निकलते हैं ।
90. *चिंता , क्रोध , ईर्ष्या करने से गलत हार्मोन्स का निर्माण होता है जिससे कब्ज , बबासीर , अजीर्ण , अपच , रक्तचाप , थायरायड की समस्या उतपन्न होती है ।*
91.  *गर्मियों में बेल , गुलकंद , तरबूजा , खरबूजा व सर्दियों में सफ़ेद मूसली , सोंठ का प्रयोग करें ।*
92. *प्रसव* के बाद माँ का पीला दूध बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता को 10 गुना बढ़ा देता है । बच्चो को टीके लगाने की आवश्यकता नहीं होती  है ।
93. *रात को सोते समय* सर्दियों में देशी मधु लगाकर सोयें त्वचा में निखार आएगा
94. *दुनिया में कोई चीज व्यर्थ नहीं , हमें उपयोग करना आना चाहिए*।
95. *जो अपने दुखों* को दूर करके दूसरों के भी दुःखों को दूर करता है , वही मोक्ष का अधिकारी है ।
96. *सोने से* आधे घंटे पूर्व जल का सेवन करने से वायु नियंत्रित होती है , लकवा , हार्ट-अटैक का खतरा कम होता है ।
97. *स्नान से पूर्व और भोजन के बाद पेशाब जाने से रक्तचाप नियंत्रित होता है*।
98 . *तेज धूप* में चलने के बाद , शारीरिक श्रम करने के बाद , शौच से आने के तुरंत बाद जल का सेवन निषिद्ध है
99. *त्रिफला अमृत है* जिससे *वात, पित्त , कफ* तीनो शांत होते हैं । इसके अतिरिक्त भोजन के बाद पान व चूना ।  देशी गाय का घी , गौ-मूत्र भी त्रिदोष नाशक है ।
100. इस विश्व की सबसे मँहगी *दवा। लार* है , जो प्रकृति ने तुम्हें अनमोल दी है ,इसे ना थूके ।

_*जनजागृति हेतु लेख को पढ़ने के बाद साझा अवश्य करें*।🌷☘🌺 ☘ 🌺 🌷

*अर्थव्यवस्था का दुश्मन साइकिल चालक* 😆😆😆😆😆😆
*आश्चर्यजनक लेकिन सत्य ।          संजय ठकराल, यूरो एक्जिम बैंक के सीईओ, अर्थ चक्र कैसे चलता है,  इसका विश्लेषण करते हुए अर्थशास्त्रियों के बीच कहते हैं-*
*एक साईकिल चलाने वाला देश की अर्थव्यवस्था के लिये किस प्रकार घातक है ।*
 -न तो वह कार खरीदता है, न ही कार के लिए लोन ही लेता है।
- न ही वह इनस्योरैन्स लेता है। -न ही वह पैट्रोल खरीदता है। -न ही वह कार की सर्विस कराता है ,न ही मरम्मत। -न ही वह पार्किंग का उपयोग करता है। -
*न ही उसे मोटापा सताता है। -जी हाँ---स्वस्थ् आदमी के कारण अर्थव्यवस्था नहीं चलती*।
न तो वह दवा खरीदेगा ,न ही हास्पिटल और डॉक्टर का मुँह देखेगा । -ऐसे लोग देश की GDP में कोई योगदान नहीं करते।जबकि एक मैकडोनाल्ड का रैस्त्रराँ कम से कम 30लोगों के लिये रोजगार सृजन करता है। 10 हृदय रोग विशेषज्ञ,10 दाँतों के डॉक्टर,10 वजन घटाने वाले विशेषज्ञ और इसके अलावा उस रैस्त्रराँ में काम करने वाले कर्मचारी। *आप क्या चुनेंगे  एक साईकिल वाला या एक मैकडॉनल्ड्स ।*
😃😃😃😆👍😆👍👍





जो भी साथी गम्भीरता के साथ गौ विज्ञान मंत्रालय बनाने के कार्य मे सहयोग करना चाहते हैं वह नीचे दिए गए ईमेल पर तुरन्त सम्पर्क करें।
धन्यवाद आपका साथी नवनीत तोमर।
विधानसभा प्रभारी बने
सदमार्ग परिवार गौपालन आरम्भ हो गौपालक तैयार किये जायें। मुफ्तखोरी बढ़ा रही विभिन्न सरकारी योजनाओं सब्सिडी और मनरेगा आदि को गौपालन से जोड़ा जाए। देश को स्वावलंबी, स्वाभिमानी एवं स्वदेशी स्वरोजगार लिये गौविज्ञान मंत्रालय का गठन किया जाए । जिससे राष्ट्र स्वस्थ व समृद्ध बने सदमार्ग परिवार इस मिशन पर योजनाबद्ध लगा है।
*गौविज्ञान मंत्रालय के गठन के लिये आप किस ........... ........? विधानसभा
के प्रभारी का दायित्व लें सकते हैं*। अपना सहमति पत्र,आधारकार्ड व नवितनतम फोटो अखिलभारतीय सनातन विद्वत परिषद की ईमेल sadmarg.asvp@gmail.com पर सेंड करें। डॉ मनोज शर्मा गुरुजी 9215229687 मुख्यालय-सनातन विज्ञान भवन,कौशिक कॉम्पलेक्स, गुमानिवाला,ऋषिकेश,उत्तराखंड फोन 0135 2450687 वेबसाइट www.sadmarg.com
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नवनीत तोमरग
राष्ट्रप्रथम वन्देमातरम





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